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पेटीएम पर आरबीआई की मार

उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ में एक कस्बा है हरदुआगंज। इस अनजान कस्बे को ख्याति दिलाने का काम यहां के एक सामान्य निम्न मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे एक बालक ने किया। शिक्षा में हमेशा अव्वल रहने वाले इस बालक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही व्यापार में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था। www.indiasite.net नाम से एक वेब पोर्टल बना उसे भारी मुनाफे में बेचने वाले विजय शेखर शर्मा ने व्यापार की दुनिया में अपने इस पहले कदम के बाद कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 2010 में पेटीएम की शुरुआत कर डिजिटल पेमेंट की दुनिया में नाम स्थापित करने वाले विजय शेखर की गिनती विश्व के अमीरों में की जाती है। 13.2 लाख करोड़ (170 बिलियन अमेरिकी डॉलर) वाली पेटीएम और उसके मालिक विजय शेखर शर्मा बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक के एक आदेश चलते भारी संकट में घिर चुके हैं। रिजर्व बैंक ने 29 फरवरी के बाद पेटीएम के बैंकिंग कारोबार पर रोक लगाने के फैसले से न केवल इस कंपनी के आम शेयर धारकों को सकते में डाल दिया है, बल्कि विदेशी पूंजी निवेशकों का खरबों रुपया भी डूबने की कगार पर है

इस महीने की शुरुआत में जहां बजट पेश होने पर कुछ व्यावसायिक प्लेटफॉर्म के शेयर्स बढे तो वहीं एक बड़ी कंपनी को आरबीआई के द्वारा ऐसा झटका मिला कि उसके शेयर्स लगातार गिरते जा रहे हैं। यह कंपनी भारत की जानी-मानी फिनटेक कंपनियों में से एक है। भारत में लगभग 2 हजार से भी अधिक फिनटेक कंपनियां हैं। फिनटेक की दुनिया में ‘पेटीएम कंपनी’ का बड़ा नाम है। यह उपभोक्ताओं को भुगतान, बैंकिंग, उधार और यहां तक कि बीमा सेवाएं भी प्रदान करता है। पेटीएम ने नोटबंदी के समय पैसों के लेन-देन से जुडी बड़ी समस्याओं का समाधान किया था। तभी से इसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी। अत्यधिक मांग और चलन के कारण उस समय पेटीएम के एक शेयर की वैल्यू लगभग 2 हजार तक पहुंच गई थी लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के द्वारा पेटीएम पेमेंट बैंक पर पाबंदी के ऐलान के बाद अब तक इसमें 75 प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट देखी जा रही है। स्टॉक मार्किट में भी इसके शेयर लगातार गिरते ही जा रहे हैं।

क्या है पेटीएम को लेकर आरबीआई का फैसला
आरबीआई ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 31 जनवरी के दिन पेटीएम पेमेंट्स बैंक की सर्विस पर रोक लगा दी है। आरबीआई ने कहा कि 29 फरवरी 2024 के बाद से पेटीएम पेमेंट प्लेटफॉर्म अपने खातों या वॉलेट में नई जमा स्वीकार नहीं कर सकता है। केंद्रीय बैंक के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि 29 फरवरी के बाद किसी भी कस्टमर अकाउंट, प्रीपेड टूल, वॉलेट, फास्टैग्स, एनसीएमसी कार्ड (नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड) आदि में किसी भी ब्याज, कैशबैक, रिफंड, डिपॉजिट, क्रेडिट ट्रांजेक्शन या टॉप अप की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्यों लगाई गई रोक

पेटीएम पर रोक लगाते हुए आरबीआई ने बताया कि ‘पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के तहत की गई थी। जिसमे मार्च 2022 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक से नए कस्टमर्स जोड़ने के लिए मना किया गया था, लेकिन एक सिस्टम ऑडिट रिपोर्ट में देखा गया कि बैंक में लगातार नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है। जिसके कारण इसपर रोक लगाई गई है। पेटीएम ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि ‘आरबीआई के निर्देशों का पालन करने के लिए ‘तत्काल कदम’ उठाया जाएगा। पेटीएम अलग- अलग पेमेंट ऑप्शन के लिए पेटीएम पेमेंट्स बैंक के साथ-साथ अलग -अलग बैंकों के साथ भी काम करती है। अब हम इन योजनाओं में तेजी लाएंगे और पूरी तरह से अन्य बैंक पार्टनर्स के पास जाएंगे।’

