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नेवी मामा ने कुछ साल पहले एक बात बताई थी। वे शिप पर रहते थे तो विदेशों में आना-जाना रहता था। 1980 में वे पहली बार विदेश गए थे। वहां पानी बोतल में बिकता देख उन्हें तब आश्चर्य हुआ था। आज फिर बहुतों को आश्चर्य होगा। यह सुनकर कि दमघोंटू प्रदूषण से परेशान दिल्लीवासी पहाड़ की शुद्ध हवा की सांस ले सकते हैं, लेकिन कैसे? इसके लिए उन्हें बोतल बंद पहाड़ की शुद्ध हवा खरीदनी होगी। हो गए न आश्चर्यचकित। जी हां! दिल्ली में लोग ऑन लाइन उत्तराखण्ड की शुद्ध पहाड़ी हवा या फिर आस्ट्रेलिया की शुद्ध हवा खरीद रहे हैं। राजधानी में अब शुद्ध हवा की दुकानें खुल गई हैं। शुद्ध हवा यहां बिकने लगी है।
दिल्ली में लगातार हवा की क्वालिटी खराब होती जा रही है जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। कुछ दिन पूर्व हुई बारिश ने दो-तीन दिन की राहत दी थी। मगर फिर से राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर में रोज एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) गंभीर से लेकर खतरनाक की श्रेणी में ही रहता है। इसके कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां भी हो रही हैं। अगर दिल्ली की हवा से आपका भी दम घुटने लगा है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। शुद्ध-ताजी, प्रदूषण मुक्त पहाड़ी हवा आपका इंतजार कर रही है। मगर यह फ्री में नहीं मिलने वाली।
अगर आप शुद्ध हवा में सांस लेना चाहते हैं तो आपको साफ और प्योर हवा खरीदनी पड़ेगी। हर सांस की कीमत अदा करनी पड़ेगी। एक सांस की कीमत करीब साढ़े तीन रुपए होगी। अब तक बोतलों में पानी बिकता है। अब साफ हवा भी कैन में आ रही है। दिल्ली के प्रदूषण लेवल को देखते हुए शुद्ध हवा का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ये ताजी तो नहीं है, लेकिन शुद्ध होने का दावा जरूर किया जा रहा है।
दिल्ली में हिमालय की साफ हवा बिक रही है। ऑस्ट्रेलिया के ब्लू माउंटेन की हवा कैन में भरकर दिल्ली पहुंचा दी गई है। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों में ऐसी अलग-अलग ब्रांड की, अलग-अलग रेंज की हवा बिक रही है। कीमत पांच सौ से लेकर ढाई हजार रुपए तक है। पांच सौ रुपए की हवा के कैन से आप एक सौ साठ बार सांस ले सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर इसे आसानी से ऑर्डर कर सकते हैं। यही नहीं नेट पर इसके कारोबार के बारे में सर्च भी कर सकते हैं। सर्च करने पर पता लगा कि दिल्ली में हवा के कई कारोबारी हैं। कोई दुकान नहीं है, कुछ लोगों ने अपने घरों में हवा बेचने वाली कंपनियों के कैन्स स्टॉक कर रखे हैं। ऑनलाइन ऑर्डर पर इन्हें सप्लाई किया जा रहा है।
दरअसल एमजॉन कुछ दिन पूर्व से उत्तराखण्ड की पहाड़ियों की हवा बेच रही है। एमजॉन पर बिक रही 10 लीटर हवा वाली कैन की कीमत 550 रुपए है। इससे आप 160 बार हवा ले सकते हैं। कंपनी का दावा है कि इस कैन में उत्तराखंड के चमोली की हवा है। ये हवा लीटर के हिसाब से मिलेगी। यह फिलहाल ऑनलाइन ही उपलब्ध है। कंपनियां जल्द ही इसे ओपन मार्केट में लाने का प्रयास कर रही हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी ने भी दो साइज में अपनी हवा की बोतलों को लॉन्च किया है। एक बोतल 7 .5 लीटर की है। इसकी कीमत 1499 रुपए है। वहीं कंपनी 15 लीटर की हवा वाली एक अन्य बोतल भी बेच रही है। इसकी कीमत 1999 रुपए है। शुद्ध और ताजी हवा की बोतल के साथ पंप मिल रहा है। यह मास्क की तरह ही होता है। मास्क को अपने मुंह पर सेट कर आप बोतल पर लगे बटन को पुश कर आसानी से हवा ले सकते हैं।
