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राजीव गांधी ने 1985 में भारत के 38वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर झंडा फहराया और कहा…..

आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती है और उस दिन 15 अगस्त 1985 का दिन था,1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव पूर्ण बहुमत से जीतकर देश के प्रधानमंत्री बने थे।
भारत के 38वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए जब उन्होंने लाल किले के प्राचीर पर तिरंगा फहराया तो झंडे से निकली गुलाब की पंखुड़ियों में से एक उनके चेहरे और दो उनके दोनों कंधों पर आ गिरी मानों देश को आधुनिकता की ओर ले जाने वाले अपने सबसे युवा प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत कर रही हो।
झण्डा फहराने के उपरांत राष्ट्रगान को ध्वनि बजी, वहां उपस्थित सभी लोगों के हृदय में देशभक्ति की वो लहर जग उठी जिसका सार वो अपने नव प्रधानमंत्री से प्राचीर के भाषण पर सुनना चाह रहे थे।
 राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से अपना पहला भाषण दिया और कहा,’ देशवासियों, आज भारत की 38वीं वर्षगाँठ है। मैं भारत के हर नागरिक को शुभकामनाएं देना चाहता हूं, हर गांव में, हर शहर में, हमारे किसान, हमारे मजदूर, हमारी मातायें, हमारी बहनें, भारत के मर्द, भारत के बच्चे को, भारत की फौज को और हर हिंदुस्तानी को जो विदेश में रह रहे हैं।
38 साल पहले पंडित जी ने यहां पहली बार तिरंगा झंडा लहराया था। आज इन्दिरा जी को यहां होना था पर वो हमारे हाथ से छिन गईं। अब आपने मुझे ये जिम्मेदारी सौंपी है।
मैंने आज़ादी की लड़ाई तो नहीं देखी है, मैं बहुत छोटा था। मैं तीन साल का भी नहीं था जब यहां पहली बार झंडा लहराया गया था। आज भारत में 2/3 निवासी मेरे जैसे ही हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई नहीं देखी है। एक दूसरी पीढ़ी आगे आयी है।
जैसे हिमालय, गंगा, डेक्कन,अजंता, ताजमहल, महाबलेश्वर, भारत की कलाओं में, भारत के दार्शनिक खोजों में, भारत के विज्ञान शास्त्रों में वैसे ही आज़ादी की लड़ाई में हमारी विरासत है।
आज किसका दिल गौरव से नहीं भरता जब हम बुद्ध का, कबीर का, नानक का, गांधी जी का सोचते हैं, उनकी कुर्बानियां, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियां।
जो नया रास्ता हमने चुना है, सत्य का, अहिंसा का, जब हम इन बातों को सोचते हैं, हम गर्व से भर जाते हैं।
पिछले 38 सालों में हमने बहुत तरक्की करी। इन सालों में हमने करीब 63% जनता को गरीबी रेखा से ऊपर उठा दिया है। इन सालों में भारत में एक नया वर्ग मध्यमवर्ग सामने आया है। हम अनाज पर आत्मनिर्भर हुए हैं। हमारे विज्ञान, हमारी टेक्नोलॉजी, हमारी विदेश नीति, हमारा लोकतंत्र, हमारी आजादी और हमारी धर्मनिरपेक्षता, यह सब बातें हम बढ़ा पाए हैं, बना पाए हैं। इसे पूरी दुनिया आज आश्चर्य से देखती है कि कैसे एक विकासशील देश ये बातें कर पाया है, और हमने किया है तीन-चार बड़े युद्धों का सामना करके, हमें किया है,भारत की अखंडता एवं एकता को बचाकर। हम कर पाए हैं क्योंकि गांधी जी ने, पंडित जी ने और इंदिरा जी ने हमें ठीक रास्ते पर रखा लेकिन ये रास्ता अभी भी बहुत लंबा है, बहुत कठिन है………………..
हमें वचन लेना चाहिये कि अपना जीवन भारत के लिए ,भारत को मजबूत करने में समर्पित करें, भारत के लिए और भारत के सिद्धांतों के लिए।
हम चलें, हाथ मिलाकर चलें, तेज़ी से चलें, हमारे लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें।
आप सभी को दुबारा स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनाएं। मेरे साथ मिलकर बोलिये,जय हिंद,जय हिंद………

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