रिजर्व बैंक के इस कदम से पेटीएम को भारी नुकसान हुआ है, अटकलें लगाई जा रही हैं कि आरबीआई की कार्रवाई से पेटीएम को दो दिन में 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि पेटीएम द्वारा अपने ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित रखने की प्रक्रिया का अनुपालन सही तरीके से नहीं किया गया जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक को इस कंपनी के जरिए मनी लॉडिंªग किए जाने की आशंका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के पेटीएम पर प्रतिबंध लगाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि ‘पेटीएम पेमेंट्स बैंक’ पर 1 पैनकार्ड से 1000 से अधिक यूजर्स के एकाउंट्स जुड़े थे। इसके अलावा आरबीआई और ऑडिटर्स की जांच में पाया गया कि पेटीएम द्वारा करोड़ों की ट्रांसेक्शन बैंकिंग नियमों के दायरे में नहीं की गई है। इसके साथ पेटीएम पेमेंट बैंक के पास 35 करोड़ ई-वॉलेट हैं, और इनमें से केवल 4 करोड़ ही रन करते हैं। वहीं लाखों एकाउंट्स की केवाईसी भी अपडेट नहीं की गई है।

पेटीएम का अब तक का सफर
पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने वर्ष 2010 में पेटीएम की शुरुआत की थी। विजय शेखर शर्मा आज खरबपति हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विजय शेखर के शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ के छोटे से कस्बे हरदुआगंज के एक हिंदी मीडियम स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से उन्होंने बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करी। विजय शेखर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने दिल्ली आए तो उन्हें इंग्लिश में पढ़ाई करने में काफी दिक्कत हुई। वर्ष 1997 में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही ‘indiasite.net’ नामक एक वेबसाइट बनाई। जिसके बाद उन्होंने इसे लाखों रुपए में बेचा था। वर्ष 2000 में उन्होंने ‘one97 communication ltd’  की स्थापना करी। इस पर जोक्स, रिंगटोन, परीक्षा के रिजल्ट और क्रिकेट मैच का स्कोर दिखाया जाता था, इसके बाद यह पेटीएम की पैरेंट कंपनी बनी। विजय शेखर ने साल 2010 में पेटीएम की शुरुआत साउथ दिल्ली से की। धीरे-धीरे देश के कोने-कोने में इसका इस्तेमाल होता रहा और इसने आज विश्व ख्याति हासिल कर ली है।

पेटीएम में फंडिंग
2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के शुरुआती निवेश के साथ पेटीएम ने नोएडा से काम करना शुरू किया था। वर्ष 2011 में कंपनी को सफायर वेंचर्स से 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली। जिसके बाद पेटीएम ने वर्ष 2012 में पेमेंट गेटवे की सुविधा देनी शुरू कर दी। 2014 में कंपनी ने पेटीएम वॉलेट लॉन्च किया, जो पेटीएम बिजनेस का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बना। डिजिटल इंडिया के नारे को बुलंद करते हुए पेटीएम ने लोगों को कैशलेस पेमेंट करने की सुविधा प्रदान की और वर्ष 2015 में पेटीएम नेक्यूआर कोड, मूवी टिकट और बिल पेमेंट आदि जैसे सुविधाएं देने भी शुरू कर दी। जबकि वर्ष 2015 में चाइनीज ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप ने पेटीएम ने बड़ा निवेश किया। अलीबाबा की एफिलिएट कंपनी एएंटी फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप ने पेटीएम के 40 प्रतिशत हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया। कंपनी को सॉफ्टबैंक और बर्कशायर हैथवे जैसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भी साथ मिला, जिससे कंपनी को वैल्यूएशन बढ़ाने में काफी मदद मिली थी।

नोटबंदी से पेटीएम को मुनाफा
वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान कर, डिजिटल ट्रांजेक्शन्स की ओर इशारा किया। उस समय बड़ी संख्या में कैश की कमी से जूझते लोगों को डिजिटल लेन-देन एक सरल उपाय लगा। इसी के साथ पेटीएम की मांग के साथ-साथ शेयर्स भी आसमान छूने लगे। नोटबंदी के समय सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार को कम करने के लिए नोटबंदी तो की ही गई साथ ऑनलाइन पेमेंट मोड को अपनाने पर भी काफी जोर दिया गया इसलिए भी जनता ने डिजिटलाइजेशन को बहुत तेजी से अपनाना शुरू कर दिया। उस दौरान पेटीएम ने पीएम मोदी का फोटो छापकर और अधिक तारीफे बटोरी और लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उस समय यह पेटीएम के लिए काफी कारगर भी साबित हुआ। इसके साथ-साथ पेटीएम का चर्चित कैंपेन ‘पेटीएम करो’ पूरे देश में हिट हो गया। जिसने पेटीएम को जबरदस्त पॉपुलैरिटी दिलाई।

