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कुछ ही दिनों में ढहा दिया जाएगा नोएडा स्थित सुपरटेक टावर

नोएडा स्थित सुपरटेक टूईन टॉवर को गिराने का काम जोरों से चल रहा है । सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार आने वाले 21 अगस्त को इसे ढहा दिया जायेगा। इसे गिराने कि प्रक्रिया 2 अगस्त से शुरू होने जा रही है। इस दिन से बिल्डिंग के पिलर्स में विस्फोटक पदार्थ भरे जायेंगे। जिसका काम ‘राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल’ (एनडीआरएफ) द्वारा कराया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण की मुख्य अधिकारी रितु महेश्वरी के मुताबिक 21 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे सुपर टेक की दोनों बिल्डिंगों को गिराया जायेगा। लेकिन इसका असर आसपास के क्षेत्र पर भी पड़ेगा। वाइब्रेशन प्रेडिक्शन रिपोर्ट के अनुसार 34 एमएम का कम्पन प्रति सेकंड होने की सम्भावना जताई गई है।

क्या है मामला

सुपरटेक टावर का निर्माण नोएडा सेक्टर 93 में किया जा रहा था। जिसका बटवारा 2004 में किया गया और इसका एक नक्शा जारी किया गया। सैक्टर 93 का कुल क्षेत्रफल 48 हजार हैक्टर है तो उस समय इस क्षेत्र के नक्शे में 9 मंजिलों के 14 टावर का बनाने की मंजूरी दी गई। जिसमे समय समय पर संशोधन किए गए।
सुपरटेक टावर को गिराए जाने का मूलभूत कारण इसकी ऊंचाई क्योंकी इसकी ऊंचाई नियमित स्थिति से बढ़ती गई और आरडब्ल्यूए से परमिशन लिए जानें की बात को बिल्डर्स ने अनदेखा किया जिसके कारण आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने बाद में इसका विरोध भी किया। एक दूसरा कारण इन दोनों टावर्स के बीच की दूरी है जो आमतौर पर काम से काम 16 मीटर होनी चाहिए लेकिन इनके बीच 16 मीटर से कम गैप है।

सुपरटेक के इस मामले की शुरूआत उस समय हुई जब उस क्षेत्र पर 40 40 मंजिला दो इमारतों को उस स्थान पर खड़ा किया जाने लगा जिसे नोएडा अथॉरिटी ने ग्रीन लैंड घोषित कर रखा था। जिस जमीन पर इस प्रकार के टावर या बिल्डिंग आदि बनाना बाधित था। इसके बावजूद इन टावरों को बनाने का कार्य शुरू किया गाया। लेकिन इसकी केवल 32 मंजिलें ही बनी थी की इसे ढहा देने का आदेश मिला है। क्योंकी वहा के ‘‘रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन’’ (आरडब्लूए) से जुड़े लोगों ने इस बात का फैसला लिया की इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज उठाएगी। जिसमें लगभग 660 लोगों के समूह ने एक साथ मिल कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। क्योंकी ये बिल्डिंग अवैध तरीके से बनाई जा रही है जो सही नही है। क्योंकि इसमें ग्रीन लेंड पर कब्जा किया जा रहा था और यही नहीं नोएडा अथॉरिटी भी इसमें पूर्ण रूप से अपना सहयोग कर रही थी। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था कि इसमें नोएडा अथॉरिटी की मिलीभगत है। क्योंकी शुरुआत में जिसे उन्होंने ही खुद ग्रीनलैंड बताया अब उसपर इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है । शुरुआत में इस योजना पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था जिस फैसले के खिलाफ बिल्डरों सुप्रिम कोर्ट गए और 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को गिराने की मांग को स्वीकार कर लिया।
आरडब्ल्यूए के एक सदस्य पंकज वर्मा ने जीत के बाद बताया कि “पहले कुल 15 टावर थे, जिनमें हम 660 परिवार रहते थे। वहां मिलने वाली सारी सुविधाएं हम लोगों की थीं। लेकिन बिल्डर ने ये दो टावर बनाने के बाद ये सारी सुविधाएं ही नए खरीदारों को दिखा दीं। अब जो दो टावर थे, उनमें करीब 900 फ्लैट थे। अब अगर हमें मिला दिया जाए तो जो सुविधाएं 660 फ्लैट के लिए थीं, वो अब 1500 से ज्यादा फ्लैट के लिए होतीं। अगर ऐसा होता तो ये एक चॉल की तरह बन जाता। इनिशियल प्लान में ये बिल्डिंग कभी थी ही नहीं, ये तो ग्रीन एरिया था। जिस पर टावर खड़े कर दिए गए। इसीलिए हमने तय किया कि हम इसके लिए लड़ाई लड़ेंगे।”

 

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