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रविन्द्र ने जगाई संभावनाएं

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में भारत के रविंद्र सिंह बेशक गोल्ड मैडल पाने से वंचित रह गए लेकिन उन्होंने अपने बेहतर प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। दुनिया के खेल प्रेमियों को वह संदेश देने में सफल रहे कि कुश्ती में भारत की भविष्य की संभावनाएउं बेहतरीन है। 22 साल के रवींद्र ने सीनियर यूरोपीयन चैंपियन अर्मेनिया के आर्सेन हारुतयुनान को 4-3 से हराकर फाइनल में अपनी जगह बना ली थी। लेकिन आखरी चुनौती में हार के बाद उनको अब रजत पद से ही संतोष करना होगा। 22 साल के रवींद्र को 61 किग्रा वर्ग में मौजूदा एशियन अंडर-23 चैंपियन उलुकबेक के खिलाफ 3-5 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद साउथ एशियन गेम्स 2016 में स्वर्ण और 2014 में कैडेट एशियन चैंपियनशि। में कांस्य पदक जीतने वाले सोनीपत के पहलवान रवींद्र का प्रदर्शन सराहनीय रहा। इसके लिए उनको बधाईयां मिल रही हैं। बुडापेस्ट के हंगरी में आयोजित इस चैंपियनशि। में रवींद्र ने 61 किग्रा वर्ग के फाइनल में पहुंच कर अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशि। में भारत का पहला पदक पक्का किया था। 33 देशों के इस प्रतियोगता में रवींद्र ने सीनियर यूरोपीयन चैंपियन अर्मेनिया के आर्सेन हारुतयुनान को 4-3 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया था। भारतीय कुश्ती महासंघ ने यह जानकारी दी है। रविंदर का पिछला मुकाबला आर्सेन के साथ काफी करीबी रहा है, लेकिन जीत हासिल करने में वो कामयाब रहे। रवींद्र ने इस प्रतियोगिता में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और वो जिस तरह की फार्म में थे उससे ऐसा लग रहा था कि वो गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब हो सकते हैं।

लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा। रवींद्र के लिए उनके गांव के लोगो ने फाइनल के लिए बधाई दी है। रविंदर बेसक इस मुकाबले में सफल नहीं हुए लेकिन लोगों के उन्होंने दिल जीत लिया है। रविंद्र ने अपने को इतना मजबूत बनाया था की विपक्षी खिलाडी को ध्वस्त कर देने में जरा सा भी नहीं चूकते। अबकी बार इस गोल्ड के मैदान में वो बड़ी छलांग लगाकर भारत का झण्डा ऊंचा कर सकते थे, क्योंकि वो मंजिल के बेहत करीब थे। सोनीपत के इस पहलवान की नजरें अब अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करने पर टिकी थी। इससे पूर्व अपने पहले मुकाबले में रवींद्र ने हंगरी के मार्सेल बुदाई कोवाक्स को 12-1 से हराया था, जबकि क्वार्टर फाइनल में रूस के दिनिस्लाम ताखतोरोव को 11-0 से रौंदा था। साउथ एशियन गेम्स 2016 में स्वर्ण और 2014 में कैडेट एशियन चैंपियनशि।में कांस्य पदक जीतने वाले इस खिलाडी पर उम्मीद बनी हुई थी। जब फाइनल में उनका सामना किर्गिस्तान के उलुकबेक झोलदोशबेकोव से हुआ तो हार का सामना करना पड़ा।

दूसरी तरफ अब देखना है कि 74 किग्रा वर्ग में गौरव बालियान को रेपेचेज के जरिये पदक जीतने का मौका क्या मिलेगा। उनका सामना अमेरिका के ब्रेडी गैरी बर्ज से होगा। अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशि। में साल 2018 में सर्वाधिक गोल्ड जापान ने जीते थे जापान ने 17 गोल्ड और 6 सिल्वर और 2 ब्रान्ज जीते थे और रूस यहां दूसरे पायदान पर था। भारत ने यहां एक भी गोल्ड हासिल नहीं किया था, लेकिन जिस तरह रविंद्र का फाइनल में पहुंचना जीत के लक्ष्य के बहुत करीब पहुंचना था। वो गोल्ड ला सकते थे। 2019 के संस्करण में यह भारत का पहला पदक और चैंपियनशि। में ओवरआल पांचवां पदक है। बजरंग पूनिया (65 किग्रा), विनोद कुमार (70 किग्रा) और महिला पहलवान रितु फोगाट (48 किग्रा) पोलैंड में हुए पहले संस्करण में रजत पदक जीतने में सफल रहे थे, जबकि पिछली साल रोमानिया के बुकारेस्ट में हुई चैंपियनशि। पदक लेकर लौटने वाले एकमात्र भारतीय रवि दहिया (57 किग्रा) थे, जिन्होंने रजत पदक जीता था।

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