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विधायकों की किलेबंदी में जुटे सोरेन

झारखंड में सियासी उठापठक जारी है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में दिख रही है। इस बीच महागठबंधन अपने विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। विधायकों को एकजुट करके रखने के लिए अब उनको रांची से रायपुर लेकर जाया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास से महागठबंधन के विधायक बसों में बैठकर एयरपोर्ट की तरफ निकल गए हैं।

 

दरअसल,छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की ही सरकार है। इसलिए विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर लेकर जाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को डर है कि अगर को इस्तीफा देना पड़ा तो विधायकों को खरीदने-तोड़ने की कोशिश हो सकती है। इसलिए इन विधायकों को बड़ी ही कूटनीतिक तरीके से निकाला गया है क्योंकि अगर किसी भी तरह की ऐसी स्थिति बनती है और बाद में उन्हें फ्लोर टेस्ट करना पड़े तो उससे पहले विधायकों को व्हिप जारी किया जाएगा। उसके बाद उन्हें रांची में वापस लाया जाएगा।

गौरतलब है कि,झारखंड की महागठबंधन सरकार में सबसे बड़ी पार्टी झामुमो के 30, कांग्रेस के 18 और राजद के एक विधायक हैं।वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदन में 26 विधायक हैं। निर्वाचन आयोग ने हेमंत सोरेन को लाभ के पद के मामले में दोषी पाया है।अभी इसपर आखिरी फैसला राज भवन यानी राज्यपाल रमेश बैस को लेना है, लेकिन उनकी तरफ से अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस बीच सोरेन सरकार कुर्सी बचाने की रणनीति में जुटी हुई है। इससे पहले 27 अगस्त को झामुमो गठबंधन सरकार के विधायक पिकनिक मनाने के लिए रांची से खूंटी जिले के लतरातू डैम पर पहुंचे थे। इन विधायकों के साथ खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद थे। जो देर शाम रांची लौट आए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि कि सियासी तनाव को दूर करने के लिए हेमंत ने विधायकों के साथ ये ट्रिप बनाई थी।

 

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