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मुकद्दर का सिकंदर बने महानायक को मिलेगा दादा साहेब फाल्के अवार्ड 

एंग्री यंग मेन एवं सदी के महानायक का खिताब हासिल करने वाले अभिनेता अमिताभ बच्चन को इस साल के दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। अमिताभ मतलब हिंदी सिनेमा का एक ऐसा नाम है जिनके बिना हिन्दी सिनेमा अधुरा है। अद्भुत् व्यक्तित्व , जानदार आवाज , चेहरे पर गजब की चमक वाले अमिताभ बच्चन लोगों के लिए बिग बी है। अमिताभ लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करते हैं। अपने दमदार एक्टिंग के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है, लेकिन उनका ये सफर आसान नहीं था। फिल्मों में आने के पहले भी अमिताभ ने संघर्ष किया और फिल्मों में आने के बाद भी उन्हें शुरूआत में संघर्ष का सामना करना पड़ा।

फिल्मों में आने के बाद उनकी संघर्ष की राह और कठिन हो गई। शुरूआत में उन्होंने जो फिल्में की वे बुरी तरह फ्लॉप हो गईं। कई लोगों ने उन्हें घर लौट जाने की सलाह दी। ‘जंजीर’ के हिट होने के पहले तक उन्हें कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। उनकी लगातार 12 फिल्में फ्लॉप हो गई, लेकिन वे पिछले साढ़े चार दशक से फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने अपने अभिनय और दमदार शख्सियत के दम पर बड़े परदे से लेकर छोटे परदे तक पर सिक्का जमा दिया है। अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता श्री हरिवंशराय बच्चन जाने माने हिंदी कवियों में से एक थे। अमिताभ बच्चन कई इंटरव्यू में इस बात को कह चुके हैं कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि हरिवंश राय बच्चन का पुत्र होना है।

 

अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन थी, जो कराची के सिख परिवार से थी। अमिताभ बच्चन के माता-पिता ने शुरुआत में उनका नाम इन्कलाब रखा था। दरअसल उस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के चलते ”इन्कलाब जिंदाबाद” का नारा खूब जोरों पर था, इसलिए उनके पिता ने इसी नारे से प्रेरित होकर अमिताभ का नाम इन्कलाब रख दिया। हालांकि बाद में हरिवंशराय बच्चन के मित्र सुमित्रानंदन पन्त के सुझाव पर उन्होंने अपने पुत्र का नाम अमिताभ कर दिया। अमिताभ बच्चन की शुरुआती शिक्षा इलाहाबाद में ही हुई। उसके बाद उन्होंने नैनीताल के एक बोर्डिंग स्कूल में शिक्षा हासिल की। अमिताभ विज्ञान से इतने प्रभावित हुए कि उनमें वैज्ञानिक बनने की इच्छा जागृत हुई। पढ़ाई के साथ-साथ वो स्कूल में होने वाले नाटकों में हिस्सा लेते थे, जिसमें उनका बेहद मन लगता था। उन्होंने पढ़ाई के बाद उन्हें नौकरी की मुश्किल आई। आकाशवाणी में भी उन्हें आवाज भारी होने के कारण नौकरी नहीं मिली।

 

कुछ हाथ ना लगने पर उन्होंने बम्बई में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया जो फिल्मों में किस्मत आजमाने बॉम्बे आ गए। अमिताभ का फिल्मी सफर भी आसान नहीं रहा। मशहूर निर्देशक के अब्बास ने अमिताभ को ”सात हिन्दुस्तानी” फिल्म में अभिनय करने का मौका दिया, लेकिन फिल्म बुरी तरह पिट गई। पहली फिल्म के बाद लगातार एक के बाद एक 12 फिल्में फ्लॉप हो गई। लोगों ने उन्हें वापस लौट जाने की सलाह दी। किसी ने कहा कि पिता की तरह कवि बन जाओ, लेकिन अमिताभ ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी किस्मत ने साल 1971 में मोड़ लिया, जब उन्हें सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ ”आनन्द” फिल्म में मौका मिला। जिसमें उन्होंने के डॉक्टर के किरदार को बखूबी निभाया और अपनी प्रतिभा को साबित किया। इसके बाद साल 1973 में आई ”जंजीर” ने अमिताभ की तकदीर बदल दी।

यह उनकी तेरहवीं फिल्म थी जंजीर फिल्म सुपरहिट रही और इस फिल्म के हिट होते ही अमिताभ ”एंग्री यंग मैन” के नाम से जाने जाने लगे । इसके बाद एक के बाद कई सुपहिट फिल्में दी। उनकी कुछ खास फिल्मों में आनंद, जंजीर, अभिमान, सौदागर, चुपके चुपके, दीवार, शोले, कभी कभी, अमर अकबर एंथनी, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, मि. नटवरलाल, लावारिस, सिलसिला, कालिया, सत्ते पे सत्ता, नमक हलाल, शक्ति, कुली, शराबी, मर्द, शहंशाह, अग्निपथ, खुदा गवाह, मोहब्बतें, बागबान, ब्लैक, वक्त, सरकार, चीनी कम, भूतनाथ, पा, सत्याग्रह, शमिताभ जैसी शानदार फिल्मों ने ही उन्हें सदी का महानायक बना दिया।

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