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गलती रूडी की, जेल पहुंचे पप्पू यादव

बिहार में 32 साल पुराने मामले में जन अधिकार पार्टी के प्रमुख और पूर्व सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद सीएम नीतीश कुमार अब की परेशनियां अब बढ़ती जा रही हैं। सड़कों पर पहले ही पप्पू यादव के समर्थक उतरे हुए हैं, पप्पू यादव पर हुई कार्रवाई की आलोचना नीतीश कुमार के सहयोगी दल भी कर रहे हैं।  सहयोगी ही क्या अब तो इस गिरफ्तारी की निंदा करते हुए रिहाई की मांग नीतीश की पार्टी जेडीयू के नेताओं ने भी शुरू कर दी है।

11 मई, मंगलवार को आधी रात को पप्पू यादव के लिए मधेपुरा सिविल कोर्ट को खोला गया। जिसके बाद पप्पू यादव को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पप्पू यादव द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान अपनी बीमारी का हवाला दिया गया था। लेकिन उन्हें न्यायिक हिरासत में बीरपुर (सुपौल) जेल भेजने के आदेश दिए गए। साथ ही कहा गया कि जेल में उनके इलाज की उचित व्यवस्था की जाए।

रात के लगभग 12 बजे अधिकारी पूर्व सांसद को बीरपुर जेल लेकर गए। जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा जमकर विरोध जताया गया। जब पप्पू यादव को पुलिस द्वारा गांधी मैदान थाने से मधेपुरा ले जाया जा रहा था तो भीड़ ने पुलिस को रोकने का प्रयास किया।  बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एनएच 19 पर सड़क पर लेटकर रोकने के प्रयास में लगे रहे। पुलिस ने बढ़ी मुश्किल से सभी को हटाया और आगे बढ़ी।

जेल में भूख हड़ताल

मीडिया से मधेपुरा में पप्पू यादव ने बात करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि ये सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है इसलिए मुझे जेल भेजा जा रहा है। जबकि पिछले डेढ़ महीने से मैंने नीतीश कुमार का सहयोग किया है। मैंने  जनता की भी मदद की हैं लेकिन मेरे साथ गलत हो रहा है। उन्होंने नीतीश कुमार से सवाल किया कि आखिर जो मामला हाईकोर्ट में लंबित पड़ा है, उसमें कोरोना काल में गिरफ्तारी क्या जरूरी थी?

पप्पू यादव के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि कोर्ट के आदेश पर बीरपुर जेल भेजे जाने के बाद भी जेल में पप्पू यादव को उचित सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इसलिए अब इसके खिलाफ भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

क्या है गिरफ्तारी की वजह ?

मंगलवार, 11 मई की सुबह पटना पुलिस ने पप्पू यादव को हिरासत में ले लिया था। कारण बताया गया कि उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) के कोविड वार्ड में बिना किसी की अनुमति प्रवेश किया। लेकिन कुछ ही घंटो बाद पुलिस अफसरों ने बताया कि पप्पू यादव पर मधेपुरा में अपहरण और हत्या के 32 साल पुराने एक मामले में वारंट था। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

मधेपुरा पुलिस ने पटना पुलिस से संपर्क साधा था। देर शाम मधेपुरा पुलिस एक डीएसपी के नेतृत्व में देर रात पटना आई और अपने साथ पप्पू यादव को लेकर चली गई। अपहरण का ये मामला वर्ष 1989 में मधेपुरा के उदाकिशुनगंज के कुमार खंड थाने में दर्ज किया गया था। इसमें पप्पू यादव अभियुक्त थे। इस मामले में वह बेल पर बाहर थे। लेकिन अचानक बेल टूट गई और इसके बाद 22 मार्च 2021 को कोर्ट की ओर से वॉरंट जारी किया गया था।

गहराया एंबुलेंस विवाद

 

पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि कुछ दिन पहले उनके द्वारा बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी के ऑफिस में खड़ी एंबुलेंस का वीडियो सार्वजानिक कर दिया गया था।  7 मई को पप्पू यादव ने रूडी के आमनौर स्थित ऑफिस का वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में साफ़ दिख रहा था कि एम्बुलेंस बेकार खड़ी हैं। ट्विटर के जरिए पप्पू यादव द्वारा ये सवाल भी उठाया गया कि जो एम्बुलेंस सांसद निधि से खरीदी गई उन्हें तरह क्यों रखा गया है। जबकि इस कोरोना काल में सबको एम्बुलेंस की जरूरत है।

इस मामले को लेकर रूडी और पप्पू यादव के बीच ट्विटर वॉर भी हुआ था। उस समय रूडी ने अपने बचाव में कहा था कि ये एंबुलेंस ड्राइवरों की कमी के कारण नहीं काम आ रही हैं। लेकिन पप्पू यादव द्वारा 70 ड्राईवर मुहैया करा दिए गए थे। पप्पू यादव ने 8 मई को DMCH दरभंगा के खेल मैदान बेंता ओपी के पास खड़े खड़े खराब हो रही एम्बुलेंस का वीडियो ट्वीट भी पोस्ट किया था।

नीतीश पड़े अकेले

नीतीश कुमार पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद अब कुछ अकेले से पड़ते जा रहे हैं। अब उनकी पार्टी जेडीयू के कुछ नेता भी घटक दलों के साथ मिलकर विरोध जताने लगे हैं। बेगूसराय के पूर्व सांसद और नीतीश कुमार के करीबी JDU के नेता मोनाजिर हसन का कहना हैै कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी की जितनी भी निंदा की जाए, वो काफी कम है। वो तो गरीबों के मसीहा के तौर पर कार्य कर रहे थे।

गिरफ्तारी पप्पू यादव की नही बल्कि गिरफ्तारी तो छपरा के DM और राजीव प्रताप रूडी की होनी चाहिए थी। पप्पू यादव तो मुसीबत के वक्त ग़रीबों की मदद कर रहे थे, ऐसे समय में उनकी गिरफ्तारी बेहद निंदनीय है।

संदेश के पूर्व विधायक और JDU नेता विजयेंद्र यादव ने भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी को एक ग़लत कार्यवाही बताया।इसपर उन्होंने कहा कि मानवता के आधार पर राजीव प्रताप रूडी को एक पल के लिए भी सांसद पद पर रहने का अधिकार नहीं है। पप्पू यादव को मानवता के आधार पर रिहा करना चाहिए। साथ ही BJP के MLC रजनीश कुमार ने भी पप्पू यादव की गिरफ़्तारी को बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

सहयोगी दल भी हुए नीतीश से नाराज

सत्तारूढ़ NDA का हिस्सा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इसपर कहा कि बिहार के गरीब लोगों की मदद के लिए एक जन प्रतिनिधि 24 घंटे कार्यरत है। इसके बाद भी राज्य सरकार द्वारा उसे गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायिक रूप से कार्रवाई से पूर्व इसकी जांच होनी चाहिए थी।

एनडीए के घटक दल VIP के अध्यक्ष मुकेश सहनी की ओर से भी राज्य सरकार के विरुद्ध अपना गुस्सा व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को जन प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को महामारी से परेशान लोगों की मदद करने के लिए बढ़ावा देना चाहिए। ऐसे समय में पप्पू यादव की गिरफ्तारी संवेदनशील नही दिखाई देती है।

इनके अतिरिक्त कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता राजेश सिंह राठौर ने भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लोकतंत्र के विरुद्ध बताया। राजीव प्रताप रूडी के विरुद्ध बोलने वाले को जेल भिजवा दिया गया है। रूडी पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है, जिनके यहां काफी सारी एंबुलेंस पड़ी रहती है। इससे तो यह साफ है की मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और सच बोलने वाले की आवाज को दबा रहे हैं। घटक दलों के
साथ-साथ अब उनकी पार्टी जेडीयू के कुछ नेता भी विरोध जताने के लिए आगे आ रहे है।

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