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जम्मू में 6 और घाटी में 1 सीट बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में क्षेत्रीय दल

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 ख़त्म होने के बाद एक बार फिर चर्चा में हैं। परिसीमन आयोग ने जम्मू में 6 और कश्मीर घाटी में 1 सीट बढ़ाने की सिफारिश की है। इस सिफारिश की जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां विरोद्ध कर रही है। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना देसाई कर रही हैं। साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा भी इसके के सदस्य हैं।

20 दिसंबर को परिसीमन आयोग ने इस मुद्दे पर दिल्ली में एक बैठक की है। इसमें भाजपा के दो सांसद जुगल किशोर और डॉ जितेंद्र सिंह के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन सांसद फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और मोहम्मद अकबर लोन भी शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़,परिसीमन आयोग ने प्रस्ताव रखा गया कि जम्मू क्षेत्र के लिए 6 और कश्मीर के लिए 1 विधानसभा सीट बढ़ाई जाएगी। साथ परिसीमन आयोग की तरफ से कहा गया है कि जम्मू -कश्मीर के विपक्षी पार्टिया इस पर अपनी बात 31 दिसंबर तक रखे।

जम्मू -कश्मीर में सिफ़ारिश लागू हुईं तो जम्मू में कुल विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 43 और कश्मीर घाटी में 47 हो जाएगी। जम्मू -कश्मीर के कुल 90 सीटों में से 9 अनुसूचित जनजातियों और 7 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित रखने का सिफ़ारिश किया है। जानकारी के अनुसार जम्मू -कश्मीर पहली बार एसटी सीट का प्रस्ताव रखा गया है। परिसीमन आयोग के फैसले को जम्मू-कश्मीर में बहुत बड़े राजनीतिक बदलाव की तरह देखा जा रहा है।

परिसीमन आयोग के तहत विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने के लिए आयोग को अगले वर्ष 6 मार्च तक का समय दिया गया है। हालांकि जम्मू-कश्मीर की विपक्षी पार्टियों के विरोध के चलते परिसीमन आयोग के लिए फैसले लेना आसान नहीं होगा। महबूबा मुफ्ती पहले ही ये आरोप लगा चुकी है कि उसे परिसीमन आयोग में कोई भरोसा नहीं है, क्योंकि इसके सदस्य बीजेपी के राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

विपक्षी पार्टियों ने जताया विरोध?

पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती कहना है कि परिसीमन आयोग भाजपा का आयोग है। उनका प्रयास अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुमत को खड़ा करना और लोगों को और अधिक शक्तिहीन करना है। वो भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिएसीटों को इस तरह से बढ़ाना चाहते हैं।
वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आयोग की सिफारिशों को अस्वीकार्य कर के ट्विटर पर कहा,‘जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की सिफारिशें स्वीकार्य नहीं हैं। जम्मू -कश्मीर विधानसभाओं का बंटवारा 2011 की जनगणना के हिसाब से नहीं है। जम्मू को 6 और कश्मीर को केवल 1 सीट दी गई है। ’

एक और ट्वीट करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा,‘ये बहुत ज्यादा निराशाजनक है कि आयोग भाजपा का एजेंडा को अपनी सिफ़ारिश में आगे बढ़ाता दिखता है।आंकड़ों पर विचार किया जाना चाहिए था। वादा ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ के विपरीत है। यह एक राजनीतिक दृष्टिकोण दिखाई देती है।

क्या होता है परिसीमन?

जब किसी राज्य की विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया रिसीमन कहलाती है। परिसीमन का काम एक उच्चाधिकार निकाय को सौंपा जाता है। ऐसे निकाय को परिसीमन आयोग कहा जाता है। भारत में अब तक परिसीमन आयोगों का गठन 4 बार किया गया है। परिसीमन आयोग भारत में एक उच्चाधिकार निकाय है जिसके आदेशों को कानून के तहत जारी किया गया है। परिसीमन आयोग के आदेश को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

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