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कल भारत पहुंचेंगे रूसी विदेश मंत्री , चीन -भारत दोनों के  साथ चलना चाहता है रूस

 पिछले महीने  अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड आस्टिन की भारत यात्रा के बाद अब  रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अपनी दो दिवसीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। उनका ये दौरा काफी खास माना जा रहा है।  कल 5 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच होने जा रहा उनका ये दो दिवसीय दौरा काफी महत्वपूर्ण समझा जा  रहा है। इस दौरान वे  अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के अलावा  पीएम नरेंद्र मोदी समेत अन्य  नेताओं से भी वार्ता करेंगे।

रूस और भारत की दोस्ती शीत युद्ध से पहले की है,जब रूस सोवियत संघ हुआ करता था।  शीत युद्ध के बाद सोवियत संघ का विघटन हुआ और दुनिया एकध्रुवीय हो गई। इसके बाद से रूस और भारत के संबंधों में काफी बदलाव आए।भारत के  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पहली बार रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले थे, तो भारत-रूस रिश्तों के बारे में उन्होंने अपने अंदाज में आश्वस्त करने की कोशिश की थी। कहा था, ‘भारत में किसी बच्चे से पूछिए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सर्वश्रेष्ठ मित्र कौन है, तो वह रूस का नाम लेगा।’ बहरहाल, यह याद दिलाने की जरूरत पड़ी, यही इसका संकेत है कि वह लंबा दौर अतीत की बात हो गई जब इन दोनों देशों के रणनीतिक एवं सामरिक हितों में समन्वय बना रहता था। आज भारत अपने रक्षा और कारोबारी रिश्तों को बहुआयामी बनाने की कोशिश में है। इस क्रम में अमेरिका और उसके सहयोगी देश भारत के लिए बेहद अहम हैं। हाल ही में खबरें आ रही थी कि  अफगानिस्तान में शांति के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप  में शामिल छह देशों की इस सूची में भारत को शामिल नहीं किया गया था।  कहा जा रहा था  कि इस नए मैकेनिज़म को अमेरिका ने सुझाया।  वहीं रूस ने जो योजना सुझायी थी उसमें भारत को इन देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया था।

इस सब के बीच अब भारत और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिहाज से रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की इस भारत यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा  है, लेकिन इस यात्रा में रूस भारत से अपेक्षा करेगा कि वह एस 400 मिसाइल सिस्टम सहित हथियारों के सौदों को अमेरिकी दबाव से मुक्त रहकर लागू करे। क्वाड को लेकर रूस की चिंताओं पर भी बैठक में समझ बनाने की कोशिश जरूर होगी। दूसरी तरफ भारत पाकिस्तान औऱ चीन के संदर्भ में अपनी चिंता को भी परंपरागत मित्र देश से साझा कर सकता है। जानकारों का कहना है कि रूसी विदेश मंत्री भारत की यात्रा के बाद पाकिस्तान भी जाएंगे। इसलिए भारत आतंकवाद सहित तमाम मुद्दों पर दो टूक राय जरूर साझा करेगा।

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जानकारों का कहना है कि बीते कुछ समय मे काफी मिले-जुले घटनाक्रम हुए हैं। रूस ने पर्दे के पीछे से भारत और चीन के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई है। बेहद तनाव के वक्त ब्रिक्स और एससीओ जैसी बैठकों के आयोजन को बरकरार रखने में रूस की भूमिका अहम रही है। कोरोना के दौर में चीन से तनाव के समय भारतीय मंत्रियो ने रूस का दौरा किया। जहां चीनी मंत्री भी मौजूद रहे थे।

जानकार मानते हैं कि क्वाड को लेकर रूस की चिंता जगजाहिर है। रूस क्वाड में अमेरिकी इंडो पैसिफिक अवधारणा के खिलाफ रहा है। वह इसे आक्रामक मानता है और उम्मीद करता है कि भारत अमेरिकी आक्रामकता में भागीदार नहीं होगा। चीन के खिलाफ मोर्चेबंदी और टकराव बढ़ने की कथित अमेरिकी नीति को लेकर रूसी विदेश मंत्री की ओर से बयान भी कुछ समय पहले आया था। एस 400 पर अमेरिकी दबाव भी रूस को नागवार लगता रहा है। उधर, पाकिस्तान से रूस की बढ़ती नजदीकी को लेकर भारत आशंकित रहा है।

भारत और रूस के बीच रिश्ते काफी पुराने  और परंपरागत हैं। दोनों देश वैश्विक मंचों पर मजबूती से एक – दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। भारत हमेशा रूस के मामलों में स्वतंत्र नीति पर चलता है और इस पर कोई दबाव नहीं रहा है। सामरिक व रणनीतिक जानकार विवेकानंद फाउंडेशन के सीनियर फेलो पीके मिश्रा का कहना है कि क्वाड सहित कुछ मुद्दों पर भारत रूस को अपना पक्ष समझाने में सफल होगा। भारत पहले कई मौकों पर स्पष्ट कर चुका है कि उसका विभिन्न देशों से संबंध स्वतंत्र नीति पर आधारित है। इसमें कोई दबाव नहीं है।

क्वाड पर भारत का पक्ष

क्वाड को भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन इसे किसी देश के खिलाफ मानने से इंकार करता रहा है। भारत मानता है कि रूस के साथ भारत के संबंध वक्त की कसौटी पर खरे उतर चुके हैं और अमेरिका के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी का इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

रूसी विदेश मंत्री ने भी कहा था कि भारत के लोगों में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि हम भारत के दोस्त हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत और चीन हमारे अच्छे दोस्त और भाई दोनों एक दूसरे के साथ शांति से रहें। यही हमारी नीति है। हम इसे न केवल एससीओ और ब्रिक्स में बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि हम इस पर विशेष त्रिस्तरीय प्रारूप में भी काम कर रहे हैं। यह प्रारूप रिक (रूस, इंडिया, चाइना) है।

रूस और भारत में मतभेद की अटकलें उस वक्त शुरू हो गई थीं, जब दो दशक बाद पहली बार रूस और भारत के बीच होने वाली वार्षिक बैठक को पिछले साल टाल दिया गया था। क्वाड पर रूसी विदेश मंत्री के बयान के बाद हुए घटनाक्रम को लेकर कयासों का बाजार गर्म हुआ था। हालांकि दोनों देशों ने इसकी वजह कोरोना  महामारी को बताया था।

दूसरी तरफ़ रूस और पाकिस्तान की बढ़ती क़रीबी की बात को लेकर भी कूटनीतिक गलियारों में अलग -अलग मत रहे हैं। हाल के दिनों में रूस और पाकिस्तान के बीच क़रीबी बढ़ी है। उनके बीच साझा सैन्य अभ्यास भी हुए हैं। लेकिन, भारत मानता रहा है कि बहुपक्षीय कूटनीति में देश अपने हितों के मद्देनजर विभिन्न देशों से संबंध को लेकर स्वतंत्र है। इसका असर परस्पर हितों पर नहीं पड़ना चाहिए।

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