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‘राजीव रत्न बृजेश गांधी’ जब पैदा हुए तो नेहरू जेल में थे और …

राजीव गांधी, जिनकी कहानी तभी से शुरू हो गयी थी जब इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरू एक आंदोलन के दौरान बेहोश हो गयी थीं और उन्हें एक 18 साल के लड़के ने उठाया था। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि फिरोज जहांगीर गांधी थे। इसके बाद फिरोज का नेहरू अपरिवार में आना जाना शुरू हो गया था और कमला नेहरू से प्रभावित होकर फिरोज भी स्कूलों के लिए चलाये जा रहे मुहिम में शामिल हो गए। धीरे-धीरे वो स्वतंत्रता आंदोलन में नेहरू परिवार के काफी करीबी हो गये। तब इंदिरा गांधी महज़ 13 साल की थीं।
एक वक्त के बाद दोनों अच्छे दोस्त बन गए और एक दिन मौका देखकर फिरोज ने इंदिरा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा पर इंदिरा ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
उसके बाद दोनों पढ़ने के लिये विदेश चले गए। इस बीच 28 फरवरी 1936 को कमला नेहरू की महज 37 वर्ष की आयु में लम्बी बीमारी के बाद मृत्यु हो गयी। जिसके 6 साल बाद फिरोज ने एक बार फिर इंदिरा को पेरिस में शादी के लिए कहा, इस बार इंदिरा ने हां कह दिया। उस वक्त इंदिरा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ती थीं और  फिरोज लंदन इकोनॉमिक कॉलेज में पढ़ते थे।
इंदिरा जब वापस भारत आईं तो उन्होंने जवाहर लाल नेहरू से फिरोज से शादी की बात कही, उस वक्त नेहरू जेल में थे। पर उन्होंने इस रिश्ते को सिर्फ मंजूरी ही नहीं दी बल्कि जेल में ही इंदिरा के लिए गुलाबी साड़ी बुनी, जिसे इंदिरा ने अपने शादी के दिन पहना था।
26 मार्च 1942 को एक पारसी युवक फिरोज और एक कश्मीरी युवती इंदिरा, विवाह सूत्र में बंध गये। अब इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरू, इंदिरा गांधी बन चुकी थीं। 20 अगस्त 1944 को बम्बई के सिरोजकर क्लीनिक में राजीव का जन्म हुआ।
 राजीव गांधी के जन्म के दौरान भी नेहरू जेल में थे। अपने नवासे की ख़बर सुनकर व्व बहुत खुश थे, उन्होंने उसका नाम रखा राजीव रत्न बृजेश गांधी।
उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से राजीव से मिलने की इच्छा जाहिर की पर अफसरों ने उन्हें स्वीकृति नहीं दी।
एक चिट्ठी में जब इंदिरा को पता चला कि नेहरू अहमद नगर फोर्ट से बरेली जेल जाते हुए एक दिन के लिए इलाहाबाद की नैनी जेल में रुकेंगे तो वो जेल के बाहर ही नन्हे राजीव को अपनी गोद मे लेकर फिरोज के साथ खड़ी होकर नेहरू के गाड़ी का इंतज़ार करने लगी।
रात में लंबे इंतजार के बाद जब नेहरू को लेकर पुलिस आयी तो इंदिरा ने राजीव को गोद में उठाकर नेहरू को दिखाया। धुंधली रोशनी में गाड़ी के अंदर से ही नेहरू ने अपने नवासे को देखा।
राजीव तीन साल के थे जब वो जब वे अपनी मां के साथ त्रिमूर्ति घर में अपने नाना के साथ रहने के लिए आये। फिरोज लखनऊ में ही रुक कर नेशनल हेराल्ड अख़बार को संभाल रहे थे। 8 सितंबर  1960 को फिरोज की हृदय आघात की वजह से मौत हो जाती है और अब राजीव के परिवार में उनकी मां, नाना और भाई ही बचते हैं। जिनके साथ वो देश की धड़कन को पढ़ने की कोशिश करते हैं।
राजीव 20 साल के थे जब नेहरू मरे। राजीव उन्हें याद करते हुए बताते थे कि वो नेहरू ही थे जो उन्हें हमेशा एक नई सीख सिखाते  थे, वो उनके साथ ही ग्लाइडर क्लब गए थे जहां उन्होंने जहाजों के उड़ान से प्यार किया और फिर जहाजों के साथ उड़ने लगे। जल्द ही उन्हें कमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी मिल गया और वो को पायलट के तौर पर काम करने लगे।
राजीव और सोनिया ने 25 फरवरी 1968 में शादी की। हवाई जहाज और कार चलाने के साथ साथ वो एक बेहतरीन छायाकार भी थे। राजीव के जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन 23 जून 1980 को एक दर्दनाक घटना होती है, एक जहाज दुर्घटना में राजीव अपने छोटे भाई संजय को खो देते हैं।
इतिहास अपने आप को दोहराता है जिस तरह कमला नेहरू के मरने के बाद जवाहर ने इंदिरा में राजनीतिक भविष्य देखा उसी तरह  ३३ साल बाद संजय के मरने के बाद इंदिरा ने राजीव को जिम्मेदारी लेने को कहा।
जब दुनिया ने राजीव गांधी को पहली बार देखा तो वह शोक में डूबे हुए थे। 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी की मां , इंदिरा गांधी को हत्यारों ने 16 गोलियों से लहूलुहान कर दिया था। सोनिया ने अपने एक नौकर को कहा ये गोली की आवाज है या पटाखे की ,पता करके आओ।उसने जब आकर बताया कि इंदिरा गांधी को गोलियों से भूना गया है तो सोनिया चिल्लाते हुए दौड़ी और इंदिरा गांधी को गोद मे लेकर मेडिकल हॉस्पिटल पहुंची जहां इंदिरा गांधी को मृत घोषित कर दिया गया था। सोनिया स्तब्ध थीं और वो कई सालों तक इस दुःख ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया था। अंतिम संस्कार के वक्त इंदिरा की चिता को आग लगाने के बाद जिस व्यक्ति की आंखों ने अग्नि की लपटों को देखते हुए पहाड़ सी पीड़ा को अपने अंदर छुपा लिया था वो व्यक्ति थे राजीव गांधी। जिन्हें उनके परवरिश के दौरान ये सिखाया गया था कि अपना सम्पूर्ण जीवन देश को समर्पित करना है और व्यक्तिगत तकलीफों का घूंट पीना है, उसको किसी से नहीं दिखाना है।
राजीव गांधी ने एक साक्षात्कार के  दौरान इंदिरा गांधी के बारे में कहा था,” आप जानते हैं,उनका सपना एक अखंड एवं खुशहाल भारत का था। एक ऐसा विशाल परिवार जहां कोई जातिवाद और भेदभाव न हों। मैं अपने कार्यों से अपने नाना और अपनी मां के अधूरे सपनों को पूरा करने की कोशिश करता हूँ।”
इंदिरा गांधी की हत्या की घटना ने राजीव को जीवन के एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।

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