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टेक फॉग से थर्राया सोशल मीडिया

सोशल मीडिया मौजूदा समय में एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म बन चुका है। यह अपने यूजर्स को हजारों तरह की सुविधाएं प्रदान करता है। जहां सुविधाएं अनेक हैं वहीं इससे होने वाली असुविधाएं भी कम नहीं हैं। पहले से ही ‘बुल्ली बाई’ और ‘सुल्ली डील्स’ ऐप को लेकर विवाद चल ही रहा था कि इसके बीच एक और खतरनाक ऐप सामने आया है। इस नये ऐप का नाम ‘टेक फाॅग’ ऐप है। इस ऐप के द्वारा समाज में महत्वपूर्ण मुद्दों पर फाॅगिंग कर गलत धारणाओं वाले मुद्दों को तेजी से सभी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कुछ ही सेकंड्स में फैला दिया जाता है। इस ऐप को लेकर काफी विवाद हो रहा है।

‘टेक फाॅग’ ऐप है क्या?

टेक फाॅग एक एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर है जिसका इस्तेमाल कर किसी भी तरह की सूचना को कुछ ही सेकंड्स में सोशल मीडिया प्लैटफाम्र्स जैसे व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर, टेलीग्राम आदि पर ट्रेंड किया जा सकता है। इस ऐप के द्वारा देश में चल रहे महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों पर फाॅगिंग (धुंधला) कर अन्य मुद्दों पर ध्यान आकर्षित कर दिया जाता है। दो साल की इन्वेस्टीगेशन के बाद ‘द वायर’ (भारतीय नाॅन प्राॅफिटेबल समाचार और ओपिनियन वेबसाइट) के अनुवाद
भाजपा द्वारा टेक फाॅग ऐप का इस्तेमाल ‘पार्टी की लोकप्रियता को आर्टिफिशियली बढ़ाने, अपने आलोचकों को परेशान करने, प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धारणाओं में हेरफेर करने, सोशल एक्टिविस्ट को टारगेट करने, उनके प्रति घृणा पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

‘टेक फाॅग’ काम कैसे करता है?

टेक फाॅग का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर नकली खातों (फेक अकाउंट) बनाने के लिए किया जाता है। टेक फाॅग एक्टिव व्हाट्सऐप एकाउंट्स को सामूहिक रूप से हैक करने में सक्षम है, इसके द्वारा किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी ली जा सकती है। सोशल मीडिया अकाउंट्स के मालिक का क्लोन करते हुए उनके संपर्कों पर प्रचार संदेशों के साथ बड़े पैमाने पर संदेश भेजे जा सकते हैं। द वायर के अनुसार, यह ऐप मिनटों में पत्रकारों समेत सभी महत्वपूर्ण लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट को हैक करने में भी सक्षम है।

‘टेक फाॅग’ व्हाट्सऐप को ग्रुप नेटवर्क के पास अपने आप मैसेज भेजने की सुविधा देता है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गलत जानकारियों और फर्जी खबरों, गुमराह करने वाले और सियासी रंजिश गढ़ने वाले मैसेज को एक साथ सैलाब की तरह फैलाया जाता है। इस ऐप से साइबर फौज लोगों के व्हाट्सऐप अकाउंट को हाईजैक, स्पैम भेजकर उन पर कंट्रोल कर यह उस यूजर की कांटैक्ट लिस्ट में मौजूद व्हाट्सऐप अकाउंट के सभी नेटवक्र्स पर दूर बैठे-बैठे ही नियंत्रण हासिल करता है। फिर इन इनएक्टिव व्हाट्सऐप अकाउंट के जरिये सभी काॅन्टैक्ट्स पर मन मुताबिक मैसेज भेजे जाते हैं। जो भी नंबर हाईजैक होता है, उसके सभी कांटेक्ट एक डेटाबेस या क्लाउड में सिंक होते चले जाते हैं और फिर इनके जरिए फेक न्यूज फैलाने या ट्रोलिंग या अन्य तरह की छेड़छाड़ की जाती है। ये ऐप्लीकेशन स्वचालित तरीके से व्हाट्सऐप मैसेज विभिन्न नेटवर्क के ग्रुप या समूहों में भेजने में सक्षम है। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की निष्पक्षता के लिए भी खतरा जताया जा रहा है।

इस साजिश में कौन है शामिल?

‘द वायर’ की जांच में पाया गया कि ऐप के इस्तेमाल में भारतीय जनता पार्टी, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और शेयरचैट शामिल थे। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा) के सदस्यों ने संचालकों की निगरानी में इस ऐप का इस्तेमाल किया गया। इसने बताया कि मोहल्ला टेक (शेयरचैट कंपनी का मालिक) टेक फाॅग के इस्तेमाल में शामिल था। टेक फाॅग की खोज करने वाले ‘व्हिसलब्लोअर’ ने बताया कि टेक फाॅग का इस्तेमाल करने वालों को मोहल्ला टेक के माध्यम से भुगतान किया गया था। ‘द वायर’ ने यह भी बताया कि पर्सिस्टेंट सिस्टम्स (इंडिया मल्टीनेशनल टेक्नोलाॅजी सर्विस कंपनी) टेक फाॅग के उत्पादन और प्रबंधन में शामिल है। पर्सिस्टेंट सिस्टम के भीतर एक आंतरिक स्रोत ने कंपनी की भागीदारी की पुष्टि की, जिसमें पर्सिस्टेंट सिस्टम्स द्वारा विकसित 17,000 फाइलें टेक फाॅग से जुड़ी पाई गईं।

10 जनवरी, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने गृह मामलों से संबंधित संसद की स्थायी समिति के प्रमुख आनंद शर्मा से आग्रह किया है कि ‘टेक फाॅग’ नामक ऐप का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया ट्रेंड पर नियंत्रण स्थापित करने तथा छेड़छाड़ करने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए समिति की बैठक बुलाई जाए। इस ऐप का ऐसे इस्तेमाल किया जाना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की निजता के लिए खतरा है।

सेंसिटिव कंटेंट का होता है इस्तेमाल

टेक फाॅग के पास नागरिकों के व्यवसाय, धर्म, भाषा, उम्र, लिंग, राजनीतिक झुकाव और यहां तक कि त्वचा की टोन और स्तन के आकार जैसी शारीरिक विशेषताओं के बारे में जानकारी के साथ निजी नागरिकों का एक व्यापक डेटाबेस पाया गया है। ‘द वायर’ को स्क्रीनशाॅट प्राप्त हुए थे जिसमें ये पैरामीटर दिखाई दे रहे थे। (द वायर द्वारा ‘महिला पत्रकारों’, जो सोशल एक्टिविस्ट को टारगेट किया गया। इनमें मुख्य रूप से राजनीतिक प्रचार और दुरुपयोग के संदेश शामिल थे)।

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