एक विदेशी कंपनी के इंडिया हेड ने बताया कि पहले तो शुद्ध हवा के कैन कम बिकते थे मगर जब से दिल्ली में पॉल्यूशन का लेवल खतरनाक स्तर तक पहुंचा है तब से सेल अचानक कई गुना बढ़ गई है। अब एक दिन में सौ से दो सौ ऑर्डर तक मिल जाते हैं।
एयर क्वालिटी एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स की टीम ने दिल्ली एक आर्टिफीशियल लंग बनाया। पहले इसे गंगा राम हॉस्पिटल के बाहर लगाया गया। इसमें उतनी ही हवा पंप की गई जितनी हवा एक इंसान एक दिन में सांस के जरिए खींचता है। ये लंग दिल्ली की हवा में सिर्फ पांच दिन में पूरी तरह काला पड़ गया। तीन नवंबर को सफेद लंग लगाया गया था, उम्मीद थी कि महीने भर में वो काला होगा, पर तीन दिन बाद ही वो बदरंग हो चुका था। पांचवे दिन तक वो पूरी तरह काला पड़ गया। अब एक ऐसा ही लंग दिल्ली से गुड़गांव को जोड़ने वाले एमजी रोड पर लगाया गया है। इसे 13 नवंबर को रात में लगाया गया। अगले दिन 14 नवंबर को ही उसका रंग फीका पड़ गया।
दिल्ली में हवा की बोतलों की दुकानें खुल जाएं और हवा की बोतलें बिकने भी लगें वाकई चिंता की बात है। सोचिए पांच सौ रुपए की बोतल 160 बार सांस लेने लायक हवा दे सकती है। हम एक मिनट में कम से कम पंद्रह बार सांस लेते हैं। मतलब हर मिनट सांस की कीमत 52 रुपये। हर घंटे की कीमत 3120 रुपए और चौबीस घंटे में करीब 75 हजार रुपए की हवा हम सांस के जरिए लेते हैं। चूंकि प्रकृति ने हमें साफ हवा मुफ्त में दी है, इसलिए हम इसकी कद्र नहीं करते। इसकी कीमत नहीं समझते। हवा का बोतल बंद बिकने के बाद ऊपर के गणित को समझने के बाद इसकी कीमत समझ सकते हैं।
कनाडा की एक कंपनी ने दो-तीन वर्ष पहले ही पहाड़ों की ताजी हवा बेचकर मोटी कमाई करनी शुरू कर दी है। बोतलबंद हवा को चीन, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में बेचा जा रहा है। चीन सरीखे देश में हवा को उपहार स्वरूप देने का चलन शुरू हो गया है।
ताजा हवा का बाजार बहुत बड़ा है, क्योंकि दुनियाभर के कई देश वायु प्रदूषण से त्रस्त हैं। भारत और चीन में तो हालात और भी खराब हैं। कनाडा की कंपनी ‘वाइटैलिटी एयर बैंफ एंड लेक’ पहाड़ियों से शुद्ध हवा को बोतलों में बंद कर बेच रही है। कंपनी ने ‘बैंफ एयर’ और ‘लेक लुईस’ नाम से हवा की दो श्रेणियां हवा बाजार में उतारी हैं। ‘बैंफ एयर’ की तीन लीटर की बोतल की कीमत 20 कनाडाई डॉलर यानी लगभग 952 रुपये और 7 .7 लीटर बोतल की कीमत 32 कनाडाई डॉलर यानी 1,532 रुपये है। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 18 एशिया में हैं। इनमें से 13 सिर्फ भारत में ही हैं। सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली भी एक है।
