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दिल्ली में मेयर के चुनाव से पहले भाजपा में दो फाड़!

दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद मेयर, डिप्टी मेयर और सदन की स्थायी समिति के 6 मेंबर का चुनाव 6 जनवरी को होना है। इसके लिए दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नगर निगम की पहली बैठक के लिए 6 जनवरी की तारीख तय कर दी है। वहीं भाजपा और आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपना-अपना मेयर बनाने का दावा कर रहे हैं।

 

दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों में से आम आदमी पार्टी ने 134 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया था, जबकि भाजपा 104 सीटें ही जीत सकी थी। आलम ये है कि 6 जनवरी को होने वाले मेयर के चुनाव को लेकर सभी की नजरें भाजपा पर ही टिकी हुई हैं, लेकिन मेयर के चुनाव से पहले ही भाजपा दो फाड़ हो गई है। भाजपा के एक धड़ा का मानना है कि आम आदमी पार्टी को सीधे वॉकओवर नहीं देना चाहिए,बल्कि भाजपा का यह धड़ा आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर देने के पक्ष में है। इसमें कुछ लोगों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के कई पार्षद क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी की नजर उन सीनियर पार्षदों पर है, जो आम आदमी पार्टी के कुनबे में सेंध लगा सकते हैं। जबकि भाजपा का दूसरा धड़ा ये मान रहा है कि हर 5 साल में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। ऐसे में राजनीतिक समीकरण कभी भी फिट बैठा सकते हैं, हालांकि पार्टी को मेयर के लिए उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।

क्या है वोटों का गणित

मेयर के चुनाव में 250 पार्षदों के साथ 10 सांसद (3 राज्यसभा सांसद और 7 लोकसभा सांसद) और 13 विधानसभा सदस्य भी मतदान करेंगे। यानि 273 वोटर मेयर के चुनाव के लिए वोट करेंगे। यानी जादुई आंकड़ा 133 है ,इस बहुमत के आंकड़ा को छूने वाली राजनीतिक पार्टी का ही मेयर होगा। इसमें आम आदमी पार्टी के 134 पार्षद, 3 राज्यसभा सांसद हैं, ऐसे में आम आदमी पार्टी के मेयर के कैंडिडेट को बहुमत मिलने की संभावना है।

 

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