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रामनगरी अयोध्या में साधु की भूख से मौत, पुलिस ने शव को सरयू में फेंका

यह वही अयोध्या नगरी है जहां रामनवमी के दिन सरयू नदी के किनारे करोड़ों रुपए के दीए जलाएं जाते हैं। उसी अयोध्या नगरी में जहां भगवान राम के मंदिर का निर्माण करने के लिए करोड़ों रुपए दान दिए जाते हैं। ऐसी रामनगरी अयोध्या में एक साधु के भूख से मरने की मौत की खबर आ रही है। यह खबर ऐसे समय में आ रही है जब सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं सहित समाजसेवियों की बेघर, बेसहारा लोगों को राशन बांटने और खाना खिलाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अटी पड़ी है।

ऐसे में जब प्रदेश के मुखिया एक सन्यासी हो और उस प्रदेश में एक साधु की मौत भूख से हो जाए तो यह चिंता में डालने वाला है। हैरतअंगेज यह है कि भूखे साधु की जब मौत की खबर पुलिस को लगी तो उसने बिना पोस्टमार्टम कराए ही उसके शव को सरयू में फिकवा दिया।

होना तो यह चाहिए था कि एक साधु की जब मौत होती है तो उसका साधु-संत, रीति-नीति से अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन कहीं यह खबर किसी को पता ना चल जाए इसके मद्देनजर ही अयोध्या पुलिस ने संवेदनहीनता की सभी हदें लांघ दी।

हालांकि, स्थानीय मीडिया ने जब यह खबर ब्रेक की तो पुलिस ने अपने आप को बचाने के लिए आनन-फानन में साधुओं पर दो तहरीर लिखवा ली। अनपढ़, अंगूठा टेक साधुओं ने बेहतरीन लेखन के साथ तहरीर तो दे दी, लेकिन उस पर किसी थाने और चौकी की रिसिविंग करवाना भूल गए।

मामला स्पष्ट है कि पुलिस ने अपने बचाव का रास्ता अख्तियार कर लिया है। लेकिन साथ ही पुलिस ने स्थानीय पत्रकारों पर साधुओं के जरिए आरोप भी लगवा दिए है कि उन्होंने फेक न्यूज़ के जरिए साधुओं की बदनामी की है। अपने आपको मृतक साधु का चेला बताने वाले वह लोग कह रहे हैं कि इस फेंक न्यूज से साधु समाज की छवि खराब हुई है।

इसी के साथ स्थानीय मीडिया कर्मियों पर पुलिस सच का पर्दाफाश करने के चलते मुकदमा दर्ज करने की तैयारी करने में जुट गई है। उधर, अयोध्या पुलिस साधु की भूख से मौत पर साफ-साफ मुकर गई है। पुलिस कह रही है कि साधु की मौत भूख से नहीं बल्कि स्वाभाविक हुई है।

जानकारी के अनुसार अयोध्या में चौधरी चरण सिंह घाट के समीप बारादरी के सामने एक साधु पिछले 6 दिन से भूखे थे। वह रेत में पड़े हुए थे। कल जब बारिश आई तो वह किसी तरह एक तख्त के नीचे लेट कर अपने आप को बचाने का प्रयास करने लगे। लेकिन बताया जा रहा है कि पहले तो भूख और फिर बाद में बरसात के पानी से लगी ठंड को साधु सहन नहीं कर पाए। राम की नगरी में साधू तड़प तड़प कर मर गए।

हालांकि, पहले तो पुलिस ने इस मामले पर अनजान बनने की कोशिश की और कहा कि साधु की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने उसे लावारिस बताया। लेकिन बाद में जब साधु के चेले सामने आए तो अयोध्या पुलिस मृतक साधु का नाम विष्णुदास बता रही है। जिसकी उम्र 80 वर्ष है।

बहरहाल, साधु के चेले बताने वालों ने इस मौत को स्वाभाविक मौत बता कर पुलिस को बचाने की कोशिश शुरू कर दी है। मृतक साधु के चेले एक पत्र के जरिए कह रहे हैं कि उन्होंने ही पुलिस से कहा था कि वह पोस्टमार्टम ना करें। इसी के साथ साधु का रीति रिवाज से शव को नदी में विसर्जित करने की बात भी कही जा रहे हैं।

इस बाबत मृतक साधु के चेलों ने पुलिस को एक दूसरा पत्र भी सौंपा है। जिसमें उन्होंने स्थानीय पत्रकारो की फेक न्यूज चलाने की शिकायत की है। हालांकि, अब खाकी का संवेदनहीन चेहरा सब के सामने आ चुका है। कहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की खबर न लग जाएं इसलिए अब खबरनवीसों पर पुलिस मामला दर्ज करके उन्हें प्रेशर में लेने का प्रयास कर रही है।