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भारत में आज मनाया गया प्रदूषण नियंत्रण दिवस 

आज 2 दिसंबर को देश में प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जा रहा है। इसे मनाने का उद्देश्य है औद्योगिक आपदा के प्रबंधन और नियंत्रण के प्रति लोगों के बीच जागरूकता फैलाना, साथ ही हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना और उनमें होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए अलग-अलग तरह से समाज में जागरूकता फैलाना है।

इसी तरह अपने देखा कि कहने को तो राजधानी लेकिन साँस लेने में बेहद परेशानी दिल्ली की आबोहवा में इस कदर जहर घुल गया था कि लोगों को साँस लेने में दिक़्क़त हो रही थी,सीने में जलन, आँखों में आंसू। पहले दिल्ली के हालात खराब हुए उसके बाद बदतर हुए और अब भयानक स्थिति आ गई। दिवाली के समय दिल्ली की फिजाओं में रहना मौत से खेलने से कम नहीं होता है। अगर दिल्ली में होने वाले इस प्रदूषण पर सही ढंग से नियंत्रण नहीं किया गया तो वो समय आने में ज्यादा समय नहीं रहेगा जब बच्चों को स्कूल भेजते समय शुद्ध पानी दिया जाता है उसके साथ एक ऑक्सीजन का छोटा सा सलेंडर भी उनके साथ फिट करके भेजना पड़ेगा।

दिल्लीवासी इसी तरह प्रदूषित हवा में सांस लेते रहे तो यहां के एक शख्स की जिंदगी औसतन 17 साल कम हो जाएगी। पूरे देश में इस भयंकर स्थिति के प्रति जागरुकता का अभाव है। दिल्ली का प्रदूषण हर साल दुनियाभर में चर्चा में रहता है।

इस दिन का कनेक्शन भोपाल गैस त्रासदी से भी जुड़ा हुआ है।  दरअसल, देश में हर साल 2 दिसंबर को नेशनल पलूशन कंट्रोल डे उन लोगों की याद में मनाया जाता है, जो 2-3 दिसंबर, 1984 भोपाल गैस त्रासदी के शिकार हो गए थे।

प्रदूषण का अर्थ है -प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना! न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना ! विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए चाहिए कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं, हरियाली की मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हों। आबादी वाले क्षेत्र खुले हों, हवादार हों, हरियाली से ओतप्रोत हों। कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए और उनसे निकले प्रदूषित मल को नष्ट करने के उपाय सोचना चाहिए।

 

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