कनाडा की कंपनी ने जब साल 2014 में प्रयोग के तौर पर हवा का एक पैकेट बेचा तो किसी को इसका अंदाजा नहीं था कि यह पहल भविष्य में कितनी कारगर होने वाली है। कंपनी के संस्थापक मोसेज लेक ने बताया कि मैंने ट्रॉय पैक्वेट के साथ मिलकर हवा का पहला पैकेट बेचा। यह हाथोंहाथ बिक गया। दूसरी खेप बिकने के बाद हौसला बढ़ा और उम्मीदें भी। फिर इसे फुल टाइम कारोबार के रूप में स्थापित कर लिया।
कंपनी ने 2015 में लगभग दो सप्ताह पहले ही चीन में बोतलबंद हवा बेचनी शुरू की थी। यहां बिक्री शुरू होने के कुछ ही समय में 500 बोतल की पहली खेप हाथोंहाथ बिक गई। कंपनी उत्तर अमेरिका से मध्य पूर्व के देशों तक हवा बेच रही है, लेकिन चीन उसका सबसे बड़ा बाजार है। यहां लोग अपने परिवार से लेकर दोस्तों एवं रिश्तेदारों को बोतलबंद हवा तोहफे के रूप में दे रहे हैं।
भारत जैसे देश में बोतलबंद हवा के कारोबार की सफलता में विशेषज्ञों को संदेह है। जानकारों का कहना है कि यह संपन्न लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन सम्पूर्ण रूप से इसके सफल होने के आसार नहीं के बराबर हैं।  इसका मुख्य कारण है कि देश में संपन्न लोग कम हैं। गरीबी रेखा के नीचे आधी आबादी से ज्यादा ही है। ऐसे लोग महंगी शुद्ध हवा नहीं खरीद पाएंगे। मगर गंभीर सवाल शुद्ध हवा का बाजार नहीं है, बल्कि इसकी जरूरत महसूस करना गंभीर सवाल पैदा करता है। आखिर क्या वजह है कि हम अपने देश और क्षेत्र की हवा शुद्ध नहीं रख पा रहे हैं।
‘यह तो होना ही था’
पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट से इस मुद्दे पर बातचीत की गई। बातचीत के मुख्य अंश
 
दिल्ली में बोतल बंद पानी की तरह हवा भी बिकने लगी है। यह जानकर क्या आपको आश्चर्य हुआ?
हंसते हुए, यह तो होना ही था। मैं ही नहीं पूरी दुनिया के पर्यावरणविद् सरकार को चेताते रहे हैं। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ न करें। योजनाओं-परियोजनाओं के नाम पर जंगल के जंगल काट दिए गए। अब भी काटे जा रहे हैं। ऐसे में शुद्ध हवा कैसे मिलेगी। जंगल काटने का विरोध आज से नहीं किया जा रहा। चिपको आंदोलन के समय से हो रहा है, पर सरकार और व्यवस्था कभी नहीं चेती। यदि अब भी नहीं चेतते हैं तो स्थिति और भी दयनीय होगी।
ऑन लाइन शुद्ध हवा बेचने वाली कंपनी ने दावा किया है कि उनके कैन में चमोली यानी आपके क्षेत्र की शुद्ध हवा है। क्या पहाड़ की हवा शुद्ध है?
पूरे प्रदेश की बात करें तो मैदान और तराई की हवा भी प्रदूषित हो चुकी है। इन दोनों क्षेत्रों से थोड़ा ऊपर आने के बाद हवा अभी शुद्ध है। मगर यह भी कुछ दिनों के लिए ही रह गया है। जिस तरह से ऑल वेदर रोड के नाम पर पहाड़ को कुचला जा रहा है। पेड़ काटे जा रहे हैं, उससे मैं दावे से कह सकता हूं कि यहां की हवा भी प्रदूषित होने लगी है।
क्या अब बहुत देर हो चुकी है?
एक कहावत है न, ‘जब जागे, तभी सवेरा’। तो यह कह सकता हूं कि हमें अभी भी चेत जाना चाहिए। हमें सभी बड़ी परियोजनाओं पर विराम लगा देना चाहिए। सरकार के साथ हम लोगों को भी इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। हर इंसान को कम से कम दो पेड़ लगाने चाहिए। सिर्फ पेड़ लगाने से ही नहीं बल्कि उसकी देखरेख और आगे से पेड़ काटने पर भी रोक लगानी होगी।

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