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क्यों हो गया हैं लेबनान में सेफ सेक्स मुश्किल

 

लेबनान में लोगों के लिए सेफ सेक्स मुश्किल हो गया है. लेबनान में रहने वालीं 27 साल की सुमी  ने सालभर पहले गर्भनिरोधक गोलियां लेना बंद कर दिया क्योंकि वे बहुत महंगी हो गई थीं. आज वह पांच महीने की गर्भवती हैं  जिसके लिए उन्होंने कोई योजना नहीं बनाई थी. इसलिए भविष्य को लेकर उनकी चिंताएं भी बढ़ गई हैं. वो  कहती हैं “मेरे पास कोई करियर नहीं है. जीवन में स्थिरता भी नहीं है. मेरे पास कोई घर नहीं है जहां बच्चा सुरक्षित रहेगा | आपको बता दे  लेबनान इस समय  आर्थिक संकट से गुजर रहा है. महंगाई बढ़ रही है और जरूरत की चीजें भी लोगों की पहुंच से बाहर हो रही हैं. जिसका असर गर्भनिरोधकों, कंडोम और गर्भ जांच की कीमतों पर भी पड़ा है. कई युवाओं के लिए तो ये चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि वे इस्तेमाल ही बंद कर रहे हैं.

कोरोना वायरस के कारण देश के आर्थिक हालात ऐसे हैं  कि लेबनान की 82 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जा चुकी है. वहां की मुद्रा लीरा की कीमत बहुत ज्यादा घटी है और हर चीज महंगी हो गई है. 2019 की शुरुआत में लीरा धड़ाम से गिरी थी. आज भारतीय मुद्रा में एक लीरा की कीमत पांच पैसे है. 2019 से पहले साल भर के लिए गर्भनिरोधक गोलियां 21,000 लीरा यानी करीब एक हजार रुपये में आ जाती थीं. आज इसके लिए लगभग दो लाख 10 हजार लीरा चाहिए, जो भारत के दस हजार रुपयों के बराबर होंगे. छह कंडोम का एक पैकेट तीन लाख लीरा में आता है, जो देश की औसत आबादी की आधे महीने की तन्ख्वाह है.  इस महंगाई ने सबसे ज्यादा प्रभावित युवाओं को किया है और उनके लिए कंडोम व गर्भनिरोधक बहुत महंगे हो चुके हैं.

दूसरी तरफ  लेबनान में गर्भपात पूरी तरह अवैध है. बलात्कार और किसी परिजन द्वारा अवैध यौन संबंधों के परिणामस्वरूप ठहरे गर्भ की स्थिति में भी अबॉर्शन की इजाजत नहीं है. यदि कोई गर्भपात करता या करवाता पकड़ा जाएगा तो उसे जेल और जुर्माना भुगतना होगा. इसके अलावा असुरक्षित गर्भपात का बड़ा खतरा इसलिए भी है क्योंकि रूढ़िवादी समाज में शादी के बिना बच्चा पैदा करना अच्छा नहीं माना जाता.  कि इसका नतीजा यह होता है कि महिलाओं को अनचाहे गर्भ गिराने के लिए अक्सर अवैध साधन अपनाने पड़ते हैं, एक रिपोर्ट के  मुताबिक  25 प्रतिशत गर्भपात महिला की मौत के रूप में खत्म होते हैं. महंगी हुई जांच संयुक्त राष्ट्र ने पिछले साल बताया था कि कोविड महामारी के कारण गर्भनिरोधक उपाय गरीब देशों की करीब सवा करोड़ महिलाओं की पहुंच से बाहर हो गए. इसका परिणाम 14 लाख अनचाहे गर्भ के रूप में सामने आया.

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