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बंपर वोटिंग के खास संदेश

राजनीतिक पंडित राज्यों में हुई बंपर वोटिंग को सत्ता विरोधी आक्रोश के तौर पर मान रहे हैं, लेकिन कई बार यह सत्ताधारी पार्टी की वापसी का कारण भी बनी है। पश्चिम बंगाल इसका उदाहरण रहा है

इस बार बंगाल के विधानसभा चुनाव में ‘खेला होबे’, ‘खेला शेष’ जैसे जुमले जमकर इस्तेमाल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर सभा में कह रही हैं ‘खेला होबे।’ दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह यहां तक कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक कह रहे हैं, ‘इस बार खेला शेष।’ इस सबके बीच पिछले हफ्ते बंगाल में विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में मतदाताओं ने भारी मतदान कर खेल बिगाड़ने वाला खेल कर दिया है, क्योंकि खेल शुरू करना और खेल खत्म करना दोनों ही जनता जनार्दन के हाथों में है। अब यह अलग बात है कि किसका खेल बिगड़ता है और किसका बनता है। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में छिटपुट हिंसा के बीच पिछले हफ्ते लोगों ने बंपर वोटिंग की। चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण के चुनाव में कुल 77.68 फीसदी मतदान हुआ, वहीं असम में 82.39 फीसदी, केरल में 71.73 फीसदी, तमिलनाडु में 67.93 फीसदी और पुडुचेरी में 81.64 फीसदी मतदान हुआ। बता दें कि तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में सभी सीटों पर वोटिंग समाप्त हो गई है। इन सभी राज्यों के नागरिकों को अब दो मई के दिन का इंतजार है।

पश्चिम बंगाल में हर चुनाव में भारी मतदान होता रहा है, लेकिन इस बार पहले चरण में 80 फीसद जो मतदान हुआ, उसके मायने तलाशना आसान नहीं है। आमतौर पर सियासी पंडितों का एक ही फाॅर्मूला होता है कि हाई वोटिंग मतलब सत्तारूढ़ दल के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी है। लेकिन बंगाल के मतदाताओं ने इसे कई बार यह झुठलाया भी है। इसीलिए यहां के लोगों की नब्ज पहचानना आसान नहीं है। बंगाल के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 2001 में 75.23 फीसद वोटिंग हुई थी और नतीजा सत्तारूढ़ वाममोर्चा के पक्ष में ही रहा। इसी तरह 2006 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता ने बंगाल में अपने पैर जमाने की काफी कोशिश की, मगर वाम मोर्चा की जड़ें नहीं हिली। उस साल विधानसभा चुनावों में 81.95 फीसद मतदान हुआ और फायदा वामदलों को ही हुआ था। परंतु 2011 में ममता ने वाम मोर्चे के 34 सालों के शासन को जड़ से उखाड़ फेंक दिया। इस वर्ष 84.46 फीसद वोट पड़े थे। 2016 में ममता के खिलाफ काफी माहौल बनाया गया, राज्य में 82.96 फीसद वोटिंग हुई मगर जीत तृणमूल को ही मिली। हालांकि पहले उनके सामने पारंपरिक तौर पर चुनाव लड़ने वाले वामदल थे। लेकिन इस बार का चुनाव अलग है और वह इसलिए, क्योंकि इस बार ममता के सामने भाजपा है। ऐसे में 2016 या फिर 2011 से पूर्व के चुनावों में वामदलों की तरह भारी मतदान और सत्ता विरोधी लहर को गलत साबित करना ममता के लिए आसान नहीं होगा। इस तरह देखा जाए तो चार राज्यों में वोटरों का फैसला ईवीएम में बंद हो गया है। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान आमतौर से शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। बंगाल एवं असम में कुछ घटनाओं को छोड़ कहीं से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

असम में तीसरे और अंतिम चरण 12 जिलों के 40 निर्वाचन में 78.94 फीसद मतदान हुआ। हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बावजूद मतदान काफी हद तक शांतपूर्ण रहा। राज्य में कांग्रेसी मतदान को भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के विरुद्ध जनमत मान रहे हैं, तो भाजपा को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। केरल विधानसभा की 140 सीटों के लिए 71.31 फीसद मतदान हुआ। कुल 957 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। मतदान में कोरोना प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखा गया। कांग्रेस और वाम दोनों की अगुवाई वाले गठबंधन पोलिंग को अपने-अपने पक्ष में बता रहे हैं। तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा सीट के लिए 63.47 फीसद मतदान हुआ। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कहीं से किसी बड़ी वारदात की खबर नहीं मिली। अन्नाद्रमुक के के पलानीस्वामी, ओ पन्नीरसेल्वम सहित द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य में अक्सर कम मतदान होने का ट्रंेड रहा है। राज्य में एआईडीएमके और डीएमके दोनों गठबंधनों की ओर से जीत के दावे हो रहे हैं। एक गठबंधन में भाजपा तो दूसरे में कांग्रेस शामिल है। निर्वाचन अधिकारी सत्यब्रत साहू ने संवाददाताओं को बताया कि। नमक्कल निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 70.79 फीसद और तिरुनेलवेली में सबसे कम 50.05 फीसद मतदान हुआ।

सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक ने चेपक-ट्रिपलिकेन से द्रमुक प्रत्याशी उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ मतदान के दौरान पार्टी के चुनाव चिन्ह उगता सूरज को धारण करने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत कर उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उधर अन्नाद्रमुक के सांसद पी रविंद्रनाथ ने आरोप लगाया कि उन पर और उनके समर्थकों पर द्रमुक के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक जानलेवा हमला था। हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर बड़े बड़े पत्थर फेंके। इसी तरह कोयंबटूर के थोंडमुथुर निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार कार्तिकेय शिवसेनापति ने खुद पर अन्नाद्रमुक और भाजपा के लोगों द्वारा अपनी कार पर हमला करने का आरोप लगाया है। चुनाव आयोग के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के 30 निर्वाचन क्षेत्रों में 77.90 फीसद मतदान हुआ। कराईकल जिले में 76.74 फीसद, जबकि पुडुचेरी जिले में 78.14 फीसद मतदान हुआ। सबसे अधिक 85.76 फीसद मतदान यानम निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज किया गया, जबकि माहे निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 69.92 फीसद मतदान हुआ। इस चुनाव में कुल 10 लाख 4 हजार 507 मतदाताओं को 324 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करना था।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में करीब 80 फीसद वोटिंग हुई। पिछली बार यानी 2016 में इन तीस सीटों पर पड़े 85.50 फीसद वोट के करीब यह आंकड़ा पहुंचने या फिर उससे भी अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही थी। इससे साफ हो गया कि भारी मतदान का ट्रेंड आगे भी जारी रहने वाला है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान के बाद जिस दल के नेता एवं कार्यकर्ता अधिक बेचैन होते हैं उससे साफ होता है कि खेल किसका बिगड़ा और किसका बना है।

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