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चाइल्ड पोर्नोग्राफी का नया ठिकाना बने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म !

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (FBI ) और इंटरपोल की मदद से हाल ही में एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह द्वारा अभी तक 165 करोड़ रूपये ऐंठे जा चुके हैं। यह गिरोह ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाता था जो सोशल मीडिया/ वेबसाइट पर चाइल्ड-पोनोग्राफी के फोटो-वीडियो खोजते थे। यह इंटरनॅशनल गिरोह शिकार को फोन करके कानून का डर दिखाकर और खुद को अमेरिका का एनफोर्समेंट का अफसर बताकर करोड़ों की लूट करता था। इस साइबर क्राइम को उजगार करने और अपराधी तक पहुंचने के लिए एफबीआई और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मिलकर एक ट्रांस नेशनल ऑपरेशन शुरू किया तब जांच के दौरान पता चला कि एक पार्थ नाम का व्यक्ति युगांडा में एक कॉल सेण्टर के जरिए इस काम को अंजाम देता है। इनके पास अपनी एक रिसर्च टीम भी थी जो इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर अपना शिकार ढूंढते थे। फिलहाल जांच के बाद अब इस मामले में वत्सल मेहता, पार्थ और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच के मुताबिक इन गिरोह द्वारा चाइल्ड पोर्नोग्राफी का डर दिखाकर अब तक करीब 165 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम लोगों से ऐंठे जा चुके हैं।

सोशल मीडिया बना चाइल्ड पोर्नोग्राफी का अड्डा

गौरतलब है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा है। कुछ दिनों पहले अमेरिका में 54 वर्षीय क्लिंट रॉबर्ट श्राम को बच्चों के साथ यौन संबंध बनाने और उनकी नग्न तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध कराने वाली चार वेबसाइट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें इस साल मई में अमेरिकी अदालत ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने का दोषी पाया था।

ये वेबसाइट डार्क वेब पर चल रही थी, जिसमें बच्चों के ऐसे गंदे फोटो-वीडियो का विज्ञापन किया जाता था। गंदे वीडियो फॉरवर्ड करने और उसके बदले में ऐसे ही वीडियो लेने का धंधा था। इन वेबसाइटों पर जाने वाले लोगों को पहले इसका सब्सक्रिप्शन लेना होता था और जब वे इसके सदस्य बन जाते थे तो 2 साल से ऊपर के बच्चों की गंदी तस्वीरें और उनके साथ गंदी हरकतों के फोटो-वीडियो पोस्ट करते थे।

इसके लिए स्टाफ मेंबर रखे गए थे, जो वेबसाइट चलाने में माहिर थे। अमेरिकी अदालत ने रॉबर्ट को कम से कम 20 साल की जेल और उसके बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उनकी सजा इसी साल 12 अक्टूबर से शुरू होगी।

डार्क वेब पर आम आदमी शायद ही जाए लेकिन अब चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज की फोटो और वीडियो यानी चाइल्ड पोर्नोग्राफी का नया ठिकाना इंस्टाग्राम जैसी पॉपुलर सोशल मीडिया साइट बन चुकी हैं। लोग अपने बच्चों की वीडियो फोटो रील डालते हैं लेकिन उन्हें नहीं पता होता कि बच्चों से सम्बन्ध बनाने की चाहत रखने वाले पीडोफाइल अब डार्क वेब से नहीं इंस्टाग्राम से इस काम को अंजाम दे रहे हैं। यहां आसानी से बच्चों फोटो-वीडियो खरीदी बेचीं जा रही हैं। ।

द वॉल स्ट्रीट जनरल, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और मेसाचुसेट्स एमहर्स्ट यूनिवर्सिटी की साझा रिसर्च में कहा गया है कि इंस्टाग्राम पर चल रहा चाइल्ड पोर्नोग्राफी और सेक्स कंटेंट का यह धंधा ऐसे लोगों के लिए मनपसंद स्थान बन चुका है।

पीडोफाइल लोगों की दुनिया ‘हैशटैगपीडोहोर’ या ‘हैशटैग प्रीटीनसेक्स’

साइबर फोरेंसिक एंड लॉ एक्सपर्ट के अनुसार खुद इंस्टाग्राम ही बच्चों से सम्बंधित सेक्शुअल कंटेंट देखने के लिए बढ़ावा देता दिख रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लोग इंस्टाग्राम पर आते हैं और ‘हैशटैगपीडोहोर’ या ‘हैशटैग प्रीटीनसेक्स’ टाइप करते हैं और पीडोफाइल की दुनिया में एंटर कर जाते हैं जहां उन्हें चाइल्ड पोर्नोग्राफी से सम्बंधित कंटेंट आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इतना ही नहीं बच्चों से मुलाकात कराने की भी यहाँ कीमत दी जा  रही है। बीते साल सितंबर में ही दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर भी ऐसे 23 अकाउंट ब्लॉक कर दिए थे, जहां से चाइल्ड पोर्नोग्राफी और बच्चों के रेप के वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे।

