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  सिद्धू ने फिर बढ़ाई आलाकमान की मुश्किलें 

पंजाब सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों की चुनावी रैलियां से  राज्यों के साथ देश की सियासत भी गरमाने लगी है । लेकिन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर आतंरिक कलह के चलते पंजाब कांग्रेस में उठापटक के बाद भी सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि राज्य को लेकर  कांग्रेस आलाकमान भले ही ‘ऑल इज वेल’ करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। दरअसल , पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने मांग कर दी है कि पार्टी को चुनाव से पहले राज्य में सीएम चेहरे का एलान कर देना चाहिए। यही नहीं उन्होंने तंज कसते हुए  कहा कि बिना दूल्हे के  बारात कैसी होगी।

 

सिद्धू ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2017 में सीएम फेस का ऐलान नहीं किया था और उसे इसका नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार हमारी स्थिति भी आम आदमी पार्टी जैसी ही हो सकती है। माना जा रहा है कि उनकी यह मांग पार्टी की चिंताएं बढ़ाने वाली है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग जानना चाहते हैं कि कौन लीडरशिप करेगा।  आखिर किसका रोडमैप राज्य में काम करेगा। पार्टी को सीएम फेस का ऐलान करना चाहिए। अब इस बार लोग हमसे भी पूछेंगे कि आखिर बताओ कि आपका लाडा (दूल्हा) कौन है। दो ही चीजें अहम होती हैं कि या तो चेहरा होना चाहिए या फिर मुद्दा होना चाहिए।’

पिछली बार आप ने सीएम फेस तय नहीं किया था और उन्हें नुकसान हुआ था।’ पिछली बार मैं ही आम आदमी पार्टी पर तंज कस रहा था कि आखिर आपका दूल्हा कहां है। इस बार लोग हमसे भी यही सवाल पूछ सकते हैं। हालांकि सिद्धू ने यह भी कहा कि चुनाव में दो चीजें अहम होती हैं मुद्दा या फिर नेता का चेहरा। यह कांग्रेस हाईकमान को तय करना है कि वह मुद्दे के साथ जाता है या फिर चेहरे के साथ।

गौरतलब है कि पंजाब में टिकटों के बंटवारे को लेकर भी खींचतान की खबरें आ रही हैं। सीएम फेस को लेकर पार्टी ने किसी नेता का ऐलान नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि जीत मिलने पर चन्नी का पलड़ा भारी होगा क्योंकि वह यह दावा कर सकते हैं कि उनकी लीडरशिप में जीत मिली है। ऐसे में उन्हें हटा पाना मुश्किल होगा। शायद यही वजह है कि नवजोत सिंह सिद्धू इलेक्शन से पहले ही सीएम फेस का ऐलान किए जाने की मांग करने लगे हैं। गौरतलब है कि चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बनने के बाद कई मुद्दों पर ऐतराज जताते हुए सिद्धू ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया था। हालांकि हाईकमान के दखल के बाद वापस लेकर फिर काम शुरू कर दिया था।

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