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राजस्थान कांग्रेस में फैलता रायता

राजस्थान में पिछले दिनों भारी कशमकश के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सचिन पायलट समर्थक विधायकों को मंत्री तो बना दिया लेकिन इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात इतने खराब हो चले हैं कि मुख्यमंत्री गहलोत पायलट समर्थक मंत्रियों से संवाद तक नहीं कर रहे हैं। दोनों ही धड़ों के मध्य चल रही कोल्ड वार बंद कमरों तक सिमटी रहने के बजाए सार्वजनिक तौर पर लड़ी जाने लगी है। गत् चार दिसंबर को गहलोत के सरकारी आवास में पार्टी के पदाधिकारियों और मंत्रियों की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कांग्रेस के संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और राजस्थान के प्रभारी अजय माकन भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री गहलोत ने इन राष्ट्रीय नेताओं की उपस्थिति में ही पायलट कैंप के मंत्रियों पर तंज कस डाला। उन्होंने बाकायदा ऐसे मंत्रियों का नाम लेते हुए कहा कि ‘रमेश मीणा, विशवेन्द्र सिंह और हेमा राम चौधरी तो हमें छोड़ चले गए थे। अगर कांग्रेस के 80 विधायक एकजुट न रहते और बसपा विधायक पार्टी में शामिल न होते, और यदि निर्दलीय विधायक हमें समर्थन नहीं देते, तो आज हम वहां मीटिंग करने लायक नहीं होते।’ गहलोत का इशारा सचिन कैंप की बगावत को लेकर था जिस चलते राज्य में कांग्रेस की सरकार के गिरने की नौबत आ गई थी। मुख्यमंत्री के व्यंग्य बाण से तिलमिलाए एक मंत्री मुरारी लाल मीणा ने भरी सभा में मुख्यमंत्री गहलोत को रोकते हुए कह डाला कि इस प्रकार की बातें बार-बार करना उन्हें शोभा नहीं देता है। कांग्रेसी सूत्रों की मानें तो गहलोत ने जानबूझ कर पार्टी के केंद्रीय नेताओं की उपस्थिति में यह बात कही ताकि कांग्रेस आलाकमान तक उनकी नाराजगी पहुंच जाए। दरअसल गहलोत किसी भी सूरत में बागी विधायकों को मंत्री नहीं बनाने पर अड़े थे। राहुल और प्रियंका गांधी के भारी दबाव में मंत्रिमंडल का विस्तार करने को मजबूर हुए गहलोत अभी तक सहज नहीं हो पाए हैं। यही कारण है कि पायलट समर्थक मंत्रियों को उन्होंने खास मंत्रालय आवंटित न कर, सभी महत्वपूर्ण मंत्रालय अपने पास ही रखे हैं। सचिन पायलट अब सीएम पर अपने मंत्री न बनाए जा सके विधायकों को अन्य तरीकों से एडजस्ट करने का दबाव बना रहे हैं। वे चाहते हैं कि ज्यादा-से-ज्यादा विधायकों को सरकारी निगमों का प्रमुख बनाया जाए। गहलोत लेकिन ज्यादा एडजस्टमेंट के लिए तैयार नहीं हैं। इससे नाराज सचिन ने 4 दिसंबर की बैठक में कह डाला कि 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी बगैर कोई सीएम चेहरा घोषित करे, मैदान में उतरेगी। उनका इशारा साफ था कि गहलोत के चेहरे पर अगले चुनाव नहीं लड़े जाएंगे। इससे गहलोत खेमे में भारी नाराजगी पसरने की खबर है। राजस्थान कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो सचिन हर कीमत पर सीएम बनने को लालायित हैं। उनका प्रयास 2023 के चुनावों से कुछ समय पहले गहलोत के स्थान पर मुख्यमंत्री बनने का है ताकि उनके चेहरे को आगे रख कांग्रेस चुनावी समर में उतरे। गहलोत ने इसके जवाब में स्पष्ट कह डाला है कि अगले चुनाव बाद यदि सरकार बनी तो वे ही मुख्यमंत्री होंगे। कुल मिलाकर राजस्थान कांग्रेस में पार्टी आलाकमान के लाख प्रयास बाद भी पायलट बनाम गहलोत का मुद्दा शांत होता नजर नहीं आ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जाएंगे, यह मुद्दा ज्यादा गंभीर होता जाएगा जिसका खामियाजा अंततः कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा।

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