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लोकसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच आरोपों-अप्रत्यारोपों का सिलसिला अब तेज होने लगा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की चाबुक दोनों की ही आक्रमकता और उत्साह को प्रभावित कर सकती है।
अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ की चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां-बेटे यानी सोनिया-राहुल को रडार पर लेते हुए कहा था। मां-बेटे जो जमानत पर घूम रहे है। वो मोदी को बेईमान साबित करने में जुटे हुए हैं। आज ही सुप्रीम कोर्ट नेशनल हैराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और आॅस्कर फर्नांडीज को जारी इनकम टैक्स को नोटिस की वैधता जांचने को तैयार हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट 4 दिसंबर को इस मामले की अंतिम सुनवाई करेगा। इस मामले में अदालत की दलील थी कि कोर्ट के सामने सवाल यह नहीं है कि इनकम टैक्स का नोटिस वैध है या नहीं। जब मामलों की अंतिम सुनवाई को कोर्ट तैयार है तो इनकम टैक्स का नोटिस जारी हो या नहीं इससे कोर्ट को फर्क नहीं पड़ता।
गौरतलब है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और आॅस्कर फर्नंडीज ने वित्तीय वर्ष 2011-2012 के लिए टैक्स के पुनमूल्याकन की मांग को लेकर जारी किए गए इंकम टैक्स नोटिस को चुनौती दी थी। कोर्ट में याचिकार्ताओं की ओर से पेश पी चिंदबरम ने कहा था कि यह केवल शेयर ट्रांसफर का मामला है। इसे आय नहीं कहा जा सकता। नौ सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ याचिका खारिज कर दी थी। लिहाजा अब सुप्रीम कोर्ट से इन्हें राहत मिली है। वैसे भी पिछले कुछ समय से कांग्रेस विरोधी राष्ट्रीय नेशनल हैराल्ड के बहाने सोनिया पर हमले बोलते जाते रहे हैं। भाजपा भी इस संबंध में कई बार प्रेस कांफ्रेंस कर सोनिया-राहुल को घेरने की कोशिश कर चुकी है। ज्यादा दिन नहीं हुए जब भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने राफेल के काउंटर में नेशनल हैराल्ड पर ही कुछ आंकड़े पेश कर सोनिया-राहुल पर हमला बोला था। कांग्रेस ने भाजपा सरकार को लक्ष्य कर के कहना भी मोदी जी अगर राहुल गांधी से लड़ना है तो सीधे आमने-सामने लड़िये, इस तरह छिपकर लड़ना ठीक नहीं।
नेशनल हैराल्ड नेहरू परिवार का अखबार रहा है। इसे उसकी विरासत से जोड़कर देखा जाता है। मगर कुछ समय से यह विवादों और सियासत के जाल में फंस गया है।

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