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विवादों में सीतापुर जिलाधिकारी,कर्मचारी ने पहनाई पैरों में जूती

देश से अंग्रेज चले गए लेकिन आज भी लोगों की मानसिकता नहीं बदली है। खासकर आईएएस आॅफिसर और नेता आज भी अंग्रेज युग में जी रहे है। अपने मातहत अधिकारी से पैर छुआना जूते-चप्पल पहनना और सेंडिलों को पैरों में डालना कभी अंग्रेज लाट साहब और उनकी मल्लिकाओं का अहंकार प्रदूषित करता था। ऐसा कराकर वह यह दिखाते थे कि वह उच्च और श्रेष्ठ है। लेकिन जब देश आजाद हुआ तो सभी को समानता का अधिकार मिला। इस अधिकार के तहत राजा हो या रंक सभी बराबर है। ना कोई किसी से बड़ा है और ना ही छोटा। लेकिन अंग्रेजी काल की यह सामंतवादी व्यवस्था देश में आज भी देखने को मिलती है। खासकर नेताओं और उच्चाधिकारियों में। देश में समानता और मौलिकता का अधिकार देने की सबसे ज्यादा पैरवी करने वाले आईएएस इस मामले में पीछे नहीं है। समय-समय पर उनके द्वारा अपने मातहत अधिकारियों से मानवाधिकार के विपरीत कार्य करार जाते है जो मीडिया की सुर्खियां बनते है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर का है। जहां की जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने अपनी गाड़ी से उतरते समय अपने कर्मचारी से पैरों में जूते पहने। एक आईएएस अधिकारी को एक कर्मचारी जूते पहनाता हुआ दिखाई दे रहा है। जिसका फोटो वायरल हुआ है। जिलाधिकारी मेडम की फोटो में हनक साफ-साफ दिखाई दे रही है कि वह किस तरह अपने कर्मचारी से जूते पहन रही है। जिलाधिकारी शीतल वर्मा के एक हाथ में मोबाइल है जो उन्होंने गाड़ी पर टिका रखा है। जबकि उन्होंने अपना दूसरा हाथ साड़ी को संभालने में लगाया हुआ है। एक मोबाइल जहां उनके बाए हाथ में है तो दूसरा मोबाइल उन्होंने अपने कान के नीचे दबाकर गर्दन टेढ़ी कर रखी है। जबकि कर्मचारी उनके पैरों में झूकता हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह कर्मचारी उन्हें एक पैर में जूते पहना रहा है। एक आईएएस आॅफिसर द्वारा अपना मातहत कर्मचारियों के साथ किए गए इस व्यवहार की चैतरफा निंदा हो रही है।

‘दि संडे पोस्ट’ ने इस बाबत जब सीतापुर की जिलाधिकारी शीतल वर्मा से बात की तो उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने कर्मचारी के हाथों से जूते-चप्पल नहीं पहन रही है बल्कि वह उनका गिरा हुआ मोबाइल उठा रहा है। उनसे जब पूछा गया कि एक मोबाइल आपके हाथ में और दूसरा गर्दन के नीचे दबाया हुआ है तो यह तीसरा मोबाइल कहा से आया तो इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वह तीन मोबाइल रखती है।

याद रहे कि आईएएस अधिकारियों के साथ ही देश के वरिष्ठ नेता भी अपने मातहत कर्मचारियों से जूते पहनने में फख्र महसूस करते है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में सबसे पहले इस परंपरा को शह दी थी। 9 फरवरी 2011 को उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ आइएएस ने मायावती के पैर छूकर सबको अचंभित कर दिया था। इसके बाद 11 सितंबर 2014 को देश के ग्रहमंत्री राजनाथ सिंह को एक सैनिक द्वारा जूते पहननाने वाला फोटो काफी चर्चित रहा है। 26 मई 2015 को पश्चिमी बंगाल के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र बेहड़ा ने अपने पीएाएसओ से जूते के फीते बंधवाए।

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