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स्वच्छता सर्वेक्षण में पहले पायदान पर तेलंगाना

साल 2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर साल देश के सभी राज्यों का सर्वेक्षण किया जाता है। इस सर्वेक्षण के अंतर्गत जो क्षेत्र स्वच्छता में श्रेष्ठ स्थान पर आता है उसे ”स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्कार” से सम्मानित किया जाता है। इस सर्वेक्षण में यह देखा जाता है कि स्वच्छता की स्थिति में सुधार करने के लिए ग्रामीण समुदाय की भागीदारी कैसी रही है।

 

इस वर्ष किये गए सर्वेक्षण में तेलंगाना ने पहला स्थान प्राप्त कर यह पुरस्कार हासिल किया। वहीं हरियाणा ने दूसरे और तमिलनाडु ने तीसरे स्थान पर अपना नाम दर्ज कराया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों को यह पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। इन बड़े राज्यों के अतिरिक्त छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, अंडमान और निकोबार ने पहला स्थान, दमन और दीव तथा दादर नगर हवेली ने दूसरा स्थान और सिक्किम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा ‘‘जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय, केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति थी, जो तीन वर्षों में बढ़कर 10.27 करोड़ हो गई है। हाल के वर्षों में नल के पानी की पहुंच से जल-जनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है। लेकिन हमारा लक्ष्य बहुत बड़ा है। हमें जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में दुनिया के सामने एक मिसाल कायम करनी है।’’

उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत होने के बाद से शौचालय की स्थिति में आए परिवर्तन की और ध्यान केंद्रित करते हुए कहा शुरुआत में शौचालयों
की संख्या बहुत कम थी लेकिन 2014 के बाद से 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है और करीब 60 करोड़ लोगों ने खुले में शौच करने की अपनी आदत में सुधार किया है। लेकिन खुले में शौच के खिलाफ सफलता हासिल करने के बाद अब हमें ठोस और तरल कचरा प्रबंधन जैसी जटिल और तकनीकी समस्याओं का समाधान करना होगा।

 

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