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फिर सिर उठाने लगी खालिस्तानी की मांग

  •         वृंदा यादव

अलग देश खालिस्तान की मांग को लेकर खालिस्तानी आंदोलन के तार वैसे तो आजादी के 18 साल पहले 1929 में हुए लाहौर अट्टिवेशन से ही जुड़े हैं, जिसमें शिरोमणि अकाली दल ने सिखों के लिए अलग राज्य की मांग की थी। ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बाद इसमें थोड़ा ठहराव जरूर नजर आया था मगर बीते कुछ समय से ‘बब्बर खालसा’, ‘सिख फॉर जस्टिस’, ‘वारिस पंजाब दे’ जैसे संगठन फिर से सिर उठाते दिख रहे हैं

खालिस्तान यानी खालसाओं का अलग देश की मांग को लेकर खालिस्तानी समर्थकों का आतंक एक बार फिर से देखने को मिला है। इस आंदोलन के तार वैसे तो आजादी के 18 साल पहले 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन से ही जुड़े हुए हैं, जिसमें शिरोमणि अकाली दल ने सिखों के लिए अलग राज्य की मांग की थी, लेकिन आजादी के बाद जब भारत और पाकिस्तान अलग हुए तो इस मांग को और हवा मिली। 1947 में ही ‘पंजाबी सूबा आंदोलन’ शुरू हुआ। 1966 में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी, तब पंजाब तीन टुकड़ों में बंटा। सिखों की बहुलता वाला हिस्सा पंजाब, हिंदी भाषियों की बहुलता वाला हिस्सा हरियाणा और तीसरा हिस्सा चंडीगढ़ बना। इसके बावजूद खालिस्तान की मांग जारी है।

गत् पखवाड़े 23 और 24 फरवरी को खालिस्तानी समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के हथियारबंद समर्थकों ने अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला कर खूब बवाल मचाया। इस दौरान लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी के खिलाफ अमृतपाल सिंह ने सैकड़ों समर्थकों के साथ तलवार, लाठी और डंडों के साथ पुलिस थाने पर हमला बोल पांच घंटों तक थाने पर कब्जा किए रहे। इनकी मांग थी की उनके साथी लवप्रीत उर्फ तूफान को रिहा कर दिया जाये जिसके खिलाफ चमकौर साहिब के रहने वाले वरिंदर सिंह के अपहरण व मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था। शुरुआत में पुलिस इस मामले पर एकदम शांत नजर आ रही थी। प्रदर्शन को बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा के लिए बेरिकेड्स लगाए गए थे। जब खालिस्तान समर्थक उन बेरिकेड्स को तोड़कर अंदर जाने में असमर्थ हुए तब खुद अमृतपाल वहां श्रीगुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप के साथ मैदान में आया। जिसे देखकर पुलिस वाले ठिठक गए। उन्होंने अमृतपाल व प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी न हो जाए इसलिए रास्ते से किनारे होते गए। पुलिस स्टेशन के अंदर आकर उसने खुले में खालिस्तान की मांग कर दी और न सिर्फ पुलिस अधिकारियों पर हमला कर उन्हें धमकी दी बल्कि गृह मंत्री अमित शाह तक को धमकी दे डाली। अमृतपाल ने कहा कि ‘अमित शाह ने कहा था कि वह खालिस्तान आंदोलन को आगे नहीं बढ़ने देंगे। लेकिन मैं कहता हूं की इंदिरा गांधी ने भी ऐसा ही किया था। जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपको भी इसकी सजा मिलेगी।’ उसका कहना है कि जब हिंदू समुदाय हिंदू राष्ट्र की मांग कर सकते हैं तो हम खालिस्तान की मांग क्यों नहीं कर सकते।

