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प्रीतम हुए अप्रितम-हरदा हुए खास, रावत पर कांग्रेस की आस

 ”महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन को घाव लगते थे तो उनके विरोधी बहुत रोमांचित होते थे। वैसे ही राजनीतिक जीवन की शुरुआत में मुझे घाव दर घाव लगे, कई-कई हारें झेली, मगर मैंने राजनीति में न निष्ठा बदली और न रण छोड़ा।” उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने मन की यह बात कहने के साथ ही 2024 में राजनीति से सन्यास लेने की भी इच्छा व्यक्त की है। लेकिन इसके लिए उन्होंने शर्त भी रखी है। वह यह कि 2024 में जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे तभी वह पॉलटिक्स को बॉय – बॉय करेंगे। मतलब साफ है कि अगर किन्ही परिस्थितियों में राहुल गांधी 2024 में देश के पीएम नहीं बने तो हरीश रावत 2029 तक भी सक्रीय राजनीति का हिस्सा बने रहेंगे। 70 साल की उम्र पार करने के बाद भी जवान लोगो की तरह भाग दौड़ कर रहे हरीश रावत की इस समय कांग्रेस हाईकमान की नजरो में बहुत अहमियत है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस सुप्रीमो ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ ही सीडब्ल्यूसी का सदस्य बनाया। यही नहीं बल्कि जो लोग कह रहे थे कि रावत से असम के स्थानीय नेताओ के विरोध के चलते प्रदेश का प्रभार छीना गया, उनकी उस समय बोलती बंद हो गयी जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया।

रावत होंगे सीएम फेस, गोदियाल प्रदेश अध्यक्ष रेस में आगे 


इसी दौरान दिल्ली दरबार से जो संकेत मिल रहे है उसके अनुसार पार्टी हाईकमान 2022 में उनपर उत्तराखंड में दांव लगाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी सूत्र बता रहे है कि उत्तराखंड में 2022 का चेहरा हरीश रावत ही होंगे। जबकि प्रदेश के मुखिया प्रीतम सिंह को साइड किए जाने की खबरें है। क्योकि 2022 के विधानसभा चुनावो में महज एक साल ही रह गया है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेश को उनके पद पर ही बने दिया जाने का निर्णय लिया जा सकता है। क्योंकि उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल को साधकर चलना होता है। ऐसे में एक महत्वपूर्ण पद कुमाऊं से तो दूसरा गढ़वाल के नेता को देकर बैलेंस किया जाता है। देश की दोनों प्रमुख पार्टी भाजपा और कांग्रेस अब तक ऐसा ही करती आई है। ऐसे में अगर कांग्रेस 2022 का चेहरा हरीश रावत को बनाती है तो निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण पद गढ़वाल के नेता की झोली में जायेगा।
उत्तराखंड कांग्रेस की स्थिति को देखे तो फ़िलहाल हरीश रावत का प्रीतम सिंह गुट प्रबल विरोधी हो चला है। जिसके मद्देनजर कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी भाजपा से लड़ने की बजाय अंदरखाने अपनी ही पार्टी से लड़ती प्रतीत हो रही है। जिसका फायदा भाजपा सरकार को मिल रहा है। इसके मद्देनजर ही कांग्रेस आलाकमान इस बार प्रीतम सिंह को हटाकर अध्यक्ष पद पर किसी ऐसे नेता को बिठाना चाहता है जो रावत गुट का ही हो और उनके साथ तारतम्य बिठाकर संगठन को आगे बढ़ाने का काम कर सके। इसके लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है। जिनमे पूर्व विधायक गणेश गोदियाल का नाम चर्चाओं में है। गोदियाल को रावत कैम्प का नेता माना जाता है।
यहां यह भी बताना जरुरी है कि हरीश रावत एक ऐसे खांटी नेता है जो अपने धुर विरोधियो को प्यार की थपकी देते – देते उसी हाथ से कब चंपत लगा देते है, इसका पता उनके दूसरे हाथ को नहीं लगता है। पूर्व में जब प्रदेश के प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह अंदरखाने हरीश रावत के विरोधी गुट की तरफ झुकते दिखे तो 10 जनपथ से रावत ने उनका पत्ता साफ करा दिया। तब रावत पार्टी हाईकमान को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि प्रभारी द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है।जिसके चलते ही प्रदेश कांग्रेस दो गुटों में नजर आने लगी थी। इसके बाद प्रदेश का नया प्रभारी बना तो पार्टी प्रमुख ने हरीश रावत की पसंद को ही प्रमुखता दी। गौरतलब है कि उत्तराखंड कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी देवेंद्र यादव हरीश रावत के करीबी बताए जाते हैं । दोनों की अच्छी दोस्ती रही है। उत्तराखंड में प्रभारी हरीश रावत की पसंद का नियुक्त करने के पीछे पार्टी हाईकमान की सोच यह रही है कि रावत की मिशन 2022 की राह में कोई विघ्न सामने ना आए।

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