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वफादारों की हुई कांग्रेस, पत्र लेखकों को पार्टी में अलग-थलग कर सोनिया ने दिया संकेत

एक जमाना था जब “निंदक नियरे रखिए” की पद्धति पर अमल करते हुए लोग अपने इर्द गिर्द ऐसे लोगो को रखते थे जो उनकी कमिया और खामिया बताते थे। इन कमियों और खामियों को फिर दूर करके लोग जनता के हितचिंतक होते थे। लेकिन यह बात गुजरे ज़माने की हुई। अब तो ऐसे लोगो को दरकिनार करने में देर नहीं लगाई जाती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला है कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन में। हालांकि देखा जाए तो इसकी पटकथा गत 24 अगस्त को ही उस समय लिख दी गयी थी जब ‘लेटर बम’ पर हंगामेदार बैठक हुई थी। इस बैठक में जिस तरह से कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पार्टी के विरोध में पत्र लिखने वालो को हड़काया था, उससे इसका अंदाजा तभी लग गया था कि अब कांग्रेस में ऐसे नेताओ को सहन नहीं किया जायेगा।
पूर्व में 23 नेताओ द्वारा पत्र लिखने के बाद तय हुआ था कि एक साल बाद पार्टी अध्यक्ष चुना जायेगा। लेकिन इस दौरान पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी बनी रहेगी। इस दौरान एक किचन कैबनेट बनाने की भी बात हुई थी। यह किचन कैबनेट सोनिया गाँधी के साथ मिलकर कार्य करेगी। इसी के साथ पार्टी में फेरबदल के भी संकेत दे दिए गए थे। फ़िलहाल, कांग्रेस के संगठनिक फेरबदल में सबसे ज्यादा नुकसान लेटर बम के मुखिया रहे गुलाम नबी आजाद को उठाना पड़ा है। इसके साथ ही लेटर लिखने वाले 23 नेताओ में से अधिक के पर क़तर कर यह संदेश देने का काम किया गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगो को अब हासिए पर डाला जाएगा।
कल शाम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी के हस्ताक्षरयुक्त एक बयान संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी किया गया है। जिसके मुताबिक़ ग़ुलाम नबी आज़ाद, मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी और मल्लिकार्जुन खड़गे को महासचिव पद से हटा दिया गया है।  ग़ुलाम नबी आज़ाद से महासचिव का पद छीन छीनने के साथ ही प्रभारी पद भी ले लिया गया है। वह हरियाणा राज्य के प्रभारी थे। उनकी जगह अब विवेक बंसल को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है।हालांकि आज़ाद को सीडब्ल्यूसी में स्थान दिया गया है।
सोनिया गांधी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कहा गया है कि पार्टी पूरे दिल से निवर्तमान महासचिवों गुलाम नबी आजाद, मोती वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फलेइरो के योगदान की सराहना करती है। गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य बने रहेंगे। जो कि पार्टी के शीर्ष निर्णय लेने वाला पैनल है।

याद रहे कि 24 अगस्त के बाद माना गया था कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद जो घमासान उठा था वो थम जाएगा। पार्टी अपने पुराने ढर्रे पर चलने लगेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यह घमासान थमने का नाम लेता इससे पहले ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा यह कह कर आग में घी डालने का काम किया कि कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस कार्य समिति के लोगों का चुनाव होना चाहिए। सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने को ख़ारिज करना ही शायद सोनिया को नागवार गुजरा। इसी का नतीजा है कि गुलाम नबी आजाद से महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी छीन ली गयी।
चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में शामिल गुलाम नबी आजाद के अलावा भूपेंद्र सिंह हुड्डा,कपिल सिब्बल, शशि थरूर,मनीष तिवारी का नाम किसी भी सूचि में नहीं है ।पिछले दिनों बगावत का झंडा बुलंद करने वाले राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी इस सूचि में स्थान नहीं मिला है।हालांकि बताया जा रहा है कि मनीष तिवारी और सचिन पायलट जैसे नेताओं को आने वाले दिनों में दूसरी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश में आगामी दिनों में बगावत की संभावनाओं के मद्देनजर उन्हें बंगाल का प्रभारी बनाया गया है।यही नहीं बल्कि इस वजह से सीडब्ल्यूसी का विशेष आमंत्रित सदस्य से आगे बढ़ाते हुए स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा दिग्विजय सिंह,सलमान खुर्शीद,जयराम रमेश,राजीव शुक्ला,पवन बंसल जैसे नेता भी सीडब्ल्यूसी के स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं।
यहां यह बताना भी जरुरी है कि गत 24 अगस्त को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में बनी सहमति के अनुसार छह सदस्यीय एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति पार्टी के संगठन और कामकाज से जुड़े मामलों में सोनिया गांधी का सहयोग करेगी। एक तरह से कहा जाए तो यह सोनिया गाँधी की किचन कैबिनेट होगी। इस किचन कैबिनेट में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं।
देखा जाए तो इस संगठनिक फेरबदल का सबसे बड़ा फ़ायदा रणदीप सुरजेवाला को मिला है। सुरजेवाला अब कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने वाली उच्च स्तरीय छह सदस्यीय विशेष समिति का हिस्सा बन गए हैं। यही नहीं बल्कि उन्हें कांग्रेस का महासचिव भी बनाया गया है। साथ ही सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभारी भी बनाया गया है। प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाकर आगामी 2022 के विधानसभा चुनावो की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी दे दी गयी है। हालाँकि प्रियंका पहले से ही उत्तर प्रदेश की महासचिव थी। इसी के साथ उन्हें प्रभारी बनाकर यह संदेश दे दिया गया है कि यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में ही होंगे।
इसके साथ ही कई नेताओ को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। मुकुल वासनिक को मध्य प्रदेश के पार्टी महासचिव की ज़िम्मेदारी दी गई है। जबकि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को असम का प्रभारी से हटाकर पंजाब का प्रभार दिया गया है। हरीश रावत की राजनितिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद पर भी रखा गया है। इससे हाईकमान का संदेश स्पष्ट है कि उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव हरीश रावत के नेतृत्व में ही होंगे।इसके अलावा ओमान चांडी को आंध्र प्रदेश की, तारीक अनवर को केरल और लक्षद्वीप की, जितेंद्र सिंह को असम की तथा अजय माकन को राजस्थान की ज़िम्मेदारी दी गई है। जबकि केसी वेणुगोपाल को कांग्रेस के संगठन की जिम्मेदारी दी गयी है।
इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल को पार्टी प्रशासन, रजनी पाटिल को जम्मू-कश्मीर, राजीव शुक्ला को हिमाचल प्रदेश ओर दिनेश गुंडूराव को तमिलनाडु, पुडुचेरी और गोवा के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही मणिकम टैगोर को तेलंगाना, चेल्लाकुमार को ओडिशा, एचके पाटिल को महाराष्ट्र, देवेंद्र यादव को उत्तराखंड, विवेक बंसल को हरियाणा, मनीष चतरथ को अरुणाचल प्रदेश एवं मेघालय, भक्त चरण दास को मिजोरम एवं मणिपुर तथा कुलजीत सिंह नागरा को सिक्किम, नगालैंड और त्रिपुरा का प्रभारी बनाया गया है।साथ ही के सी वेणुगोपाल को संगठन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है और मधुसूदन मिस्त्री को केंद्रीय चुनाव समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

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