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ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर बीपीएल और अंत्योदय योजना के फर्जी राशन कार्ड बनवाए जाने का गोरखधंधा अपने पूरे चरम पर है। कार्ड को बनवाने के लिए अपात्र लोग मुहमांगी कीमत चुका रहे हैं जबकि अधिकतर पात्र लोगों के नाम सूची से गायब हैं। इस गोरखधंधे का संचालन किसके हाथ में है, इसका खुलासा तो सघन जांच के उपरांत ही दावे के साथ किया जा सकता है लेकिन जहां तक ग्रामीण स्तर पर इन कार्डो को बनवाए जाने की बात है तो इसमें ग्राम प्रधान से लेकर पंचायत सचिव तक की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। सुविधा सम्पन्न लोग सस्ता खाद्यान्न पाने के लिए वन टाइम इंवेस्टमेंट सोंचकर कार्ड बनवाने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर पंचायत सचिव तक की परिक्रमा कर रहे हैं और मुहमांगी कीमत चुका रहे हैं। यह हाल यूपी की राजधानी लखनऊ की तहसील मोहनलालगंज के गांवों का हैं, अन्य जनपदों के ग्रामीण अंचलों का हाल क्या होगा! सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 
खाद्य एवं रसद विभाग की स्थापना के समय से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का प्रारम्भ हुआ था, जिसके अन्तर्गत नियंत्रित दरों पर प्रदेश के उपभोक्ताओं को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में 1 मई 1990 से नवीनीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का शुभारम्भ किया गया, जिसके अन्तर्गत अत्यन्त पिछड़े इलाके में रहने वाले गरीब उपभोक्ताओं को नियत्रित दरों से अपेक्षाकृत कम दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भारत सरकार के दिशा निर्देश सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं नवीनीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समाप्त करते हुए दिनांक 1 जून 1997 से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू की गयी। जिसके अन्तर्गत बी0पी0एल0, अन्त्योदय अन्न योजना, अन्नपूर्णा तथा ए0पी0एल0 योजनायें शामिल हैं।
भारत सरकार द्वारा प्रदेश के लिए गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की अधिकतम संख्या 106.79 लाख निर्धारित की गई है और इनमे से निर्धनतम से निर्धन 40.945 लाख अन्त्योदय परिवारों और 65.84 लाख बी0पी0एल0 परिवारों की संख्या निर्धारित की गयी है। प्रदेश में निर्धारित अधिकतम परिवारों के अनुरूप बी0पी0एल0 परिवारों एवं अन्त्योदय परिवारों का चिन्हांकन किया जा चुका है एवं चिन्हित किये गये बी0पी0एल0 परिवारों/अन्त्योदय परिवारों को राशन कार्ड भी जारी किये जा चुके हैं। बी0पी0एल0 योजना के अन्तर्गत सफेद रंग के, अन्त्योदय योजना में गुलाबी रंग के एवं ए0पी0एल0 योजना में पीले रंग के राशन कार्ड जारी किये गये हंै। ए0पी0एल0 कार्ड धारक को लेवी चीनी उपलब्ध नहीं करायी जाती है। बी0पी0एल0 कार्ड धारक को गेहूँ रू0 4.65 प्रति किग्रा0 एवं चावल रू0 6.15 प्रति किग्रा0 की दर पर उचित दर विक्रेता के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा बी0पी0एल0 कार्ड धारक को 700 ग्राम चीनी प्रति यूनिट रू0 13.50 की दर से उपलब्ध कराई जाती है तथा एल0पी0जी0 कनेक्शनधारी राशन कार्ड धारकों को 3 लीटर मिट्टी का तेल प्रति माह तथा एल0पी0जी0 कनेक्शन विहीन कार्ड धारकों को 5 लीटर मिट्टी का तेल निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है। अन्त्योदय कार्ड धारक को गेहूँ रू0 2.00 एवं चावल रू0 3.00 प्रति किग्रा की दर पर उचित विक्रेता के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।