मेटा की टास्क फोर्स ने 127 पीडोफाइल की पहचान 

 

पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बाल यौन शोषण सामग्री की पेशकश करने वाली वेबसाइटें लगभग 80 प्रतिशत डार्क नेट इंटरनेट ट्रैफ़िक के लिए हैं। जिनकी कमाई करीब 1 लाख करोड़ रुपए है। साल 2019 में अमेरिकी न्याय विभाग ने डार्क वेब चाइल्ड पोर्न साइट ‘वेलकम टू वीडियो’ पर बड़ी कार्रवाई की थी। साइट को एक 23 वर्षीय दक्षिण कोरियाई लड़के जोंग वू सोन द्वारा संचालित किया गया जा रहा था , जिसे बाद में जेल हो गई। इस वेबसाइट के खिलाफ 11 देशों में कार्रवाई की गई थी। 23 बच्चों को भी छुड़ाया गया, जिनके अश्लील वीडियो बनाए गए थे।

इंस्टा की पैरेंट कंपनी मेटा ने इस पूरे मामले को लेकर एक टास्क फोर्स का गठन किया है, लेकिन इंस्टाग्राम का एल्गोरिद्म बच्चों का ही यौन शोषण कर रहा है और उनके फोटो और वीडियो पोस्ट करते ही पीडोफाइल को जाने-अनजाने में जानकारी भेज रहा है। मेटा ने 127 पीडोफाइल नेटवर्क की पहचान की है जो अश्लील सामग्री खरीद या बेच रहे हैं। मेटा ने इन नेटवर्कों को नीचे ले लिया है। इससे पहले जनवरी में ही मेटा ने चाइल्ड सेफ्टी पॉलिसी का उल्लंघन करने पर 4.90 लाख अकाउंट्स पर बैन लगा दिया था।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के 3.2 करोड़ मामले

 

अमेरिका स्थित एनजीओ ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 की तुलना में 2022 में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) से संबंधित चाइल्ड पोर्नोग्राफी की 32 मिलियन रिपोर्ट इंटरनेट कंपनियों द्वारा दर्ज की गई। व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने नेशनल सेंटर के साथ 85 प्रतिशत चाइल्ड पोर्नोग्राफी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें से करीब 50 लाख मामले अकेले इंस्टाग्राम के थे।वहीं ‘इंटरनेट वॉच फाउंडेशन’ की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, 98 फीसदी बाल यौन शोषण सामग्री में 13 साल से कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें से 30 प्रतिशत सामग्री 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से संबंधित है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी सामग्री करोड़ों में अपलोड की जा रही है।

अमेरिका के ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन’ की सहायक कंपनी ‘साइबर टिपलाइन’ के अनुसार, 2022 में बच्चों से संबंधित 4.5 करोड़ आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो अपलोड करने की खबरें थीं, जो दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।

यह भी पढ़ें : सुरक्षा के नाम पर बच्चों को माता-पिता से दूर करती चाइल्ड प्रोटेक्शन सर्विसेज !

 

साइबर फॉरेंसिक और लॉ एक्सपर्ट मोनाली गुहा द्वारा बताया गया है कि कई पीडोफाइल छिपे हुए कैमरों से नहाते या अपने आसपास के नग्न बच्चों की तस्वीरें या वीडियो बनाते हैं और डार्क वेब या इंस्टाग्राम पर एक गुप्त प्रोफ़ाइल पर पोस्ट करते रहते हैं, जिसे किसी के द्वारा साझा किया जाता है ये अकाउंट फर्जी नाम से चल रहे होते हैं। वहां केवल एक सदस्य दूसरे को आमंत्रित करता है, ताकि किसी और को पता न चले। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो छोटे बच्चों का रेप भी करते हैं और उनकी फोटो और वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचते हैं।

भारत में चाइल्ड पोर्न कंटेंट रखना और देखना अपराध

 

भारत में आईटी अधिनियम की धारा 67 बी चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित है, जिसके अनुसार ऐसा करना अवैध है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी की तस्वीरें बनाना, बेचना और शेयर करना, ये सभी गैरकानूनी हैं। चाइल्ड पोर्न रखना और देखना भी एक अपराध है। इसके अलावा पास्को एक्ट, 2012 की धारा 14 और 15 में भी इसका जिक्र है। ऐसे में अलग-अलग धाराओं के आधार पर कई मामलों में 5 साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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