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पंजाब कांग्रेस में फिर रार, जारी है सिद्धू – कैप्टन की तकरार

“झूठ बोलते हैं कैप्टन।”
“मैं शोपीस नहीं हूं, जो सिर्फ चुनाव में काम आऊ।”
“पंजाब को सिर्फ दो परिवार चला रहे हैं। अब मेरी बारी – अब तेरी बारी।”
“लोग आपको चुनते हैं, अफसरों को नहीं।”
“पंजाब कांग्रेस में सब ठीक नहीं है, लड़ाई किसी पद को लेकर नहीं। फलाना बनाम फलाना की लड़ाई है।”
” यह लडाई विचारधारा की है । जिसके पास पब है, सैकड़ों बीघा जमीन है, उसे अनुकंपा के आधार पर नौकरी दे दी गई। मेरी लड़ाई इसी सिस्टम के खिलाफ है।”
“जब सिस्टम ने खुद को बदलने से इनकार कर दिया तो मैंने सिस्टम ही ठुकरा दिया”
“योद्धा वही जो जुझे रण के अंदर।”
“पंजाब के सच और हक की लड़ाई हमने हाईकमान को बुलंद आवाज में बताई । जीतेगा पंजाब ही।”
अपनी ही पार्टी के सीएम से नाराजगी, शिकवे, शिकायत और पंजाब की चिंता जाहिर करते हुए उक्त विचार है नवजोत सिंह सिद्धू के। जी हां, वही नवजोत सिंह सिद्धू जो आजकल पंजाब कांग्रेस की राजनीति में अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। पिछले 1 सप्ताह में उनके द्वारा दिए गए अलग-अलग बयान यह सिद्ध करने के लिए काफी है कि सिद्धू पंजाब कांग्रेस की राजनीति में कुछ उलटफेर करने की संभावनाएं प्रतीत करा रहे हैं।
एक सप्ताह पहले राजस्थान कांग्रेस के बगावती तेवर दिखा चुके पायलट गुट के विधायकों ने कुछ यू कहा कि पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू और अमरिंदर सिंह का आपसी विवाद 10 दिन में खत्म कर दिया गया है। जबकि उनका पिछले 10 महीने से चला आ रहा विवाद अभी खत्म नहीं किया गया। तब कहा जाने लगा था कि तीन सदस्यीय समिति ने दोनों के विवाद को खत्म करने में सफलता हासिल कर ली है। ऐसा लगने भी लगा था। क्योकि दोनों की तरफ से कोई ऐसा बयान नहीं आया था जिससे लगे कि दोनों में गीले शिकवे अभी तक है। लेकिन कुछ दिन पहले से एक बार फिर दोनों के बीच सियासी आग भड़कने लगी और दोनों तरफ से फिर एक दूसरे पर राजनितिक बाण छोड़े जाने लगे।
पंजाब कांग्रेस में  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच पैदा हुए आपसी विवाद को खत्म करने के लिए 3 सदस्य समिति बनाई गई थी।  जबकि इससे पहले पंजाब कांग्रेस के प्रभारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत के प्रयासों के बावजूद भी सिद्धू और कैप्टन के मन के मलाल दूर नहीं हो पाए थे। फिलहाल 3 सदस्य कमेटी के प्रमुख राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मलिकार्जुन खडगे के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता जेपी अग्रवाल और हरीश रावत भी दोनों में कोई बीच का रास्ता नहीं निकाल पाए ।
हालांकि कहा जा रहा था कि अब यह कमेटी दोनों के गिले शिकवे खत्म  कर मिशन 2022 की तैयारियां शुरू कर देंगी। लेकिन ऐसा संभव होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आज पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समिति के समक्ष हाजिर होने के लिए दिल्ली में मौजूद है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में सियासी हल्ला मचाए हुए हैं । आए दिन उनके सत्ता विरोधी विचारों को सुनकर लगता नहीं है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में सिद्धू और कैप्टन के बीच सुलह संभव करा सकेगी।
 पिछले दिनों सिद्धू को सेटिंग करने के लिए पंजाब का डिप्टी सीएम बनाने की भी चर्चा चली थी। लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री कैप्टन तैयार नहीं हो पाए। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को यह लगता है कि अगर सिद्धू को पंजाब का डिप्टी सीएम बना दिया तो 2022 में वह सीएम पद के दावेदार हो जाएंगे। कैप्टन ऐसा होने नहीं देना चाहते।

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 कैप्टन ने जब 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो कहा कि उनका यह आखिरी चुनाव है। इसके बाद वह प्रदेश के सीएम भी बने । लेकिन 2022 आने से पहले ही वह अपने वादे से पलटी मारते नजर आ रहे हैं। मतलब यह है कि अगर अगले साल कांग्रेस पंजाब में बहुमत के साथ आती है तो एक बार फिर वह कांग्रेस के जहाज पर बतौर कैप्टन सवार हो सकते हैं ।
कैप्टन की नाराजगी पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से  भी बताई जा रही हैं । हरीश रावत नवजोत सिंह सिद्धू को ज्यादा महत्व दे रहे थे। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि सिद्धू पंजाब के भविष्य के नेता है । हरीश रावत के कहने का मतलब साफ था कि सिद्धू 2022 के सीएम पद के दावेदार की सूची में शामिल हो सकते हैं।
 सिद्धू की चाहत फिलहाल डिप्टी सीएम नहीं बनने की है। बल्कि उनका सपना पंजाब का सीएम बनना है। जिसके लिए वह अभी से फील्डिंग सजाने में लगे हुए हैं। फिलहाल वह चाहते हैं कि पंजाब कांग्रेस का मुखिया बनाकर उन्हें चुनाव संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए। अगर ऐसा होता है तो सिद्धू के हाथ में पंजाब चुनाव की न केवल कमान होगी बल्कि उनकी पसंद के प्रत्याशियों को भी 2022 के विधानसभा में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान के सामने चुनौती यह है कि वह सिद्धू और कैप्टन को कैसे मैनेज करें। क्योंकि दोनों की ही राजनीतिक महत्वकांक्षाए उछाल पर है

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