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अनुसूचित जाति के लिए आवंटित कुल राशि का 20% भी नहीं खर्च कर सकी केंद्र सरकार

डीएपीएससी(डेवेलपमेंट एक्शन प्लान फ़ॉर शिड्यूल कास्ट) सरकार की एक पहल है जिसके तहत अनुसूचित जातियों (एससी) के उत्थान के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की योजनाओं के लिए धन आवंटित किया जाता हैं।

न्यूज पोर्टल द प्रिंट के हवाले से यह पता चला है कि वर्ष 2017-18 से लेकर 2020-21 के बीच अनुसूचित जातियों (एससी) के कल्याण के लिए आवंटित कुल धनराशि का लगभग 20 प्रतिशत (लगभग 50,000 करोड़ रुपये) कई केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा अप्रयुक्त रह गया यानी कि बिना उपयोग किए ही छोड़ दिया गया।

अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 50,000 करोड़ या कुल राशि का 20% भी 4 साल में खर्च नहीं कर पाई मोदी सरकार

पिछले चार साल में 2017-18 से 2020-21 तक डीएपीएससी के तहत कुल 2,59,977.40 करोड़ रुपये या करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

संवाददाताओं के मुताबिक इसकी वजह से मोदी सरकार ने आवंटन के संबंध में बदलाव के प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत मंत्रालयों/विभागों में एक समान वितरण के बजाय उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश किए जाने पर जोर दिया जाएगा और लाभार्थियों को 50,000 रुपये तक का नकद हस्तांतरण किया जाता है।

अप्रयुक्त धनराशि का मामला और आवंटन के लिए नए सिस्टम वाले सरकार के प्रस्ताव का मुद्दा इस महीने की शुरुआत में अनुसूचित जाति के लिए विकास कार्य योजना (डीएपीएससी) 2019-20 की समीक्षा बैठक में उठा।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ‘इस अवधि में कुल आठ मंत्रालय/विभाग के पास इस अप्रयुक्त धनराशि का 80 फीसदी हिस्सा है। इनमें कृषि विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इत्यादि शामिल है।’

अधिकारियों ने कहा कि फ्रेमवर्क में बदलाव का प्रस्ताव केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिया गया और इसे ‘पीएम-सोशल इन्क्लूजन मिशन (सिम)’ के रूप में प्रस्तुत किया गया। पीएम-सिम के तहत यह सुझाव दिया गया है कि एससी के लिए 40 प्रतिशत फंड उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश किया जाए और 60 सशर्त नकद हस्तांतरण के माध्यम से दिया जाए।

सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को सबसे पहले सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने पेश किया था। इसे अभी मंजूरी दी जानी बाकी है।

पिछले चार साल में 2017-18 से 2020-21 तक डीएपीएससी के तहत कुल 2,59,977.40 करोड़ रुपये या करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

‘प्रस्तावित पीएम-सिम एक सशर्त कैश ट्रांसफर स्कीम hai इसके जरिए एक करोड़ गरीब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों को लाभ मिलेगा।’ एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रत्यक्ष लाभ का हस्तांतरण तीन महीने में एक बार यानी कि तिमाही आधार पर उनके जनधन खातों में किया जाएगा।

इसके जरिए एक परिवार को अधिकतम 50,000 रुपये प्रति वर्ष की राशि मिल सकती है. नकद हस्तांतरण परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिया जाएगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव आर सुब्रह्मण्यम ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि अनुसूचित जाति के लिए विभिन्न मंत्रालयों को आवंटित धन का पूरा उपयोग किया जाए और बेहतर परिणाम प्राप्त किए जाएं।

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