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BJP विधायक की बेटी को कोटा से लाने के मामले में SDO निलंबित

BJP के विधायक की बेटी को कोटा से लाने के मामले में SDO निलंबित

कोटा में पढ़ाई कर रहे छात्रों को उत्तर प्रदेश सरकार ने घर वापसी कराई। जिसके बाद इस पर सियासत भी शुरू हो गई। तो कुछ राज्यों ने आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है। वहीं कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री ने तो इसे लॉकडाउन का उल्लंघन कहा। वहीं बिहार में जनता दल यूनाईटेड और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन की सरकार है। बिहार ने कोटा से बच्चों को कोटा से लाने के लिए मना कर दिया था और कहा था कि लॉकडाउन का उल्लंघन  माना था।

लेकिन इसी कोटा में भारतीय जनता पार्टी के नवादा जिले के हिसुआ के विधायक अनिल सिंह की बेटी भी पढ़ रही थी। वो उनके लिए पास बनाकर उनको कोटा से बिहार लेकर आए। जिसके बाद अब विपक्षी नेताओं ने सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं कि अगर बीजेपी के विधायक अपनी बेटी को वापस ला सकते हैं। तो वहीं आम बच्चे भी फंसे हुए है उनको वापसी लाने के लिए सरकार क्यों नहीं आगे आ रही है।

जिसके बाद आज उस अधिकारी पर गाज गिरी जिसने विधायक की बेटी के लाने के लिए पास जारी किए थे। उस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अन्‍य सभी जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। तो वहीं विधायक के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने राज्यों के फंसे बच्चों के लिए करीब 300 बसें भेजी थी। जिसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लॉकडाउन का उल्लंघन बताया था और नीतीश कुमार ने कहा था कि बच्चों को वहीं कोटा में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराया जा रहा है।

DM की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

बिहार के संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाला कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि विधायक अनिल सिंह पर भी बीजेपी कार्रवाई करेगी। तो वहीं बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने भी कहा है कि कोटा में फंसे बिहार के छात्रों को वर्तमान हालात में वापस बुलाना ठीक नहीं है। इस बाबत मुख्‍यमंत्री भी स्थिति स्‍पष्‍ट कर चुके हैं। इस बीच विधायक को पास जारी करने वाले सदर एसडीएम अनु कुमार को निलंबित कर दिया गया है। नवादा के जिलाधिकारी यशपाल मीणा की अनुशंसा पर सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें निलंबित किया है।

विधानसभा सचिवालय के तरफ से कहा गया है कि वाहन चालक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी हाल में बिना विधानसभा सचिवालय की अनुमति के विभागीय वाहन को राज्य से बाहर नहीं ले जाना है। जिस विधायक को यह गाड़ी आवंटित है, यदि वह ऐसा करते हैं तो इसकी सूचना उन्हें तुरंत विधानसभा सचिवालय को देनी होगी। किंतु ऐसी कोई सूचना सचिवालय को नहीं दी गई, जिसे नियम के विरुद्ध मानकर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस साल के आखिर में बिहार में विधानसभा चुनाव भी होना है। चुनाव से पहले ही  विपक्षी नेताओं ने पूरी तरह सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सात सवाल पूछे हैं।

तेजस्वी यादव ने पूछे सात सवाल

विधायक को बिना बीमा वाली गाड़ी को नियमों का उल्लंघन करते हुए पास क्यों दिया गया?
क्या वापस लौटने पर बीजेपी विधायक की कोरोना जांच की गई?
डेढ़ साल से बिना बीमा गाड़ी कैसे चल रही थी?
कोटा जाने के लिए और कितने को अनुमति दी गई?
क्या बीजेपी विधायक के सुरक्षाकर्मी भी साथ गए थे? अगर हां तो क्या पुलिस मुख्‍यालय ने इसकी इजाजत दी थी?
अब तक कितने वीआइपी को पास दिए गए हैं?

तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी विधायक के मुताबिक अब तक सात सौ लोगों को ऐसे विशेष पास दिए गए थे। अगर यह सूचना सही है तो सरकार को सबके नाम सार्वजनिक  करना चाहिए।

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