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पीड़ित मानवता की सशक्त आवाज़ थे स्वामी अग्निवेश

कोरोना काल में आज स्वामी अग्निवेश जी के निधन से देश व दुनिया में बंधुवा जैसी दास प्रथा और हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ सदैव सक्रिय रहने वाली एक सशक्त आवाज़ व मार्गदर्शक को खो दिया है। स्वामी जी से हमारे करीब 40 वर्षों का संबंध था। “जंगल के दावेदार” पाक्षिक का संपादन करते हुए तब  की जानी मानी साहित्यकार महाश्वेता जी के बुलावे पर 1981 में तत्कालीन मध्यप्रदेश व आज के झारखंड क्षेत्र में बंधुवा मुक्ति मोर्चे की राष्ट्रीय चौपाल में उनसे मेरी पहली मुलाक़ात हुई थी। उसके बाद दिल्ली के जंतर मंतर का उनका कार्यालय देश के तमाम क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों की तरह हमारा भी अड्डा हो गया था। स्वामी जी हमारे गांव बसभीड़ा से शुरू हुए “नशा नहीं रोज़गार दो आंदोलन” को समर्थन देने 17 जून 1984 को नैनीताल में आयोजित रैली में पधारे। उनके कई कार्यक्रमों, शिविरों में हम लोग शामिल रहते थे।
नाथहारा मंदिर में दलितों के प्रवेश के लिए शुरू किए गए उनके आंदोलन में हम सम्मिलित रहे और उदयपुर (राजस्थान) से नाथहारा जाते हुए हमें स्वामी जी के साथ मेरी छोटी बहन डॉ. रेखा जोशी एवम् भतीजी भावना के साथ गिरफ्तार कर दिल्ली तक छोड़ा गया था। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में हुए पहले चुनाव में स्वामी जी ने नंदादेवी के ऐतिहासिक मैदान में हमारी सभा को संबोधित किया था।
नानीसार के ज़मीन आंदोलन को लेकर जंतर मंतर में हुए प्रदर्शन की रूपरेखा उनके कार्यालय में ही बनी और उनके सहयोग से सैकड़ों लोगों के रहने व भोजन की व्यवस्था गुरुद्वारे से संभव हो पाई थी।
गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले आर्यसमाजी स्वामी जी जीवन भर धार्मिक पाखंड के ख़िलाफ़ लड़ते रहे जिसके कारण आज के सत्ताधारियों ने उन्हें अनेक बार निशाना बनाया पर वे डिगे नहीं।
अग्निमेश जी को उत्तराखंड से बहुत स्नेह था। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय की अंग्रेज़ी की प्राध्यापकी छोड़ कर सामाजिक, राजनीतिक जीवन में आए थे। जनता पार्टी के राज में हरियाणा के शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल के गलत कार्यों व मनमानी के ख़िलाफ़ खुला मोर्चा खोलते हुए मंत्री पद छोड़ दिया और लंबे समय तक उनके षड्यंत्रों के ख़िलाफ़ लड़ते रहे।
अग्निवेश के निधन से पीड़ितों की एक सशक्त आवाज़ से देश व दुनिया वंचित हो गई है पर उनका व्यक्तित्व व कार्य जन संघर्षों को ताकत व प्रेरणा देते रहेंगे।
(आलेख: पी. सी. तिवारी । तिवारी जी उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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