विगत वर्ष जुलाई 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुरूप राज्य के सभी जिलों में सांसद एवं विधायकों ने विशेष अभियान के तहत बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन के दस्तावेज बांटे। भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की लालसा ने अमीरों को भी कागजों में गरीब बना दिया। गरीब बनाने के लिए भी अमीरों से मोटी रकम वसूली गयी।
बीपीएल, अन्त्योदय और एपीएल राशन कार्ड के फर्जीवाडे़ से सम्बन्धित प्राप्त दस्तावेज इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि राजधानी लखनऊ के ग्रामीण अंचलों में फर्जी राशन कार्ड बनाए जाने का धंधा अपने चरम पर है। ऐसा नहीं है कि जानकारी सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को न हो, जानकारी सभी को है लेकिन रिश्वत की परम्परा का निर्वहन ठीक ढंग से किए जाने के कारण अधिकारी भी तमाम शिकायतों के बावजूद कानों में रुई डाले बैठे हैं।
ग्राम पंचायत देवती की अपग्रेडेट सूची में 200 परिवार बीपीएल कार्ड धारक के रूप में दर्शाए गए हैं। यानी गरीबी रेखा से नीचे का जीवन यापन करने वाले लोग। अब कुछ उदाहरण भी देखिए जो यह साबित करते हैं कि अधिकतर बीपीएल कार्ड धारक फर्जी हैं, जिन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वन टाइम इनवेस्टमेंट की तर्ज पर कागजोें में स्वयं को गरीबी रेखा से नीचे दर्शा रखा है।
कार्ड संख्या 215740173780 पर दर्ज नाम सुन्दारा देवी पत्नी सुखई कोटेदार के भाई की पत्नी हैं। कार्ड में परिवारिक सदस्यों की संख्या 5 दर्शायी गयी है। 30 अगस्त 2015 में इनका नाम पात्रता सूची में शामिल किया गया था। इनका परिवार गांव के सम्पन्न परिवारों में शुमार है फिर भी बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में नाम शामिल है। बीपीएल कार्ड संख्या 215740173788 पर दर्शन तिवारी का नाम है। ये जीआरपी से सेवानिवृत्त और गांव के सम्पन्न लोगों में गिने जाते हैं, इसके बावजूद 7 सदस्यों वाला यह परिवार गरीबी रेखा से नीचे का जीवन यापन करने वालों की सूची में शामिल है। ये जादूगरी कैसे सम्भव हो गयी! इसका जवाब तो गांव के प्रधान और पंचायत सचिव ही दे सकते हैं। इसी तरह से ग्राम देवती निवासी अमरीक कुमार सरपंच का लड़का है। इनका और इनकी पत्नी आरती का नाम बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल है। प्रमाण के तौर पर इनका बीपीएल कार्ड संख्या 215740361503 है। ये भी अगस्त 2015  से गरीबों के लिए चलायी जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते चले आ रहे हैं। रणवीर सिंह का 4 सदस्यीय परिवार भी बीपीएल कार्ड (कार्ड संख्या 215740361525) धारकों की सूची में शामिल है। जानकर हैरत होगी कि बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल परिवार का मुखिया पूर्व प्रधान रह चुका है। गांव में कई बीघा खेतिहर जमीन है। सुविधा सम्पन्न पूर्व प्रधान किस तरह से बीपीएल कार्ड धारकों की सूची में शामिल हो गया! जांच का विषय है। इसी तरह से कार्ड नम्बर 215730235235 में अंकित सालिगराम वार्ड नम्बर-5 के पंच हैं। परिवार में 9 सदस्य हैं। गांव में कई बीघे खेतिहर जमीन है। वाहन है, फिर भी कागजों में इनके परिवार का नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की सूची में शामिल है। बीपीएल कार्ड (संख्या 215730235258) धारक अरविन्द कुमार 10 बीघा जमीन के स्वामी हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता के साथ ही होमगार्ड विभाग में भी कार्यरत हैं फिर भी 5 सदस्यों का यह परिवार पिछले तीन वर्षों से बीपीएल कार्ड धारकों वाली