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डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी पर दिल्ली से कर्नाटक तक बवाल

कांग्रेस के संकटमोचक कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डीके शिवकुमार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कल देर रात मंगलवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद से दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक कोहराम जारी है। कांग्रेस ने कहा कि डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी से सरकार अपनी नाकाम हो चुकी नीतियों और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।वहीं, कांग्रेस समर्थक बंगलूरू के कई इलाकों में लगातार विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ कर रहे हैं।कर्नाटक के रामनगर में कल  देर रात दो बसों को आग के हवाले कर दिया गया जबकि कई अन्य बसों में तोड़फोड़ की गई। जिसके बाद परिवहन विभाग और रामनगर पुलिस ने बसों के परिवहन पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है।

डीके शिवकुमार को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कल गिरफ्तार किया था। विधायक शिवकुमार पूछताछ के लिए चौथी बार कल नई दिल्ली खान मार्केट स्थित ईडी मुख्यालय में पेश हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है, इसलिए गिरफ्तार किया गया है।

देर रात गिरफ्तारी के बाद शिवकुमार को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाने के दौरान उनके समर्थकों ने ईडी कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया। ईडी आज  उन्हें कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए हिरासत की मांग करेगा। इस बीच, शिवकुमार ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। वहीं, कांग्रेस भी उनके समर्थन में उतर आई है।

कल  एक ट्वीट में डीके शिवकुमार ने कहा कि मैं अपने भाजपा के मित्रों को बधाई देता हूं कि उन्होंने मुझे गिरफ्तार करने के मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मेरे खिलाफ आयकर और ईडी केस राजनीतिक रूप से प्रेरित है। मैं भाजपा के बदले की कार्रवाई का शिकार हूं।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में ईडी ने शिवकुमार और दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन के कर्मचारी हनुमंथैया सहित कुछ अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। यह मामला पिछले साल आयकर विभाग द्वारा शिवकुमार के खिलाफ बंगलूरू की विशेष कोर्ट में दायर आरोप पत्र के आधार पर दर्ज किया गया था। इसमें करोड़ों की टैक्स चोरी और हवाला लेन-देन का आरोप था। पिछले हफ्ते ही कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिवकुमार की ईडी समन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की थी। इसके बाद उन्हें जांच एजेंसी के समक्ष पेश होना पड़ा।

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