पेटीएम आईपीओ
नवंबर, वर्ष 2021 में पेटीएम (इनिशियल पब्लिक ओपनिंग, जब कोई निजी कम्पनी अपने शेयर्स को सार्वजनिक रूप से बेचती है उसे आईपीओ कहा जाता है।) द्वारा सफलतापूर्वक आईपीओ निकाला गया था। इससे कंपनी को 18,300 करोड़ रुपए का मोटा फंड मिला जिसके कारण इसे भारत का सबसे कामयाब आईपीओ कहा जाने लगा। इसके बाद पेटीएम की वैल्यूएशन 20 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यह इन्वेस्टमेंट बताता है कि उस दौरान निवेशकों ने भारत के तेजी से बदलते फाइनेंशियल मार्केट में पूरा विश्वास जताया था।

क्या काम करता है पेटीएम

पेटीएम का इस्तेमाल केवल पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं किया जाता है। इससे आप फोन रिचार्ज, बिजली के बिल की पेमेंट, गोल्ड परचेज, म्युचुअल फंड खरीदने जैसे काम कर सकते हैं। हालांकि पेटीएम केवल यहीं तक सीमित नहीं है। आज के समय में देश के छोटे-मोटे सभी दुकानदार पेटीएम की मर्चेंट सर्विस इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कई कंपनियां ऑनलाइन पैसा कमाने के लिए अपनी वेबसाइट्स-ऐप पर पेटीएम का पेमेंट गेटवे यूज करती हैं। इससे पता लगता है कि आम आदमी से लेकर बिजनेस के लिए भी पेटीएम काफी अहमियत रखता है।

आरबीआई के निर्णय से सभी सदमे में
आरबीआई के बैन लगाने को लेकर इन्वेस्टर्स से लेकर आम पेटीएम यूजर्स भी परेशान हैं। हालांकि, कंपनी के एमडी विजय शेखर शर्मा ने साफ किया कि पेटीएम पर इस फैसले का ज्यादा असर नहीं होगा, और कंपनी आरबीआई के आदेशों का अनुपालन करेगी। पेटीएम का प्लान फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना है। पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक व्हीकल स्टार्टअप में निवेश के लिए 30 करोड़ रुपए का ‘वीएसएस इन्वेस्टमेंट फंड’ लॉन्च किया है। फिलहाल, पेटीएम का मार्केट कैपिटलाइजेशन तेजी से घट रहा है, लेकिन पेटीएम फाउंडर ने ताजा बयान देकर आगे बढ़ने का इरादा जाहिर कर दिया है। अब देखना होगा कि निवेशक 38,600 करोड़ रुपए मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनी पर कितना भरोसा करते हैं।

क्या कहते हैं फिनटेक दुनिया के दिग्गज

अश्वीर ग्रोवर ने कहा, ‘मैं आरबीआई को नहीं समझ पाता। स्पष्ट रूप से आरबीआई फिनटेक को खत्म कर देना चाहता है। आरबीआई के द्वारा उठाया गया यह कदम फिनटेक के खिलाफ हैं। इस तरह के कदम इस क्षेत्र को पूरी तरह खत्म कर देंगे।’ सिर्फ ग्रोवर ही नहीं, बल्कि कैपिटल माइंड के संस्थापक और सीईओ दीपक शेनॉय ने भी आरबीआई के कदम पर अविश्वास जताते हुए कहा कि ‘विश्वास नहीं हो रहा कि आरबीआई इस तरह से एक बैंक को नष्ट कर देगा। जब यस बैंक के पास बहुत बड़े मुद्दे थे तो उसे आरबीआई ने अपने कब्जे में ले लिया और अन्य बैंकों को भी अपने कब्जे में ले लिया। सिस्टम की सुरक्षा के लिए उन्होंने 15 दिनों में सुधार सुनिश्चित भी कर दिए थे। लेकिन अब वे सभी बैंकों के ग्राहकों, विक्रेताओं और भागीदारों को पीड़ित होने देना चाहते हैं और अनावश्यक रूप से विश्वास का मुद्दा पैदा करना चाहते हैं।’ करियर 360 के संस्थापक और अध्यक्ष महेश्वर पेरी ने भी पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए आरबीआई की आलोचना की है।

विदेशी निवेशकों ने जताया भरोसा
पेटीएम के लगातार हो रहे नुकसान के कारण इन्वेस्टर्स द्वारा शेयर्स को बेचा जा रहा है। इन बेचे जा रहे शेयर्स को ‘मॉर्गन स्टेनली एशिया पीटीआई-ओडीआई के माध्यम से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर पेटीएम के शेयर्स खरीदें हैं। एनएसई पर थोक सौदे के आंकड़ों के अनुसार, मॉर्गन स्टेनली के द्वारा 50 लाख शेयर खरीदे गए हैं। इन शेयर्स में एक शेयर की कीमत ₹ 487.20 है। बताया जा रहा है कि कुल ₹ 243.60 करोड़ के शेयर्स खरीदे गए हैं। यह डील पेटीएम के लिए काफी राहतमंद साबित हुई है।

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