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देश के अनाज भंडार में आई कमी

भारत में अनाज की मात्रा में आई कमी के कारण लगातार उनकी कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल रही है। सितंबर में खुदरा महंगाई की दर में करीब 7.41 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है।वहीं दूसरी ओर अब एक और बड़ी समस्या देश के सामने खड़ी हो गई है जिसके अनुसार सरकारी एजेंसियों के पास गेहूं और चावल का स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है।

 

गौरतलब है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में वर्तमान में गेहूं का स्टॉक बहुत कम रह गया है। जो पिछले 6 वर्षों की तुलना में सबसे कम है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर को सार्वजनिक गोदामों में गेहूं और चावल का कुल स्टॉक 511.4 लाख टन था जिसका आंकड़ा एक साल पहले 816 लाख टन था।

 

चावल से ज्यादा गेहूं में आई है कमी

 

चावल और गेहूं की बढ़ती मेहंगाई पर अगर ध्यान दें तो यह पता चलता है कि पिछले कुछ समय में गेहूं का का स्टॉक तेजी से घटा है। एक साल पहले एक अक्टूबर को इन एजेंसियों के पास गेहूं का स्टॉक 468.52 लाख टन का था। जो बीते एक अक्टूबर को 227.46 लाख टन तक घट गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि चावल के स्टॉक में भी इस हद तक कमी आई हो। चावल स्टॉक की स्थिति अभी इतनी चिंताजनक नहीं है। सरकार के नियमों के अनुसार साल के इस महीने तक चावल का स्टॉक 102.5 लाख टन होना चाहिए जो वर्तमान में करीब 283.9 लाख टन है। मतलब देश के लिए ये राहत की बात है। मतलब कि अभी देश में चावल का भंडार न्यूनतम बफर का 2.8 गुना है।

कारण : देश में इस प्रकार तेजी से गेहूं के स्टॉक में कमी आने का महत्वपूर्ण कारण जलवायु परिवर्तन है। हर दिन बेमौसम बरसात हो रही है जिसके कारण फसल के बीज मिट्टी में ही सड़ जाते हैं और फसल खराब हो जाती है। दूसरी और रूस -यूक्रेन के युद्ध भी दुनिया में खड़ध्यान संकट का कारण सिद्ध हुआ है।

 

गेहूं और आटे पर प्रतिबंध

 

लगभग सात महीनों से जारी रूस – यूक्रेन युद्ध के चलते दुनियाभर में खाद्य संकट गहराने के कारण हालात यह हुए कि कई देशों में भुखमरी की नौबत आ गई । इसलिए भारत सरकार ने गेहूं और आटा निर्यात प्रतिबंध लगाया है । इससे पहले मई के महीने में भारत सरकार ने भारत में आई गेहूं उत्पादन में कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की बढ़ती कीमतों के कारण गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया दिया था। जिससे भारत में घरेलू स्तर पर गेहूं की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सके।

 

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