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फेल होती प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

आज भारतीय जनता पार्टी अपना 41वां स्थापना दिवस मना रही है, पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने बीजेपी द्दारा लाई गई नीतियों की उपलब्धियां बताई। लेकिन क्या किसी भी सरकार द्दारा लाई गई नीतियां धरातल पर खरी उतरती है? इसका जवाब मिलना नामुमकिन। इस समय देश के कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल रहे है तो दूसरी तरफ किसान आंदोलन। खुद को किसान हितैषी पार्टी बतानी वाली बीजेपी ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल जीवन बीमा योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत कहा गया है कि बारिश, ओले, प्राकृतिक आपदाओं के तहत किसी किसान की फसल खराब हो जाती है तो उसे उसकी फसल का बीमा दिया जाएगा। बकायदा किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत उसकी फसल का बीमा हुआ हो।

लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सरकारी आकड़े कुछ ओर ही स्थिति दर्शाते है। कृषि एंव किसान कल्याण मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 से 2019-20 के बीच छोटे स्तर पर हुए नुकसान को लेकर किसानों द्वारा दायर किए गए कम से कम 13.03 लाख दावों को खारिज किया गया है। इस दौरान किसानों ने सरकारी एवं प्राइवेट कंपनियों के सामने कुल 1.02 करोड़ दावे दायर किए थे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 18 बीमा कंपनियां काम कर रही हैं। जिनमें पांच सरकारी 12 प्राईवेट और एक जांइट वेंचर कंपनी शामिल है। प्राइवेट कंपनियों के अंतर्गत 22.56 लाख दावे दायर किए गए थे, इनमें से 9.87 लाख दावो खारिज किए गए। वहीं सरकारी कंपनियों में 54.53 लाख दावे दायर थे, जिसमें से 3.16 लाख दावों खारिज हुए। जांइट वेंचर कंपनी एसबीआई जनरल, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस कंपनी में 25.35 लाख दावे दायर हुए, इस कंपनी ने सभी का भुगतान किया।

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द वायर की खबर के अनुसार यदि राज्यों के आकड़ों के अनुसार देखें तो छोटे स्तर पर हुए नुकसान के चलते किसानों द्दारा दायर किए गए दावे सबसे ज्यादा राजस्थान के खारिज हुए। यहां 2017-18 से 2019-20 के बीच बीमा कंपनियों ने कुल 3,84,017 दावों को खारिज किया है। इसमें से 3,61,984 दावे, साल 2019-20 में ही खारिज किए गए थे। इसके बाद दूसरे नंबर पर गुजरात है, जहां 2018-19 और 2019-20 में बीमा कंपनियों ने किसानों के 2,78,376 दावों को खारिज किया था। इसमें से 2,74,466 दावे सिर्फ 2019-20 में खारिज किए गए। तीसरे नंबर पर हरियाणा है, जहां बीमा कंपनियों ने तीन सालों में 1,96,795 फसल बीमा दावों को खारिज किया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत काम करने वाली सरकारी कंपनियों में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (एआईसी), यूनाइटेड इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी शामिल है। प्राइवेट कंपनियों में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बजाज आलियांज, भारती एक्सा, चोलामंडलम एमएस, फ्यूचर जनराली, एचडीएफसी एर्गो, टाटा एआईजी, रिलायंस जनरल इत्यादि शामिल हैं। सभी कंपनियों को मिलाकर सबसे ज्यादा एचडीएफसी ने ही फसल बीमा योजना के दावे खारिज किए है। हालांकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में पेश किए गए एक लिखित जवाब में दावा किया है कि बीमा कंपनियां विभिन्न आधार जैसे की दावे के बारे में देरी से बताने, नुकसान न होने इत्यादि के आधार पर दावों को खारिज किया जा सकता है।

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