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सिध्दू ने फिर उठाया पार्टी नेतृत्व पर सवाल 

पंजाब में विधानसभा चुनाव का  मतदान के लिए अब सिर्फ एक महीने का समय रह गया है। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के तेवर बागी ही दिख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यहां कांग्रेस को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती है। राज्य के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि सिद्धू खुद को सीएम उम्मीद्वार नहीं बनाए जाने से खासे नाराज चल रहे हैं। यही वजह है कि वह बार-बार अपनी ही सरकार पर सवाल  खड़ा कर देते हैं।

 

 


अगर कांग्रेस एकजुटता दिखाती है तो पंजाब में उसे जीतने से कोई नहीं रोक सकता, सिध्दू

 

सिध्दू ने कहा कि अगर कांग्रेस एकजुटता दिखाती है तो पंजाब में उसे जीतने से कोई नहीं रोक सकता है। नवजोत सिंह सिध्दू  ने इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनौती देते हुए किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए ललकारा है । इस दौरान वह कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी खूब बरसे।

गौरतलब है कि राज्य के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की करीब चार महीने पहले जब कांग्रेस ने पंजाब में ताजपोशी की थी तो माना जा रहा था कि यह उसका मास्टर स्ट्रोक है। दलित समुदाय से आने वाले चन्नी को सीएम बनाया जाना पार्टी की बड़ी पहल थी। पंजाब के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था और तब आम आदमी पार्टी बैकफुट पर नजर आई थी। लेकिन यह कार्ड अब कमजोर होता दिख रहा है। एक तरफ नवजोत सिंह सिध्दू  का रवैया उनकी छवि को कमजोर करता दिख रहा था तो अब प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उनके भतीजे भूपिंदर पाल सिंह के घर पर रेड ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। इस रेड के बाद से अरविंद केजरीवाल ने उन पर हमले तेज कर दिए हैं।

 

ED की रेडसे आप को है सीधा फायदा

 

सीएम चन्नी लगातार अपनी आम व्यक्ति होने की छवि पेश कर रहे  हैं । लेकिन इस रेड ने उनकी इस छवि पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। दरअसल , सिध्दू  और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच लंबी छिड़ी जंग के बाद जब पूर्व सीएम को हटाया गया तो माना जा रहा था कि आखिर अब सीएम कौन होगा। सिध्दू  को लेकर राय बंटी हुई थी, जबकि सुनील जाखड़ जैसे चेहरे सिख न होने के चलते पिछड़ गए। फिर नाम आया चरणजीत सिंह चन्नी का, जो सिख होने के साथ ही दलित समुदाय से भी आते थे। इससे कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधने की संभावना देखी और उन्हें सीएम बना दिया।

 

 शुरुआत से ही चन्नी की राह में कांटे बोते रहे हैं सिद्धू

 

 चन्नी के सीएम बनते ही पार्टी के आगे नई तरह की मुश्किलें आने लगीं। लंबी जद्दोजहद के बाद कैप्टन को सीएम पद से हटता देखने वाले सिध्दू ने इस बार भी मौका गंवा दिया और इसका मलाल उनके रवैये से साफ झलक रहा है । डीजीपी की नियुक्ति से लेकर अन्य तमाम मुद्दों पर वह चन्नी से भिड़ते दिखे और प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे तक की पेशकश कर दी। यही नहीं हाईकमान की ओर से समझाने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया, लेकिन चुनाव प्रचार में ज्यादातर चन्नी से अलग ही नजर आए हैं। यहां तक कि अपनी ओर से ही कई जगहों पर वह प्रत्याशियों का एलान करते दिखे और जब किसी और प्रत्याशी को मौका मिला तो उन सीटों पर आंतरिक कलह मच गई।

 

इन वजहों से बैकफुट पर दिख रही कांग्रेस

 

कांग्रेस हाईकमान पर सिध्दू  लगातार सीएम फेस घोषित करने को लेकर भी दबाव बनाते रहे हैं। वह बिना दूल्हे के कैसी बारात जैसे बयानों से पार्टी के आगे मुश्किल खड़ी कर चुके हैं, जबकि पार्टी सामूहिक नेतृत्व में उतरने की बात करती रही है। लेकिन आम आदमी पार्टी की ओर से भगवंत मान को सीएम फेस घोषित करने के बाद से पार्टी भी दबाव की स्थिति में है। इस तरह आपसी कलह, सीएम फेस का घोषित न होना और अब चन्नी के परिजनों के घर बड़ी रकम बरामद होने से कांग्रेस बैकफुट पर दिख रही है।

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