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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयपाल रेड्डी का निधन

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी नहीं रहे। 16 जनवरी 1942 को हैदराबाद के मुदगुल (अब यह तेलंगाना राज्य के अंतर्गत आता है) में जन्मे जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर काफी लंबा रहा। वे अविभाजित आंध्र प्रदेश से 4 बार विधायक रहे। 5 बार लोकसभा सांसद चुने गए। 2 बार उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजरात और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कैबिनेट में मंत्री भी रहे। उनके परिवार में एक बेटी और 2 बेटे हैं।

जयपाल रेड्डी तेलुगु राजनीति के दिग्गज नेता माने जाते थे। उनके निधन पर कांग्रेस समेत तमाम नेताओं ने दुख जताया है। कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर जयपाल रेड्डी के निधन पर शोक जताया। ‘हमें उम्मीद है कि उनके परिवार और दोस्तों को दुःख के समय में ताकत मिलेगी।’ उनके निधन पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने भी दुख जताया है। सीएम केसीआर ने कहा कि जयपाल रेड्डी को एक केंद्रीय मंत्री और सांसद के रूप में उनकी सेवाओं के लिए याद किया जाएगा।

इमरजेंसी के विरोध में रेड्डी ने कांग्रेस छोड़ दी थी और इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लागू की गई। तब कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फैसले का विरोध किया था।

आज उस वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन हो गया। हैदराबाद के एआईजी अस्पताल में अंतिम सांस ली, वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इमरजेंसी के दौरान संविधान के आर्टिकल-19, आर्टिकल-21 के तहत लोगों को मिले नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे।

जयपाल रेड्डी ने साल 1980 में तेलंगाना के मेडक संसदीय क्षेत्र से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा। यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। जयपाल रेड्डी चुनाव हार गए। इंदिरा गांधी मेडक से सांसद चुनी गईं। साल 1984 में, जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो वह यहीं से सांसद थीं। जयपाल रेड्डी की 1999 में 21 साल बाद कांग्रेस में वापसी हुई थी।

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