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तिनका-तिनका से किया गया कैदियों को सम्मानित

हर वर्ष की तरह इस साल भी मानवाधिकार दिवस के दिन यानी कल 10 दिसंबर को मनाया जाएगा। लेकिन इसके एक दिन पहले आज तिनका-तिनका फाउंडेशन देश के उन कैदियों को ”तिनका – तिनका इंडिया” अवार्ड से सम्मानित किया है जिनका व्यवहार अच्छा रहा है।

 

इस पुरस्कार का उद्देश्य जेल सुधारो की दिशा में कैदियों, कर्मचारियों और प्रशासन द्वारा असाधारण योगदान को मान्यता देना है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश भर की जेलों से करीब 700 कैदियों और जेल के लगभग 60 कर्मचारियों ने इस पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। जिनमें से 13 कैदियों और 3 जेल कर्मचारियों को इस सम्मान के लिए चुना गया। आवेदन करने वाले कैदियों में से 3 ट्रांसजेंडर भी हैं लेकिन इनमें से एक के आवेदन को स्वीकार किया गया है। पुरस्कार से सम्मानित किये जाने वाले कैदियों में से सात कैदियों को पेंटिंग के लिए पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है, जबकि चार कैदियों को जेल जीवन के दौरान विशेष योगदान के लिए चुना गया है। वहीं विशेष उल्लेख श्रेणी के लिए एक ट्रांसजेंडर कैदी को चुना गया है। साथ ही इस साल विशेष तिनका तिनका बंदिनी पुरस्कार के लिए 2 महिला कैदियों को भी चुना गया है। इस साल पुरस्कार की थीम ‘जेल में समाचार पत्र’ रखा गया है।

 

क्या है तिनका-तिनका पुरस्कार

 

तिनका -तिनका इंडिया पुरस्कार की शुरुआत जेल सुधारक वर्तिका नंदा ने साल 2015 में की थी। यह पुरस्कार 4 श्रेणियों पेंटिंग, स्पेशल मेंशन, जेल प्रशासन और बंदिनी अवार्ड के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। वर्ष 2015 से 2021 तक इस पुरस्कार से 153 से ज्यादा कैदियों और करीब 43 जेल कर्मचारियों को सम्मानित किया जा चुका है। इन पुरस्कारों के लिए आवेदन वरिष्ठ जेल अधिकारियों द्वारा भेजा जाता है जो हर साल आज ही के दिन 9 दिसंबर को दिया जाता है।

कौन हैं वर्तिका नंदा

 

वर्तिका नंदा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं। साल 2014 में इन्हे स्त्री शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। वहीं जेल सुधार के लिए किये गए कामों के लिए उन्हें दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान दिया गया है। जेलों पर उनके काम को साल 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया था।

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