[gtranslate]
Country

कभी नहीं होगा रेलवे का  निजीकरण,  रेल मंत्री पीयूष गोयल

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रेलवे के विस्तार के लिए सरकारी और निजी कंपनियों के बीच भागीदारी की बात कही थी। दुनिया की सबसे बड़ी रेल सेवाओं में से एक भारतीय रेलवे वर्ष 1853 में अपनी स्थापना के समय से सरकार के हाथों में रही है। हालांकि पिछले कुछ सालों में अलग-अलग सरकारें इसके कुछ कामों जैसे कैटरिंग, ट्रेनों के भीतर की सेवाएं और कुछ दूसरे कामों को निजी कंपनियों को सौंपती रही हैं। रेलवे को निजी हाथों में देने को लेकर मोदी सरकार पर विपक्ष आरोप लगाते आया है कि यह सरकार  देश की संपत्तियों को बेच रही है। जिसके बाद सरकार बैकफुट पर दिख रही है। इस सब के बीच केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे भारत की संपत्ति है और रहेगी। रेलवे का कभी निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि रेल यात्रियों को अच्छी सुविधाएं और अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए निजी क्षेत्र का निवेश देशहित में है।

लोकसभा में वर्ष 2021-22 के लिए रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि कई सांसद निजीकरण और कॉर्पोरेटाइजेशन का आरोप लगाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रेलवे का कभी निजीकरण नहीं होगा। सड़कों का उदाहरण देते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सड़कें भी सरकार ने बनाई है। पर, यह नहीं कहता कि इस पर सिर्फ सरकारी गाड़ियां चलेंगी। सड़कों पर सभी तरह के वाहन चलते हैं। इससे प्रगति होती है और लोगों को बेहतर सुविधाएं भी मिलती हैं।

सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे 

पीयूष गोयल ने कहा कि पटरी पर मालवाहक ट्रेन चलें। इसके लिए अगर निजी क्षेत्र क्षेत्र निवेश करता है, तो क्या इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र जब मिलकर काम करेंगे, तभी देश का उज्जवल भविष्य बनाने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि हमें आधुनिक विश्वस्तरीय रेलवे बनाना है, तो बहुत धन की आवश्यकता होगी। पीयूष गोयल ने कहा कि निजी निवेश आता है तो यह देश और यात्रियों के हित में है। निजी क्षेत्र जो सेवाएं देगा, वह भारतीय नागरिकों को मिलेगी।

पिछले सात वर्षों में किए गए कामों का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे में लिफ्ट, एस्केलेटर एवं सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अभूतपूर्व काम किए गए। डेढ़ दो साल में कश्मीर में रेल मार्ग का काम पूरा हो जाएगा। इसके साथ कश्मीर से कन्याकुमारी रेलवे से जुड़ जाएगा।

बंगाल सरकार ने जमीन नहीं दी

पीयूष गोयल ने पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि रेल प्रोजेक्ट के लिए धनराशि देने के बावजूद जमीन नहीं मिली। अब पैसे वापस लेने की कोशिश हो रही है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कई अन्य परियोजनाओं के लिए भी प्रदेश सरकार ने जमीन नहीं दी है।

दूसरी कंपनियों का निजीकरण

रेलवे सिर्फ एक ही सरकारी कंपनी नहीं है जिसका निजीकरण हाल की सरकारों के हाथों होता रहा है। वर्ष 1990-91 के समय से सरकारी कंपनियों को निजी कंपनियों को बेचने की शुरुआत  हुई। प्रक्रिया कांग्रेस, बीजेपी और दूसरी सरकारों के समय में भी जारी रही है और इन सालों के भीतर टेलीफ़ोन कंपनी एमटीएनएल, हिंदुस्तान ज़िंक, भारत अल्युमिनियम और सेंटोर होटल जैसी सरकारी कंपनियों को निजी कंपनियों के हाथों बेचा गया है।

कितना मुश्किल-आसान

आर्थिक विश्लेषक के मुताबिक  एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के टारगेट को ‘बहुत महत्वाकांक्षी’ मानते हैं और कहते हैं कि इस मामले में भी वहीं होगा जोकि पिछली मोदी सरकार या उसके पहले की कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकारों में होता रहा था जहां एक सरकारी कंपनी को दूसरे का शेयर ख़रीदने को बाध्य किया गया जिसके बलबूते सरकार ने अपना विनिवेश का लक्ष्य पूरा होता दिखा दिया।

You may also like

MERA DDDD DDD DD