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हरियाणा के चरखी दादरी में आज किसान महापंचायत को संबोधित करेंगे ‘राकेश टिकैत’

केंद्र सरकार द्दारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 74 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए है। 26 जनवरी की घटना के बाद यहां आंदोलन कमजोर पड़ने लगा, तो भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के आंसूओं ने दोबारा आंदोलन को संजीवनी देने का काम किया। जिसके बाद दोबारा किसानों का जमावड़ा दिल्ली की सीमाओं पर लगने लगा। उसके बाद हरियाणा की खाप पंचायतों ने भी राकेश टिकैत के साथ इस आंदोलन में कूद पड़ी। राकेश टिकैत के नेतृत्व में हरियाणा के जींद के कोड़ला गांव में पहली महापंचायत हुई, जहां हजारों की संख्या में किसानों ने पहुंचकर किसान आंदोलन में अपना समर्थन दिया। इसके बाद पश्चिमी यूपी में भी महापंचायत हुई, और हजारों किसान एकत्रित हुए।

आज 7 फरवरी को किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भिवानी के चरखी दादरी में हो रही महापंचायत में शामिल होंगे। महापंचायत में शामिल होने से पहले राकेश टिकैत ने 2021 किसान क्रांति का ऐलान किया है। 6 फरवरी को किसानों ने पूरे देश में चक्का जाम का ऐलान किया था। जिसके बाद दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवा को बंद कर दिया गया था, और काफी भारी संख्या में सुरक्षाबलों को आईटीओ, लाल किला में तैनात किया गया था। किसान नेता दर्शन पाल ने चक्का जाम पर बोलते हुए कहा था कि ‘चक्का जाम’ सफल और शांतिपूर्ण रहा।

 

कर्नाटक और तेलंगाना में कुछ समस्या सामने आई है, कुछ लोगों को हटाया गया है। आने वाले दिनों में आंदोलन को आगे बढ़ाने पर आज बैठक में चर्चा हुई है। वही चक्का जाम पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा था कि हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि कुछ लोगों ने इन जगहों पर हिंसा फैलाने का प्रयास किया होगा। इसलिए हमने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सड़कों को अवरुद्ध नहीं करने का फैसला किया है। अब हमारा टारगेट 40 लाख ट्रैक्टरों की रैली का है। 26 जनवरी को हमने दिल्ली में 20 हजार ट्रैक्टरों की रैली निकाली थी। उन्होंने अपील की कि किसान अपने ट्रैक्टरों पर किसान क्रांति 2021 लिखें। इससे आप जहां भी जाएंगे, आपका सम्मान किया जाएगा।

किसानों ने 6 फरवरी को 3 राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़ देशभर में चक्काजाम किया। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक किए गए जाम का सबसे ज्यादा असर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में दिखा। इस जाम के बाद 40 किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा के नेता दर्शनपाल के एक बयान ने किसान संगठनों की फूट को उजागर कर दिया।

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