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गोवा भाजपा में घमासान, पार्टी छोड़ सकते है उत्पल पर्रिकर

अगले महीने होने जा रहे गोवा सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है ,लेकिन गोवा में सत्ताधारी भाजपा के भीतर अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सामने आने लगे हैं।

 

दरअसल ,राज्य में 14 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। प्रदेश में जहां एक तरफ अन्य राजनीत‍िक पार्टियां अपने उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी कर रही है ,वहीं दूसरी ओर भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर के कारण मुसीबत में फंसती नजर आ रही है। भाजपा उत्‍पल को उनकी पसंद की सीट से टिकट नहीं दे रही है। उत्पल की जिद पर प्रदेश प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि पार्टी किसी को सिर्फ इसलिए टिकट नहीं दे सकती क्योंकि वो एक नेता के बेटे हैं। इसके बाद उत्पल ने कहा है कि गोवा में जिस तरह की राजनीति हो रही है। उसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। क्या केवल जीतने की योग्यता ही पैमाना है? चरित्र और ईमानदारी कोई मायने नहीं रखती?

ऐसे में अब खबर है कि अन्य राजनीतिक पार्टियों ने उत्पल पर्रिकर अपनी पार्टी में शामिल होने की पेशकश शुरू कर दी। वहीं भाजपा को डर सताने लगा है कि उत्पल अगर पार्टी छोड़ते हैं तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके लिए पार्टी ने उन्हें मनाना शुरू कर दिया है। इसी के साथ ही पार्टी ने उन्हें एक ऑफर भी दिया है। जिसके मुताबिक, पार्टी ने उनसे आग्रह किया है कि वो पणजी से विधानसभा चुनाव लड़ने की जिद छोड़ दें। उन्हें बेहतर मौका दिया जाएगा । मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने उन्हें पणजी के स्थान पर कहीं और से या फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अहम जिम्मेदारी दे सकती है।

 

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही उत्पल पर्रिकर ने कहा था कि राजनीतिक पद कड़ी मेहनत से मिलता है। इसे कोई भी पुश्तैनी जागीर समझकर हासिल नहीं कर सकता। लेकिन अब अपने पिता की परंपरागत सीट पणजी से टिकट नहीं मिलने से वो पार्टी से नाराज चल रहे हैं । जिसे भाजपा उन्हें देना नहीं चाहती है।

पणजी से ही टिकट क्यों मांग रहे उत्पल

राज्य की पणजी विधानसभा सीट पर भाजपा का लंबे समय से वर्चस्व रहा है। मनोहर पर्रिकर यहां से 6 बार चुनाव जीते थे। पर्रिकर पहली बार वर्ष 1994 में इस सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1994, 2002, 2007, 2012 में भी विधायक बने। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद मनोहर पर्रिकर को केंद्र में रक्षा मंत्री बनाया गया था । पर्रिकर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से इस सीट से जीतकर आए। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें फिर से गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया था। 17 मई 2019 को पर्रिकर का निधन हो गया। उनके निधन के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के अतनासियो मोंटेसेरेट जीते जो अब भाजपा में हैं।

आप, टीएमसी और शि‍वसेना उत्‍पल के साथ

भाजप छोड़ने के सियासी चर्चाओं के बिच आम आदमी पार्टी के मुखिया अरव‍िंद केजरीवाल ने कहा है क‍ि अगर भाजपा उत्पल को टिकट नहीं देती है तो उत्पल निर्दलीय ही चुनाव लड़ सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने उत्पल को पार्टी में शामिल होने का न्योता दे दिया है। वहीं, गायिका और सोशल एक्टिविस्ट हेमा सरदेसाई ने बताया कि उन्हें टीएमसी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला है। उन्होंने कहा कि अगर उत्पल चुनाव लड़ रहे हैं तो मुझे लड़ने की जरूरत नहीं है।उन्होंने उत्पल को पणजी की जरूरत बताया।

शिवसेना नेता संजय राउत ने भी कहा है कि मनोहर पर्रिकर ने गोवा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन पर्रिकर के चले जाने के बाद उनका परिवार दिक्कत का सामना कर रहा है। संजय राउत ने आगे कहा कि मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल को गोवा की राजधानी पणजी से टिकट दिया जाना चाहिए। चुनाव लड़ने वाले हर राजनीतिक दल को उनका समर्थन करना चाहिए और उन्हें सत्ता में लाना चाहिए।

 

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