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शिवसेना नही छोड़ेगी कट्टर हिंदुत्व,कांग्रेस को झटका 

कुछ लोग कह रहे थे कि जब से महाराष्ट्र में शिवसेना ,कांग्रेस और एनसीपी की मिली जुली सरकार बनी है तब से प्रदेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपने कट्टर हिंदुत्व को छोड़कर धर्मनिरपेक्ष के दायरे में आ गए  हैं। लेकिन शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के साझा न्यूनतम कार्यक्रम (सीएमपी) की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द का उल्लेख होने के बावजूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह हिंदुत्व की विचारधारा को कभी नहीं छोड़ेंगे। शिवसेना प्रमुख ठाकरे ने विधानसभा में कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा को उनसे अलग नहीं किया जा सकता।
ठाकरे ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अभी भी हिंदुत्व की विचारधारा के साथ हूं जिसे मुझसे अलग नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान से कांग्रेस को करारा झटका लगा है।  सरकार बनाते समय शिवसेना ने कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को आश्वासन दिया था कि वह अपने कट्टर हिन्दूवादी चेहरे को त्यागकर समानता और धर्मनिरपेक्षता का आचरण करेंगे।
ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस पर हिंदुत्व को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वादे को पूरा करना भी मेरे हिंदुत्व का हिस्सा है। मैं कल भी हिंदुत्व का पालन कर रहा था, आज भी कर रहा हूं और भविष्य में भी करता रहूंगा।
ठाकरे का यह वार तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा 24 अक्टूबर के चुनाव परिणाम के बाद ठाकरे के इस दावे को खारिज करने की पृष्ठभूमि में आया है कि भाजपा ने नयी राजग सरकार में शिवसेना के साथ मुख्यमंत्री पद साझा करने का वादा किया था।
शिवसेना और भाजपा ने 21 अक्टूबर का विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था । लेकिन मुख्यमंत्री पद बराबर बराबर अवधि के लिए साझा करने की मांग को लेकर शिवसेना अलग हो गई थीं।
गौरतलब है कि भाजपा ने 288 सदस्यीय विधानसभा में कुल 105 सीटें जीती थीं, वहीं शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती थीं। भाजपा और राजग से अलग होने के बाद शिवसेना ने राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र विकास आघाडी गठबंधन सरकार बनायी जिसमें ठाकरे मुख्यमंत्री हैं।

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