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सासंत में सपा , आडवाणी के बाद अब जिन्ना चलते अखिलेश पर चौतरफा हमला 

कुछ ही महीनों के भीतर उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियों में जोर -आजमाइश जोरों पर है। इन चुनावी राज्यों में सबसे अहम राज्य यूपी को फतह करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे के ऊपर आरोप मढ़कर वोट बैंक की राजनीति में जुट गईं हैं । इस दौरान यूपी की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की एंट्री हो गई है।

 

अखिलेश यादव से पहले लाल कृष्ण आडवाणी और
अभिनेता शत्रुघन सिन्हा भी कर चुके हैं जिन्ना की तारीफ

 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ​अखिलेश यादव द्वारा जिन्ना की तारीफ करने के बाद से बीजेपी उन पर हमलावर हो गई। बीजेपी और सपा की बयानबाजी में बहुजन समाज पार्टी और औवेसी की पार्टी भी शामिल हो गये हैं। वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है जब जिन्ना का जिक्र आया हो और देश की राजनीति का पारा ऊपर न चढ़ा हो। अखिलेश यादव से पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और कांग्रेस नेता प्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघन सिन्हा भी जिन्ना की तारीफ कर विपक्ष के निशाने पर आ चुके हैं। पिछले दिनों राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी के शिलान्यास के वक्त जिन्ना का मुद्दा गरमाया था।

 

यादव समाजवादी विजय रथ लेकर हरदोई पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना (मुहम्मद अली) ने एक ही संस्थान में पढ़ाई की। वे बैरिस्टर बन गए और भारत की आजादी के लिए लड़े। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक विचारधारा (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया।

 


तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी

 

इससे पहले वर्ष 2005 में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान के दौरे पर गए थे तो उन्होंने  जिन्ना की मजार पर एक भाषण दिया था। अपने भाषण में आडवाणी ने उन्हें ‘सेकुलर’ और ‘हिंदू मुस्लिम एकता का दूत’ करार दिया था। आडवाणी दिल्ली आए तो उन्हें एयरपोर्ट पर ‘जिन्ना समर्थक वापस जाओ’ के नारे सुनने पड़े। उसके बाद  आडवाणी ने अपने विश्वस्त और पार्टी में उस समय उपाध्यक्ष वैंकेया नायडू को संबोधित करते हुए इस्तीफा दे दिया था । उसी शाम पार्टी के दूसरी प्रांत के नेता मिले और रस्मी तौर पर आडवाणी से इस्तीफा वापस लेने की मांग की। आडवाणी ने कह दिया कि वह सोचकर बताएंगे। मगर उसके बाद उनकी क्राइसिस मैनेजमेंट टीम डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई। संघ ने अपनी चलाई और राजनाथ सिंह को अध्यक्ष बना दिया गया।

 


कमलनाथ के बेटे और कांग्रेस उम्मीदवार नकुलनाथ के लिए प्रचार में  सिन्हा ने भी मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की थी

 

शत्रुघ्न सिन्हा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे और कांग्रेस उम्मीदवार नकुलनाथ के लिए प्रचार में  सिन्हा ने भी मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि जिन्ना ने भारत के विकास और आजादी में बड़ा योगदान दिया है। सरदार पटेल से लेकर नेहरू तक, महात्मा गांधी से लेकर जिन्ना तक, इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी में आया हूं। हालांकि विवाद बढ़ते ही सिन्हा पलट गए। उन्होंने कहा कि वह मौलाना आजाद का नाम लेना चाहते थे, लेकिन गलती से जिन्ना का नाम मुंह से निकल गया।

 


सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर सामने आई

 

वर्तमान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान पर चौतरफा घिरते जा रहे हैं  । इसी को लेकर बीजेपी ने अखिलेश यादव को घेरा और हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव पर चुनाव से पहले मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर सामने आई जब उन्होंने सरदार पटेल को अपने साथ जोड़कर जिन्ना को महिमामंडित करने की कोशिश की। यह तालिबानी मानसिकता है, जो विभाजित करने में विश्वास करती है। समाजवादी राष्ट्रीय अध्यक्ष को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

 


असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव को इतिहास पढ़ने की सलाह

 

अखिलेश के इस बयान को लेकर एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को इतिहास पढ़ने की सलाह दी है। बता दें कि अखिलेश के बयान पर ओवेसी ने कहा कि अगर अखिलेश यादव सोचते हैं कि इस तरह के बयान देकर वह लोगों के एक वर्ग को खुश कर सकते हैं, तो मुझे लगता है कि वह गलत हैं। उन्हें अपने सलाहकारों को बदलना चाहिए। उन्हें खुद को शिक्षित करना चाहिए और कुछ इतिहास पढ़ना चाहिए।  अखिलेश को यह समझना चाहिए कि भारतीय मुसलमानों का मुहम्मद अली जिन्ना से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे बुजुर्गों ने द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज कर दिया और भारत को अपने देश के रूप में चुना।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशान साधा और कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणी और उन पर भाजपा की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए दोनों दलों द्वारा बनाई गई एक रणनीति थी। सपा और भाजपा की राजनीति एक दूसरे की पूरक रही है। चूंकि इन दोनों पार्टियों की सोच जातिवादी और सांप्रदायिक है, वे अपने अस्तित्व के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इसलिए जब सपा सत्ता में होती है, तो भाजपा मजबूत हो जाती है। जब बसपा सत्ता में होती है तो भाजपा कमजोर हो जाती है।

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