सुविधा ले रहा है। बीपीएल कार्ड (215730235279) धारक और आधा दर्जन पारिवारिक सदस्यों वाले रामप्रसाद 5 बीघा जमीन के स्वामी हैं, इसके बावजूद ये अगस्त 2015 से बीपीएल कार्ड धारकों वाली सुविधाएं ले रहे हैं। बीपीएल कार्ड धारक मोहम्मद लतीफ पेशे से लाइसेंसी आतिशबाज हैं। इनके पास लग्जरी चैपहिया वाहन है फिर भी गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की सूची में नाम शामिल करवाए हुए हैं। इसके अतिरिक्त 200 बीपीएल कार्ड धारक परिवारों की सूची में 65 परिवार ऐसे हैं जिनके पारिवारिक सदस्यों की संख्या पिछले कई वर्षों से मात्र एक सदस्य के रूप में ही दर्ज है। ये परिवार कई बार पंचायत सचिव से लेकर ग्राम प्रधान तक पारिवारिक सदस्यों की संख्या बढ़वाए जाने की गुहार लगा चुका है लेकिन रिश्वत न मिलने के कारण सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ायी जा रही।
इसी तरह से अन्त्योदय योजना के तहत काफी मात्रा में फर्जी कार्ड बने हुए हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा प्रदेश में अन्त्योदय अन्न योजना लागू की गई है। इस योजना के अन्तर्गत ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में जो निर्धनतम परिवार है उन्हें रू0 2.00 प्रति किग्रा0 की दर से गेहूँ तथा रू0 3.00 प्रति किग्रा0 की दर से चावल प्रति परिवार प्रतिमाह उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्त्योदय अन्न योजना में लाभार्थी परिवार को प्रतिमाह 35 किलो खाद्यान्न (गेहूँ एवं चावल) प्रति परिवार प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है। लेवी चीनी 700 ग्राम प्रति यूनिट रू0 13.50 प्रति किलो की दर पर उपलब्ध करायी जाती है। सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए भी गरीब से अमीर बनने वालों की संख्या काफी तादाद में है। साफ तौर से कहा जाए तो ऐसे परिवार गरीबों के हक का निवाला छीन रहे हैं और उनके मददगार के रूप में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार है।
देवती ग्राम में अन्त्योदय योजना के तहत राशन कार्ड धारकों की संख्या 96 है। दावा किया जा रहा है कि इनमें से मात्र 15 से 20 परिवार ही वास्तविक अर्हता रखते हैं जबकि शेष परिवारों के नाम फर्जी तौर से सूची मंे दर्ज हैं। सूची में 71 नम्बर पर दर्ज कार्ड संख्या 215720260253 राजाराम के नाम से है। राजाराम वार्ड नम्बर 8 में पंच हैं तो दूसरी ओर प्रमाण के तौर पर वार्ड नम्बर 10 की पंच नसीमुन्निशां के नाम से भी अन्त्योदय योजना के तहत राशन कार्ड बना हुआ है।
इसी तरह से ग्राम गौरिया खुर्द में भी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिली भगत से बीपीएल और अन्त्योदय योजना के तहत फर्जी राशन कार्ड बनाए गए हैं। इस गांव में बीपीएल कार्ड धारक परिवारों की संख्या 140 है जबकि अन्त्योदय योजना के तहत राशन कार्ड धारक परिवारों की संख्या 70 है। गांव के ही लोगों का दावा है कि बीपीएल कार्ड धारक परिवारों में 50 फीसदी परिवारों के नाम फर्जी तरीके से शामिल हैं जबकि अन्त्योदय योजना के तहत बने राशन कार्डों में मात्र 15 से 20 फीसदी राशन कार्ड ही सही हैं, शेष राशन कार्ड रिश्वत लेकर फर्जी तरीके से बनाए गए हैं। जानकर हैरत होेगी कि इस गांव में ऐसे-ऐसे लोगों के नाम बीपीएल और अन्त्योदय योजना में शामिल कर लिए गए हैं जिनके पास पक्का मकान, जमीन और चैपहिया वाहन तक हैं।
दो गांवों के उपरोक्त उदाहरण तो मात्र बानगी भर हैं जबकि दावा किया जा रहा है कि यदि निष्पक्ष तरीके से जांच हो तो उपरोक्त योजना के तहत तमाम राशन कार्ड ऐसे पाए जायेंगे जो पूरी तरह से फर्जी हैं और पिछले कई वर्षों से गरीबों के हक का निवाला छीनते चले आ रहे हैं।
