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आईएएस अधिकारी टीके शिबू के सस्पेंड पर सस्पेंस

31 मार्च को उत्तर प्रदेश के दो बड़े अधिकारियों के खिलाफ योगी सरकार ने एक्शन लेते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया। तब दावा किया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो टॉलरेंस के चलते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम किया है। इसके चलते ही उन्होंने एक आईएएस और 1 आईपीएस को सस्पेंड किया। यह आईएएस टी के सिबू है। टीके शिबू सोनभद्र के जिला अधिकारी थे। इसके अलावा जिस आईपीएस को सस्पेंड किया गया वह गाजियाबाद के एसएसपी पवन कुमार है।
दोनों अधिकारियों के सस्पेंड पर सरकार श्रेय ले रही है। मीडिया भी सरकार की तारीफों में पुलिंदा बांध रहा है। कहा जा रहा है कि गाजियाबाद के एसएसपी पवन कुमार को इसलिए सस्पेंड किया गया कि गाजियाबाद जिले में वह अपराध को रोक पाने में सक्षम नहीं हो रहे थे। इसके पीछे 25 लाख की लूट को मुख्य कारण बनाया जा रहा है। यह लूट गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के गोविंदपुरम कॉलोनी के डी ब्लॉक स्थित एक पेट्रोल पंप पर हुई थी। जहां बाइक सवार तीन लुटेरों ने इस वारदात को अंजाम दिया था।
वहीं दूसरी तरफ सोनभद्र के डीएम टीके शिबू को सस्पेंड करने के पीछे तर्क दिए जा रहे हैं कि उन पर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और अवैध खनन कराने के आरोप लग रहे थे। जिसके चलते उन्हें सस्पेंड किया गया। चर्चा यह भी है कि योगी सरकार टू में ऐसे अधिकारियों को चिन्हित करके निशाने पर लिया जा रहा है जो सपा के अप्रत्यक्ष रूप से समर्थक थे।
याद रहे कि उत्तर प्रदेश के चुनाव के दौरान एक गाड़ी में ईवीएम मशीन पाई गई थी। यह मशीन सोनभद्र जिले में ही मिली थी। उनका वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था। कहा गया था कि ईवीएम मशीनों को फर्जी काउंटिंग में इस्तेमाल करने के लिए ले जा रहा जा रहा था। हालांकि इस मामले में तत्कालीन डीएम टीके शिबू ने एक उप जिलाधिकारी को सस्पेंड कर दिया था ।
 तब यह मामला बहुत जोरों से उठा। विपक्ष ने इस पर भाजपा सरकार की घेराबंदी कर दी थी । हालत यह हो गई थी कि सोनभद्र में दोबारा चुनाव होने की नौबत आ गई थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कहकर मामले को मैनेज कर लिया था कि वह ईवीएम मशीनें गिनती के लिए प्रशिक्षण दिए जाने के लिए ले जाई जा रही थी।
टीके शिब्बू 2012 बैच के आईएएस अधिकारी है । 23 अक्टूबर को उन्हें सोनभद्र में जिलाधिकारी पद पर तैनाती दी गई थी। इससे पहले वह श्रावस्ती में थे। सोनभद्र जिले में आते ही टीके सिबू ने एक नई पहल की। जिसके लिए वह चर्चाओं में रहे। इसके अनुसार उन्होंने अपने हस्ताक्षर से ग्राम पंचायत सचिवों, एडीओ पंचायतों की तैनाती की।
आईएएस अधिकारी टीके शिबू के मामले में नई कहानी सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि टीके शिबू पर स्थानीय भाजपा नेता ग्राम सभा के निजी पट्टे कराने के लिए दवाब बना  रहे थे। जबकि उन्होंने ऐसा न करके स्थानीय भाजपा नेताओं के दबाव को नहीं माना। हालांकि सच्चाई क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।
राज्यपाल के आदेश पर उनके अपर मुख्य सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी द्वारा इस मामले की जांच कराने के आदेश जारी कर दिए है। वाराणसी मंडल के आयुक्त को शिबू मामले की जांच का अधिकारी बनाया गया है। इस दौरान टीके शिबू राजस्व परिषद के लखनऊ स्थित कार्यालय में संबंध रहेंगे। इसी के साथ ही उन पर यह भी प्रतिबंध रहेगा कि वह बिना लिखित अनुमति प्राप्त किए मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

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