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भारत के 3 फोटोग्राफर्स को पुलित्जर पुरस्कार, तीनों जम्मू-कश्मीर के निवासी

भारत के 3 फोटोग्राफर्स को पुलित्जर पुरस्कार, तीनों जम्मू-कश्मीर के निवासी

भारत के तीन फोटोग्राफर्स को प्रतिष्ठित ‘पुलित्जर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। तीनों ही पत्रकार जम्मू-कश्मीर राज्य के निवासी हैं। यासीन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद को फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें ये सम्मान पिछले साल घाटी में आर्टिकल 370 हटाए जाने के दौरान कवरेज के लिए दिया गया है। उसी दौरान की तस्वीरों के लिए तीनों को ‘पुलित्जर पुरस्कार’ सम्मानित किया गया है। ये सभी न्यूज एजेंसी असोसिएटेड प्रेस (एपी) के लिए काम करते हैं।

यासिन और मुख्तार श्रीनगर में रहते हैं, जबकि आनंद जम्मू जिले के निवासी हैं। आनंद पुरस्कार जीतने पर बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, “मैं आश्चर्यचकित हूं। मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है।” सोमवार को देर रात इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हुई। इन तीनों ने घाटी के सामान्य जनजीवन के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की तस्वीरों को भी दुनिया तक पहुंचाया।

पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाले पुलित्जर पुरस्कार के विजेताओं के नाम की घोषणा 20 अप्रैल को किया जाना था। लेकिन कोरोना वायरस की वजह से स्थगित कर दिया गया था। इस संदर्भ में पुलित्जर पुरस्कार देने वाली संस्था ने कहा था कि उस वक्त ज्यादातर पत्रकार महामारी की रिपोर्टिंग करने में लगे हुए थे।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘एंकरेज डेली न्यूज’, ‘प्रो पब्लिका’ को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पुलित्जर पुरस्कार उन्हें दिया गया जिन्होंने भ्रष्टाचार, कानून प्रवर्तन और अमेरिका में नस्लवाद जैसे मुद्दे को उजागर किया। इन तीनों को इन्हीं मुद्दें पर रिपोर्ट के लिए पुरस्कार मिले हैं।

पिछले साल 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में संशोधन किया था। इसके बाद पूरे प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था। लोग जब इसके खिलाफ प्रदर्शन के लिए उतरे तो महीनों तक कर्फ्यू लगा दिया गया। फ़ोन के साथ-साथ इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई। तब ये पत्रकार वहां की स्थिति की तस्वीर को उजागर किये। यह सम्मान पत्रकारों के लिए बहुत खुशी की बात है।

पुरस्कार बोर्ड के प्रशासक डाना कैनेडी ने यूट्यूब पर लाइवस्ट्रीम के माध्यम से विजेताओं की घोषणा की। न्यूयॉर्क टाइम्स टाइम्स को तीन, वहीं द न्यूयॉर्कर को दो और प्रो पब्लिका की झोली में एक अवार्ड आए।

द टाइम्स को तीन अवॉर्ड मिले, जिनमें ब्रायन एम. रोसेंथल की न्यूयॉर्क शहर के टैक्सी उद्योग में खोजी रिपोर्ट भी शामिल है। उस रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कैसे कमजोर ड्राइवरों का लाभ उठाकर लोन का बाजार फल रहा है। वहीं दूसरी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासन की कहानियों की एक श्रृंखला के लिए अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कार दिया गया।

अलास्का में यौन हिंसा की पड़ताल करती इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स के लिए ‘एंकरेज डेली न्यूज’ और ‘प्रो पब्लिका’ को संयुक्त रूप से सबसे प्रतिष्ठित माना जाने वाला पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा, ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’, ‘असोसिएटेड प्रेस’, ‘द लॉल एंजिलिस टाइम्स’, ‘द बाल्टिमोर सन’, ‘द फीलिस्तीन हेराल्ड प्रेस’ को भी अलग-अलग खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रॉयटर्स ने हांगकांग के विरोध प्रदर्शन की तस्वीरों के लिए ब्रेकिंग न्यूज फोटोग्राफी पुरस्कार जीता।

पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी पुरस्कार से सम्मानित भारतीय पत्रकारों पर लोग गर्व कर रहे हैं। चारों तरफ से उन्हें बधाई दी जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार युसूफ जमील ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के पत्रकारों के लिए यह गर्व की बात है।

वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों के लिए यह साल मुश्किल रहा और पिछले 30 साल को देखते हुए यह कह पाना आसान नहीं है। यासिन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद को प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए शुभकामनाएं।”

बता दें कि पुलित्जर पुरस्कार की शुरुआत 1917 में की गई थी। यह अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है, जो समाचार पत्रों की पत्रकारिता, साहित्य एवं संगीत रचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को दिया जाता है। पिछले साल यह पुरस्कार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार से संबंधित जानकारियां सामने लाने के लिए दिया गया था।

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