वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जा करने और उसे औने-पौने दामों पर बेचने के आरोपी वसीम रिजवी ने सूबे की सत्ता परिवर्तन के साथ ही अपनी आस्था में भी परिवर्तन कर लिया था। ऐसा इसलिए ताकि सरकार का संरक्षण उन्हें मिल सके और वे जेल जाने से बच जाएं। हुआ भी कुछ ऐसा ही। वसीम रिजवी की चमचागिरी रंग लायी और योगी सरकार का संरक्षण उन्हें प्राप्त हो गया। ये दीगर बात है कि भाजपा का समर्थन प्राप्त करने के एवज में उन्होंने भारी कीमत चुकायी। न सिर्फ अपने वर्ग के लोगों के बीच दुश्मन बन बैठे बल्कि अपने ही धर्म के विरोध में बोलना उनके लिए मजबूरी बन गया। चक्की के दो पाटों के बीच पिस रहे वसीम रिजवी रामजन्मभूमि निर्माण के बाबत संकल्प लेकर तो अपनों के बीच अलग-थलग पड़ ही गए थे साथ ही उन्होंने ‘राम की जन्मभूमि’ फिल्म का निर्माण करके भाजपा को खुश करने में सफलता हासिल कर ली लेकिन एक बड़ी मुसीबत जरूर मोल ले ली है। विगत दिनों इस फिल्म को लेकर एक रिट दायर की गयी। रिट पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने वसीम रिजवी को नोटिस जारी किया है।
कुमार राकेश
अपने विवादित बयानों से लगातार चर्चा में बने रहने वाले वसीम रिजवी एक बार फिर से मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। उनकी विवादित फिल्म ‘राम की जन्मभूमि’ में इस्लाम विरोधी अपमानजनक टिप्पणी होने के कारण रुदौली के समाजसेवी सैय्यद फारुक अहमद और इलाहाबाद के मौलाना हुसैन अख्तर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता संतोष सिंह के माध्यम से 28 मार्च को याचिका प्रस्तुत की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस पंकज भाटिया ने 29 अप्रैल को सरकार को हलफनामा दाखिल करने के साथ ही दूसरे पक्षकारों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मीडिया से बात करते हुए सैय्यद फारुक ने कहा है कि वसीम रिजवी जैसे घृणित मानसिकता के लोग अपने निजी लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। देश में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन जैसे तत्वों की गतिविधियों पर नियंत्रण लगाना बहुत जरूरी है। सैय्यद फारुक को उम्मीद है कि न्यायालय इस विषय में एक मिसाली आदेश पारित करेगा।
ज्ञात हो वसीम रिजवी की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से भी हरी झण्डी दी जा चुकी है। वैसे तो इस फिल्म को अपने तय समय मार्च 2019 में ही रिलीज हो जाना चाहिए था लेकिन मुस्लिम वर्ग में भारी विरोध के चलते इस फिल्म का प्रदर्शन रोक दिया गया। ऐसा माना जा रहा है कि यह कदम सरकार ने लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उठाया है ताकि चुनाव के दौरान मुसलमानों का विरोध भाजपा के मंसूबों पर पानी न फेर दे। दावा किया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव समाप्त होते ही इस फिल्म को रिलीज कर दिया जायेगा। मालूम हो कि इस फिल्म के प्रदर्शन को रोकने के लिए मुम्बई के माफिया डाॅन टाइगर मेमन के भाई अब्दुल मेमन ने भी धमकी दी थी। हालांकि इस बात के पुख्ता सुबूत नहीं जुटाए जा सके थे लेकिन इस कथित धमकी के सहारे वसीम को भाजपा का समर्थन अवश्य मिल गया था।
इस फिल्म में मुस्लिम समाज में हलाला जैसी का कुप्रथा का चित्रण भी किया गया है। यही वजह है कि इस फिल्म को यूनिवर्सल और एडल्ट का सार्टिफिकेट दिया गया है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं का मानना है कि वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जा करने वाले वसीम रिजवी किसी तरह से सरकार का संरक्षण चाहते थे लिहाजा उन्होंने सरकार को खुश करने की गरज से इस तरह का कदम उठाया है। बताते चलें कि इससे पूर्व वसीम रिजवी अयोध्या में रामजन्मभूमि निर्माण कराए जाने की घोषणा करके भी चर्चा बटोर चुके हैं।
यदि हुसैन अख्तर एवं अन्य बनाम यूनियन आॅफ इण्डिया की यह रिट पिटीशन लम्बी खिंची तो वसीम रिजवी की उम्मीदों पर ग्रहण लगना स्वाभाविक है। वैसे कहा तो यही जा रहा है कि लोकसभा चुनाव समाप्त होते ही सरकार की पैरवी पर जल्द फैसला भी सुना दिया जायेगा जो वसीम रिजवी के पक्ष में होगा और आनन फानन में फिल्म भी रिलीज कर दी जायेगी।
फिलहाल इस रिट पिटीशन (केस नम्बर-10200/2019) के बाद मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।

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