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समन बनाम सत्याग्रह

इन दिनों देश की राजनीति में ‘नेशनल हेराल्ड’ मामला फिर से सुर्खियों में बना हुआ है। जहां एक तरफ इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय कांग्रेस नेता राहुल गांट्टा से पूछताछ कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ इस मामले को लेकर पूरे देश में कांग्रेस सत्याग्रह आंदोलन जारी है। वैसे तो भाजपा के सत्ता में आने के बाद से देश में सबसे ज्यादा केंद्रीय जांच एजेंसियां सुर्खियों में रही है लेकिन इस बार मामला कुछ और ही है

‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में गत सप्ताह तीन दिनों तक प्रवर्तन निदेशालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लंबी पूछताछ की। कांग्रेस अपने शीर्ष नेतृत्व को ईडी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने को राजनीति संघर्ष में बदलने का जी-तोड़ प्रयास करती नजर आ रही है। उसने देशभर में धरना-प्रदर्शन कर सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ जनव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है जिसे ‘सत्याग्रह’ कह पार्टी पुकार रही है। यहां तक की कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद, पार्टी के वरिष्ठ और दिग्गज नेताओं ने गत तीन दिनों तक दिल्ली में ही डेरा डाल दिया था। इसके अलावा देश के हर राज्य के ईडी के दफ्तर के बाहर कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी के समर्थन में पोस्टर लिए दिखे ‘हम राहुल गांधी के साथ है’, ‘मैं भी राहुल गांधी।’ इसका मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी की कमान संभालते नजर आ सकते हैं और गुजरात, हिमाचल से लेकर लोकसभा चुनाव तक उन्हीं के नेतृत्व में लड़ने पर पार्टी विचार भी कर सकती है।

गौरतलब है कि जहां कांग्रेस पार्टी अपने आंदोलन को सत्याग्रह करार दे रही है तो वहीं भाजपा कांग्रेस पर हमला बोल रही है। भाजपा के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी सत्याग्रह नहीं कर रही है बल्कि गांधी परिवार को बचाने को कोशिश कर रही है। इसके साथ ही भाजपा के नेता यह भी कहते है। कि अगर राहुल गांधी और सोनिया गांधी बेकसूर हैं तो ईडी जाने से पहले इतना बखेड़ा क्यों खड़ा कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी नेशनल हेराल्ड मामले में 23 जून को ईडी के सामने पेश होंगी।

 

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला
नेशनल हेराल्ड मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में होती है। जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका डाली थी, जिसमें उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के ही मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर नेशनल हेराल्ड को हड़पने का आरोप लगाया था। सुब्रमण्यम के मुताबिक,कांग्रेस नेताओं ने ये काम तब किया जब अख़बार घाटे में चल रहा था। आरोप यह था कि, कांग्रेसी नेताओं ने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों पर कब्जे के लिए यंग इंडियन लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। जिसके जरिए नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड का अवैध तरीके से अधिग्रहण कर लिया। बकौल स्वामी ऐसा इसलिए किया गया ताकि इस अधिग्रहण के बाद दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित ‘हेराल्ड हाउस’ की 2000 करोड़ रुपये की बिलि्ंडग पर आराम से कब्जा किया जा सके और किया भी गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैसे तो सुब्रमण्यम स्वामी ने 2000 करोड़ रुपये की कंपनी को केवल 50 लाख रुपये में खरीदे जाने को लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी लेकिन जून 2014 में कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करते हुए इसे सिविल सूर में बदल समन जारी कर दिया। अगस्त 2014 में ईडी इस मामले में सक्रिय हो उठी और उसने मनी लान्ड्रिग का केस दर्ज कर लिया। वर्ष 2015 में दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत सभी आरोपियों को जमानत दे दी थी। ईडी ने इसी मामले की जांच के लिए सोनिया और राहुल को समन जारी किया है।

सोनिया और राहुल पर आरोप क्या है?
नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत वर्ष 1938 में जवाहर लाल नेहरू ने 5 हजार स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर किया था। इस अखबार का प्रकाशन असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड द्वारा किया जाता था। आजादी के बाद ये अखबार कांग्रेस का मुखपत्र बन गया। असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड इस अखबार का प्रकाशन तीन भाषाओं में करता था। अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’ हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज।’ धीरे-धीरे अखबार घाटे में चला गया और कांग्रेस से मिले 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बावजूद वर्ष 2008 में बंद हो गया। वर्ष 2010 में यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक ऑर्गेनाइजेशन बनी, जिसने नेशनल हेराल्ड को चलाने वाले असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया। यंग इंडियन लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल थे। यंग इंडियन लिमिटेड में सोनिया और राहुल की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत थी और बाकी 24 प्रतिशत हिस्सेदारी मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास थी। मोतीलाल वोरा का वर्ष 2020 और ऑस्कर फर्नांडीज का वर्ष 2021 में निधन हो चुका है। इसके बाद कांग्रेस ने असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के 90 करोड़ रुपये लोन को यंग इंडियन लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया। कांग्रेस का लोन
चुकाने के बदले में असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड ने यंग इंडियन को 9 करोड़ शेयर दिए। इन 9 करोड़ शेयरों के साथ यंग इंडियन को असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के 99प्रतिशत शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस ने असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड का 90 करोड़ का लोन माफ कर दिया। सुब्रमण्यम स्वामी ने इसी सौदे पर सवाल उठाते हुए केस फाइल किया था।

गौरतलब है कि कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करती है। इस पर उनका कहना है कि यंग इंडियन लिमिटेड कम्पनी को मुनाफा कमाने की बजाय चैरिटी के उद्देश्य से बनाया गया था। कांग्रेस का ये भी कहना है कि यंग इंडियन लिमिटेड द्वारा किया गया ट्रांजैक्शन फाइनेंशियल नहीं, बल्कि कॉमर्शियल था। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि जब प्रॉपर्टी या कैश का कोई ट्रांसफर ही नहीं हुआ, तो मनी लॉन्ड्रिग का केस कैसे बन सकता है। इसके साथ ही उनका कहना है किअसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड जब घाटे में आ गया तो उसे बचाने के लिए कांग्रेस ने 90 करोड़ की आर्थिक सहायता दी। इससे असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड पर लोन हो गया। उसने इस लोन को इक्विटी में बदला और 90 करोड़ के लोन को नई कंपनी यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन यंग इंडियन नॉन-फॉर-प्रॉफिट कंपनी है और इसके शेयर होल्डर्स और डायरेक्टर्स को कोई लाभांश नहीं दिया जा सकता है। सिंघवी का दावा है कि इसका मतलब है कि आप इस कंपनी से एक रुपया नहीं ले सकते।

सिंघवी का ये भी दावा है कि अब भी असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के पास ही पहले की तरह की नेशनल हेराल्ड की सभी प्रॉपर्टी और प्रिंटिग और पब्लिकेशन बिजनेस पर अधिकार है। केवल एकमात्र बदलाव यह है कि असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के शेयर यंग इंडियन के पास हैं, लेकिन यंग इंडियन इस पैसे का किसी भी तरह से इस्तेमाल नहीं कर सकती है। वह न तो लाभांश दे सकती है और न ही प्रॉफिट कमा सकती है। फिलहाल इस मामले में अभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी 23 जून को ईडी के सामने पेश होना है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि सोनिया गांधी की पेशगी के दौरान भी कांग्रेस पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी। यह जरूर कहा जा सकता है कि इस सत्याग्रह या आंदोलन के जरिए कांग्रेस नेताओं को एकजुट होने का मौका जरूर मिल गया है।

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