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प्रियंका गांधी UP के दौरे पर, CAA-NRC प्रदर्शनकारियों से करेंगी मुलाकात

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। वह आज आजमगढ़ गईं और वहां के लोगों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी सीएए और एनआरसी के खिलाफ कर रहे प्रदर्शन वालों से भी मिलेगी। प्रियंका बिलरियागंज में रहने वाले ओसामा के घर भी जाएंगी। ये वही ओसामा है जिसके घरवालों को आज़मगढ़ पुलिस ने सीएए का विरोध करने पर बहुत प्रताड़ित किया था। आपको बता दे कि दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर लखनऊ के घंटाघर में लोगों ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

लखनऊ के घंटाघर में प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में 19 लोगों को जेल भी भेजा गया है। वह दिल्ली से सीधे वाराणसी के रास्ते आज़मगढ़ पहुंची।  इससे पहले भी यूपी में सीएए की खिलाफत करने के कारण मुकदमा झेल रहे लोगों से प्रियंका गांधी मिल चुकी हैं। वो मेरठ, बिजनौर और लखनऊ का दौरा पहले भी कर चुकी हैं।

 

कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को साफ कह दिया है कि जितना हो सके उतना समाजवादी पर हमला करो। वह ऐसा उस पार्टी के साथ हो रहा है जिसके साथ मिलकर पिछली बार का विधानसभा की रैलियां की थीं। यूपी को साथ पसंद है। जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव  एक ही गाड़ी पर  साथ-साथ चुनावी प्रचार में निकले थे। लेकिन, अब कांग्रेस को लगने लगा है कि उसके वोट बैंक भाजपा से ज्यादा सपा और बसपा ने हथिया रखा है। आंकड़े भी यही बताते हैं।  जैसे-जैसे सपा और बसपा का ग्राफ यूपी में बढ़ता गया वहीं कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरता गया। 1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अविभाजित यूपी की 425 सीटों में से 413 पर चुनाव लड़ी थी।

इसमें उसे 17.59 फीसदी वोट मिले जबकि जनता दल को 21 फीसदी और बसपा को महज 10.26 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव तक कांग्रेस को अपर हैण्ड था। लेकिन, समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने के साथ ही कांग्रेस खत्म होते चली गई। 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में भी कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17 से 15 फीसदी रह गया था।

1996 में पार्टी को थोड़ा सहारा मिला पर  21 वीं सदी के आते आते यूपी में कांग्रेस का दम निकल गया। 2002 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर महज 8.99 फीसदी रह गया जबकि सपा का बढ़कर 26.27 फीसदी और बसपा का 23.19 फीसदी पहुंच गया। तब से लेकर आज तक कांग्रेस 10 फीसदी वोट शेयर के आसपास ही घिसती चली आ रही है।

कांग्रेस तो यूपी से 1990 के बाद से ही खत्म होती चली गई लेकिन जब तक उत्तराखण्ड अलग राज्य नहीं बना था तब तक वहां से मिले वोट उसके वोट शेयर को बढ़ाते रखते थे। जैसे ही उत्तराखण्ड अलग राज्य बना कांग्रेस यूपी में एकदम हवा हवाई दिखने लगी।

इस बात को पिछले साल कांग्रेस मुख्यालय में हुई एक बड़ी मीटिंग में भी बड़े नेताओं ने इंगित किया था। तब मंच से निर्मल खत्री और पीएल पूनिया ने कहा था कि भाजपा से ज्यादा उसका मुकाबला सपा और बसपा से होना चाहिए। अब कांग्रेस की नयी टीम इसी एजेण्डा पर जुट गई है।

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