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संघ प्रमुख मोहन भागवत :हार-जीत के रूप में नहीं देखें, मिलकर करें मंदिर निर्माण

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर ,शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्‍या जमीन विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्‍वागत किया। उन्‍होंने कहा कि अयोध्‍या जमीन विवाद के फैसले को जीत-हार के रूप में बिल्‍कुल न देखें। ये समय भरतभक्ति को और मजबूत करने का है। ये फैसला न्‍याय प्रक्रिया को और मजबूत करता है। अब अतीत को भुलाकर मिल-जुलकर मंदिर का निर्माण करता चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश सुनाया है। मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी।

मोहन भागवत ने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। यह मामला दशकों से चल रहा था और यह सही निष्कर्ष पर पहुंच गया है। इसे जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हम समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी के प्रयासों का भी स्वागत करते हैं।’

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सरसंघचालक ने कहा, ‘पुरानी बातों को भूलकर मिलकर मंदिर निर्माण का कार्य करवाया जाए। अदालत ने मस्जिद निर्माण को लेकर जो बात कही है, वह जमीन सरकार को देनी है। सरकार इस बात को तय करेगी कि उसे कहां जमीन देनी है। जिस तरह अदालत का फैसला स्पष्ट है। वैसे ही मेरा बयान भी साफ है।’

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