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अंततः ईडी की गिरफ्त में सोरेन

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद भाजपा पर एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों को निशाना बनाए जाने का मुद्दा गर्माने लगा है

गत् सप्ताह देश की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिली। एक ओर जहां बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा और इसके तुरंत बाद भाजपा विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को दे फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले डाली। वहीं झारखंड में जमीन घोटाले में ईडी की पूछताछ के दौरान ईडी की निगरानी में सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, जिसे राज्यपाल द्वारा स्वीकार तो कर लिया गया है लेकिन शासन की कोई नई वैकल्पिक व्यवस्था पर मुहर नहीं लगाई गई। जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठबंट्टान वाली सरकार ने चंपई सोरेन का नाम नए मुख्यमंत्री के लिए मंजूर किया है। यहां तक कि चंपई सोरेन ने विधायकों के समर्थन के साथ नई सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के सामने पेश किया है। लेकिन उसे राज्यपाल द्वारा स्वीकार नहीं किया गया और राज्य में राष्ट्रपति शासन भी नहीं लगा है।

तकनीक दृष्टि से इस कारण से ईडी के शिकंजे में होते हुए भी हेमंत सोरेन राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने हुए हैं। फिलहाल ईडी की दफ्तर में रात गुजारने वाले हेमंत सोरेन ही झारखंड में सरकार के प्रमुख हैं और यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक कि राज्यपाल झामुमो गठबंधन की ओर से प्रस्तावित चंपई सोरेन के नाम पर अपनी मुहर नहीं लगाते हैं। विपक्षी दल इसे षड्यंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन् बता रहे हैं। झामुमो को समर्थन दे रही कांग्रेस पार्टी की दीपिका पांडे सिंह ने राजभवन पर सत्तारूढ़ गठबंट्टान के विट्टाायकों का अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि जब गठबंधन के पास बहुमत की संख्या से अधिक विधायक हैं तो राज्यपाल को कोई हक नहीं की वो चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित न करें। उन्होंने कहा कि ‘राजभवन से गठबंधन के विधायकों को बुलाया भी गया लेकिन जब विधायक राज्यपाल से मिलने के लिए पहुंचे, तो विधायकों को राजभवन में प्रवेश नहीं करने दिया गया। ऐसा लगता है कि झारखंड का राजभवन भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहा है।’

गौरतलब है कि 31 जनवरी को ईडी के अधिकारी हेमंत सोरेन से रांची स्थित आवास पर पूछताछ कर रहे थे। लंबी पूछताछ के बाद हेमंत सोरेन राजभवन पहुंचे और इस्तीफा दे दिया। ईडी द्वारा की गई यह जांच झारखंड में माफिया द्वारा भूमि के स्वामित्व में अवैध परिवर्तन से जुड़े एक बड़े गिरोह से संबंधित है। ईडी ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी छवि रंजन भी शामिल हैं। वह राज्य के समाज कल्याण विभाग के निदेशक और रांची के उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे।

क्या है पूरा मामला
रांची के बायतु पुलिस थाने में एक जमीन विवाद को लेकर एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर में रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा ने प्रदीप बागची नाम के शख्स को आरोपी बनाया था। एफआईआर में कहा गया था कि प्रदीप बागची ने फर्ज कागजों के जरिए भारतीय सेना की एक जमीन को हड़प लिया है। इस मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि यह जमीन बीएम लक्ष्मण टाव की थी, जिन्होंने आजादी के बाद इसे भारतीय सेना को सौंप दिया था। ईडी ने इसके बाद पूरे मामले में प्रदीप वागची समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें दो लोग सरकारी कर्मचारी थे। ईडी ने इस मामले में आगे जांच शुरू की तो इसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी छवि रंजन का नाम भी सामने आया, जिसके बाद बीते साल 4 मई को छवि रंजन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप था कि जमीन की अवैध खरीद और विक्री में उन्होंने मदद की थी। अब ईडी ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन को भी इस मामले में आरोपी बना गिरफ्तार कर लिया है।

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