ये हैं नियम
पूर्व में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का चिन्हींकरण निर्धारित लक्ष्य के अन्तर्गत शासनादेश संख्या-437/29-खाद्य-डेस्क-1-1 (9)/97 दिनांक 20-09-1997 के दिशा निर्देशानुसार रू0 9000/- वार्षिक आय सीमा के अन्तर्गत आने वाले परिवारों से किया गया था। अब राज्य योजना आयोग-1 के शासनादेश संख्या-18 एम(6)/35-अ0-1/2004-12, दिनांक 17-06-2004 के अनुसार पांच सदस्यों के परिवार को आधार मानते हुए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रू0 19884/- प्रति परिवार प्रति वर्ष तथा शहरी क्षेत्र में रू0 25546/- प्रति परिवार प्रति वर्ष गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बी0पी0एल0) व्यक्तियों/परिवारों की वार्षिक आय सीमा माना गया है। उक्त आय से अधिक वार्षिक आय वाले ए0पी0एल0 योजना में राशन कार्ड प्राप्त करने की पात्रता रखते हंै। बी0पी0एल0/अन्त्योदय योजना में अधिकतम लाभार्थी परिवारों का लक्ष्य क्रमशः 65.845 लाख एवं 40.945 लाख शासन द्वारा निर्धारित किया गया परन्तु ए0पी0एल0 योजना में अधिकतम परिवारों का कोई लक्ष्य निर्धारित नही है। सभी उल्लिखित योजना के अन्तर्गत निर्गत किये गये राशन कार्ड पर लाभार्थी परिवार के मुखिया का फोटो व होलोग्राम भी चस्पा रहता है।
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हर बार फेल हो जाती है फूलप्रूफ योजना 
प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक जनपद स्तर पर सभी योजनाओं के पुराने राशन कार्ड निरस्त कर नये सिरे से बुकलेट फार्म में नए राशन कार्ड वितरित कराये जाने का अभियान भी कई बार चलाया जा चुका है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत नए सिरे से लाभार्थी परिवारों का मानक के अनुरूप सत्यापन कराकर बी0पी0एल0 के लाभार्थियों को सफेद, अन्त्योदय लाभार्थियों को गुलाबी, ए0पी0एल0 परिवारों को पीले तथा अन्नपूर्णा लाभार्थियों को हल्के हरे रंग के राशन कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये थे। हर बार दावा तो यही किया जाता रहा है कि जल्द ही फर्जी राशन कार्ड धारकों के खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन हर बार फ्राॅड करने वाले चकमा देने में सफल होते रहे हैं क्योंकि कार्डों के सत्यापन का अधिकार जिनके हाथों में है वे पहले से ही रिश्वत की डोर से बंधे हुए हैं। ग्रामीणों की मानें तो यदि मामले की जांच उच्च स्तर से की जाए तो निश्चित तौर पर ग्राम प्रधान से लेकर पंचायत सचिवों के फंसने की संभावना प्रबल है। जाहिर है पंचायत सचिवों को कार्डों के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपे जाने की दशा में ऐसा सम्भव नहीं है।
वैसे तो समस्त जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिये गये हैं कि विभिन्न कमजोर वर्गों विशेष कर बाल्मीकि परिवारों, अल्प संख्यक समुदायों, पिछडे वर्गों व मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों के राशन कार्ड विशेष अभियान चलाकर एवं कैम्प लगाकर मौके पर ही वितरित किये जायें, अमूमन होता ऐसा नहीं है। जिलाधिकारी पंचायत सचिव को जिम्मेदारी सौंपकर निश्चिंत बैठ जाते हैं और पंचायत सचिव ग्राम प्रधान से मिलकर खेल कर जाता है। बताते चलें कि राशन कार्ड का सत्यापन तथा फर्जी यूनिट उन्मूलन के लिये समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार एवं काला बाजारी पर नियंत्रण बना रहे, इसके बावजूद फर्जी कार्ड धारक पकड़ में नहीं आते।

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