क्या है पूरा मामला
खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के साथी तूफान सिंह समेत कुल 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने अमृतपाल के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले एक युवक का अपहरण कर उसे बुरी तरह पीटा था। जिसके बाद पीड़ित वरिंदर सिंह ने 16 फरवरी को अजनाला पुलिस स्टेशन में तूफान और उसके साथियों पर उन्हें अगवा कर मारपीट करने का मामला दर्ज कराया। तूफान सिंह ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह, का बेहद करीबी है। 18 फरवरी को पुलिस ने गुरदासपुर से लवप्रीत तूफान को गिरफ्तार कर लिया। जिससे अमृतपाल बौखला उठा और पंजाब सरकार और पुलिस को चेतावनी दी कि अगर उसके साथी को 24 घंटे में न छोड़ा गया तो वे लोग कार्रवाई करेंगे। 23 फरवरी को अमृतपाल के समर्थक अजनाला पुलिस स्टेशन के बाहर इक्ट्ठा होना शुरू हो गए। शुरुआत में पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की। फिर अमृतपाल गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र ग्रंथ के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा और कुछ ही समय बाद अजनाला पुलिस चौकी उसके कब्जे में आ गई। दबाव में आकर पुलिस ने अगले ही दिन तूफान को रिहा कर दिया।

इससे पहले भी हुए हैं प्रदर्शन
1-17 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में शिव विष्णु मंदिर में तोड़-फोड़ की और तोड़-फोड़ के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने मंदिर की दीवार पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखें। इससे पहले 12 जनवरी को स्वामी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी नारे लिखे मिले थे। 2-29 जनवरी 2023ः ऑस्ट्रेलिया के कई हिंदू मंदिरों में हिंदू विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे मिलें। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में खालिस्तान का झंडा लिये खालिस्तानी समर्थकों और तिरंगा लिये भारतीयों के बीच हिंसक टकराव हुआ। खालिस्तानियों ने तिरंगा लहराने वाले भारतीयों की लाठियों और डंडों से पिटाई की और भारत विरोधी नारे भी लगाए।

3-9 मई 2022 : पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित खुफिया विभाग के मुख्यालय पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से ब्लास्ट किया गया।
4-4 नवंबर, 2022ः को अमृतसर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या तब कर दी गई जब वे भगवान् की मूर्ति कूड़े में मिलने के विरोध में गोपाल मंदिर के बहार धरने पर बैठे थे। सुधीर खालिस्तान के कड़े विरोधी थे। जिसके कारण वे कई सालों से खालिस्तानियों की हिट लिस्ट में थे।

6-10 दिसंबर 2022 खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने पंजाब के तरनतारन में आतंकी हमला किया। आतंकियों ने सरहाली थाने को निशाना बनाते हुए रॉकेट लॉन्चर से हमला किया। गौरतलब है कि 80 के दशक में पंजाब में हिंसक घटनाएं बढ़ती जा रही थीं। इसके पीछे था, जरनैल सिंह भिंडरावाले, जिसे ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ में मार गिराया गया था। इसके बाद 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या, 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट में ब्लास्ट, 1995 में तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या, एक दशक के भीतर कई बड़ी घटनाएं हुईं। हालांकि इसके बाद काफी हद तक खालिस्तानी घटनाएं कम हो गई थीं, लेकिन भारत से बाहर खालिस्तान की मांग को लेकर आंदोलन होते रहे। भारत एक लंबे समय तक खालिस्तानी आतंक से मुक्त रहा, लेकिन हाल के वर्षों में एक बार फिर यह सिर उठाने लगा है। कई मौकों पर खालिस्तान समर्थक हिम्मती होते दिखे हैं। इनमें बब्बर खालसा, सिख फॉर जस्टिस, वारिस पंजाब दे जैसे संगठन फिर से सिर उठाते दिख रहे हैं।

विदेश बैठकर भारत के खिलाफ साजिशः
सिख फॉर जस्टिस का स्वघोषित सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू विदेश में बैठकर पंजाब और हरियाणा में आतंकी साजिश रचता रहता है। पटियाला में खालिस्तान विरोधी मार्च पर
खालिस्तान समर्थकों द्वारा हमले के केंद्र में भी पन्नू ही रहा है। एक बार उसने भारतीय युवाओं को खालिस्तान का समर्थन करने और झंडा उठाने के एवज में आईफोन देने का वायदा किया था।

किसान आंदोलन से जुड़े थे तारः कृषि कानूनों के विरोध में लंबे चले किसान आंदोलन के तार भी खालिस्तान समर्थकों से जुड़े थे। सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारी कथित तौर पर खालिस्तानी कट्टरपंथी जनरैल सिंह भिंडरावाले के फोटो लहराते दिखे थे और खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी भी हुई थी। तब एक बुक स्टॉल से ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए जरनैल सिंह भिंडरावाला और उनके साथियों का महिमामंडन करने वाली किताब शहीद-ए- खालिस्तान भी बांटी गई थी। बाद में लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराए जाने के भी आरोप लगे, हालांकि वह झंडा सिखों का एक धार्मिक झंडा था।

