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UP पंचायत चुनाव में शिक्षकों की मौत के आकड़े पर सियासत 

उत्तर प्रदेश में पिछले महीने 4 चरणों में पंचायत चुनाव हुए थे । जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी। इस दौरान बहुत से शिक्षक कोरोना से पीड़ित हो गए। जिनमें सैकड़ों शिक्षकों की मौत हो गई । इसके बाद शिक्षक संघ ने 2 मई को हुए चुनाव मतगणना पर भी अपना ऑब्जेक्शन करते हुए कहा था कि पूर्व में ही शिक्षकों की बहुत संख्या में मौत हो चुकी है, इसलिए वह मतगणना में शामिल नहीं होंगे।

लेकिन बावजूद इसके शिक्षकों को अपनी जान हथेली पर रखकर मतगणना में भी शामिल होना पड़ा था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी संज्ञान लेना पड़ा था । साथ ही हाईकोर्ट में चुनाव आयोग को मौतों की सही संख्या बताने को कहा था।

चौंकाने वाली बात यह थी कि शिक्षकों की ड्यूटी के दौरान हुई मौत के मामले में अभी तक भी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मृतकों की संख्या कितनी थी। इस मामले में शिक्षक संघ का दावा 700 से अधिक मौतों का है । जबकि सरकार का आंकड़ा 135 का । कॉन्ग्रेस ने भी उनकी मौत 500 बताई है।

अभी तक भी सरकार यह जांच नहीं कर पाएगी पाई कि आखिर चुनाव ड्यूटी के दौरान कितने शिक्षकों की मौत हुई ।अब उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे में को यह कहकर हवा दे दी है कि शिक्षकों की मौत के मामले में सही से जांच नहीं हो रही। सवाल यह है कि आखिर सरकार शिक्षकों की ड्यूटी पर हुई मौतो की सही जानकारी क्यों नहीं जुटा पा रही है?

गौरतलब है कि प्राथमिक शिक्षक संघ ने राज्य निर्वाचन आयोग और यूपी के मुख्यमंत्री को चुनाव ड्यूटी में लगे 706 शिक्षकों की मौत की सूची सौंपते हुए दो मई को होने वाली मतगणना को रोकने की मांग की थी। जबकि दूसरी तरफ यूपी सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि कोरोना संक्रमण की वजह से ड्यूटी में तैनात 135 शिक्षकों की मौत हुई है।

इसका संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। साथ ही कोरोना संक्रमण के बीच पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था।

हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मृत सरकारी कार्मिकों की संख्या का ब्यौरा तलब किया था।
राज्य सरकार का इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि चुनाव हाईकोर्ट के निर्देश पर हुए और चुनाव प्रक्रिया आयोग ने संपन्न कराई है, ऐसे में राज्य सरकार का इससे ज़्यादा मतलब नहीं था।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था कि जिन अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई है उन्हें सरकार 50 लाख की आर्थिक सहायता दे।

जबकि शिक्षको की मौत की संख्या का कांग्रेस का अलग दावा रहा। कांग्रेस की महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा है कि पंचायत चुनाव में 500 शिक्षकों की मौत डरावनी है। वह उन्हें 50 लाख रुपये का मुआवज़ा और आश्रित को नौकरी दी जाए।

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