विधानसभा के बाहर खालिस्तानी झंडेः
पिछले साल मई में हिमाचल विधानसभा के बाहर खालिस्तानी झंडे बंधे नजर आए थे। धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसभा भवन के बाउंड्री वॉल पर खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखे गए थे। मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया था कि घटनास्थल से ही वीडियो बनाकर सिख फॉर जस्टिस का प्रमुख पन्नू को शेयर किए गए थे। एसआईटी ने 247 लोगों के एक मॉडयूल का पता लगाया था, जिसमें 15 तो विदेशी थे, जबकि 188 देश के भीतर के ही थे।

पटियाला में पन्नू के इशारे पर बवालः पंजाब के पटियाला में पिछले साल 30 अप्रैल को जबरदस्त हिंसा हुई थी। खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने का एलान किया था, जिसके बाद स्थानीय हिंदू संगठन ने खालिस्तानी मुर्दाबाद मार्च निकालने का एलान किया था। मार्च निकालने के बाद खालिस्तान समर्थकों ने विरोध किया और दोनों समुदायों के बीच तनाव ऐसा बढ़ा कि पत्थरबाजी और बवाल में तब्दील हो गया था।

कनाडा से यूके और ऑस्ट्रेलिया तक मौजूदगी
खालिस्तान समर्थक संगठनों और आतंकियों की मौजूदगी कनाडा से लेकर दुबई, पाकिस्तान, यूके और ऑस्ट्रेलिया तक रही है। विदेशों में कई हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं, जिनके तार खालिस्तान समर्थकों से जुड़े थे। बीते 12 जनवरी को स्वामीनारायण मंदिर पर हमला, 16 जनवरी को विक्टोरिया के श्रीशिवा विष्णु मंदिर में तोड़फोड़, 23 जनवरी को मेलबर्न के इस्कॉन टेंपल में तोड़-फोड़ महाशिवरात्रि पर क्वीन्सलैंड के गायत्री मंदिर में कॉल पर धमकी देकर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने को कहा गया था। ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

लगातार गिरफ्तारियों से बौखलाहट
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश राज्यों में लगातार खालिस्तान समर्थक आतंकियों की गिरफ्तारी होती रही है। मई 2022 में करनाल में दिल्ली को दहलाने की साजिश रचने वाले बब्बर खालसा से जुड़े चार आतंकवादी भारी मात्रा में हथियार के साथ गिरफ्तार किए गए थे।

क्या है खालिस्तान

वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख अमृतपाल सिंह

खालिस्तान का शाब्दिक अर्थ है ‘खालसाओं का देश।’ सिख समुदाय आजादी के पहले से ही खालिस्तान के रूप में एक अलग राष्ट्र की मांग कर रहा है। लेकिन आजादी के बाद से खालिस्तान की मांग और प्रबल हो गई। जब भारत को दो टुकड़ों भारत (हिंदू बहुल क्षेत्र) और पाकिस्तान (मुस्लिम बहुल क्षेत्र) में विभाजित कर दिया गया। इस विभाजन में पंजाब प्रांत के भी दो टुकड़े हो गए। पंजाब का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया और दूसरा हिस्सा भारत के हिस्से में आया। विभाजन के बाद आम जनता को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा क्योंकि पाकिस्तान में फंसे हिंदुओं को मुस्लिमों द्वारा और भारत में उपस्थित मुस्लिमों को हिंदुओं द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। लेकिन इन सब के बीच पंजाब में रहने वाले सिख समुदाय को अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि काफी मात्रा में पाकिस्तान में रहने वाले हिदू-सिक्खों को भागकर भारत आना पड़ा। जिसके बाद सिख समुदाय को ऐसा एहसास हुआ कि धर्मों की बहुलता के आधार जिस प्रकार भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ है उसी प्रकार सिखों के लिए एक अलग राष्ट्र ‘खालिस्तान’ बनाया जाना चाहिए। ­­­­­

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